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पहाड़ में अटकी नर्मदा की धार: 15 साल बाद भी अधूरी ‘लाइफ लाइन’, सुरंग बनाने में लगेगा और दो माह का समय

2011 में पूरा होना था काम, 2026 में भी सुरंग अधूरी, पांच जिलों की सिंचाई और पेयजल योजनाएं प्रभावित, समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने जताई नाराजगी, टनल निर्माण में अभी लगे दो माह का और वक्त, लगातार बढ़ रहीं तारीखें

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कटनी

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Balmeek Pandey

May 03, 2026

Delay in the Construction of the Narmada Tunnel

Delay in the Construction of the Narmada Tunnel

कटनी. मध्यप्रदेश की बहुप्रतीक्षित बरगी व्यपवर्तन नर्मदा नहर परियोजना एक बार फिर लेटलतीफी का शिकार हो गई है। वर्ष 2008 में शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी योजना को 40 माह में पूरा कर 2011 तक किसानों और शहरों को पानी पहुंचाने का लक्ष्य था, लेकिन 2026 में भी परियोजना अधूरी पड़ी है। हालात यह हैं कि कटनी के स्लीमनाबाद क्षेत्र में बन रही 12 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड टनल अब तक पूरी नहीं हो सकी है। बार-बार समय सीमा तय होने के बावजूद निर्माण कार्य अटकता जा रहा है।
1 मई को आयोजित समीक्षा बैठक में कलेक्टर आशीष तिवारी ने परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए कई विभागों को फटकार लगाई। बैठक में सामने आया कि टनल निर्माण का कार्य अब भी अधूरा है और करीब 185 मीटर सुरंग निर्माण में दो माह का अतिरिक्त समय लग सकता है। इससे पहले फरवरी 2026 तक कार्य पूरा करने की गाइडलाइन तय की गई थी, लेकिन अप्रेल बीतने के बाद भी काम पूरा नहीं हो पाया।

इन जिलों की है जीवनरेखा

यह परियोजना जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना और रीवा जिलों के लिए जीवनरेखा मानी जा रही है। योजना पूरी होने के बाद करीब 2 लाख 45 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी, जबकि कटनी शहर को पेयजल संकट से राहत मिलने की उम्मीद है।

पुरानी मशीनें बनीं सबसे बड़ी बाधा

स्लीमनाबाद में पहाड़ के नीचे लगभग 30 मीटर गहराई में बन रही देश की सबसे लंबी जल सुरंग का निर्माण टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) से किया जा रहा है। लेकिन पुरानी मशीनों में लगातार खराबी आने से काम बार-बार रुक जा रहा था। डाउन स्ट्रीम की मशीन खराब होने के बाद उसकी मरम्मत के लिए करीब 100 फीट गहरी खुदाई करनी पड़ी थी। मशीन सुधार के लिए अमेरिका से इंजीनियर और उपकरण बुलाए गए थे। जानकारों के अनुसार क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना भी चुनौती बनी रही। पत्थर, मिट्टी और पानी की मिश्रित परतों के कारण मशीनों के कटर बार-बार टूट रहे थे। कई बार पानी रिसाव और मिट्टी धंसने जैसी घटनाओं के कारण छह-छह माह तक काम बंद रखना पड़ा।

लागत बढ़ती गई, इंतजार भी लंबा होता गया

करीब 5200 करोड़ रुपए की इस परियोजना में अकेले टनल निर्माण पर अब तक 800 करोड़ रुपए से अधिक खर्च हो चुके हैं और अनुमान है कि यह लागत 1400 करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है। हर माह करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद काम समय पर पूरा नहीं हो पा रहा। वर्ष 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने जून तक टनल निर्माण पूरा करने की समय सीमा तय की थी, लेकिन वह भी पूरी नहीं हो सकी। अब अधिकारियों का अनुमान है कि पूरी परियोजना को पूरी तरह गति पकडऩे में अभी और समय लग सकता है।

किसानों और शहरों को बड़ी उम्मीद

परियोजना पूरी होने पर जबलपुर में 60 हजार हेक्टेयर, कटनी में 21 हजार 823 हेक्टेयर, सतना में 1 लाख 59 हजार 655 हेक्टेयर और रीवा में 3 हजार 532 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। कटनी जिले के बहोरीबंद, रीठी, स्लीमनाबाद और विजयराघवगढ़ क्षेत्र के हजारों किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। समीक्षा बैठक में ढीमरखेड़ा माइक्रो उद्वहन सिंचाई योजना की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने 4 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाने का कार्य 15 मई तक पूरा करने के निर्देश दिए। इस योजना से ढीमरखेड़ा तहसील के 99 गांवों की 15 हजार 58 हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी। वहीं बहोरीबंद सूक्ष्म उद्वहन सिंचाई परियोजना की धीमी प्रगति पर कलेक्टर ने नाराजगी जताते हुए कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। इस योजना से कटनी जिले के बड़े हिस्से में सिंचाई सुविधा विकसित होनी है।

कटनी शहर को मिलेगा नर्मदा जल

बैठक में कटनी शहर की पेयजल योजना की भी समीक्षा हुई। कलेक्टर ने नगर निगम अधिकारियों को निर्देश दिए कि घिनौची नाला क्षेत्र में पक्के निर्माण और पाइपलाइन की कार्ययोजना अभी से तैयार की जाए, ताकि नहर से पानी छोड़े जाने पर रिसाव न हो और शहरवासियों को जल्द नर्मदा जल मिल सके।

फैक्ट फाइल

  • 2008 में शुरू हुई थी बरगी व्यपवर्तन नर्मदा नहर परियोजना
  • 2011 में पूरा करने रखा गया था लक्ष्य, 2026 में भी अधूरी
  • 5200 करोड़ रुपए लागत की है यह परियोजना
  • 12 किलोमीटर है स्लीमनाबाद टनल की लंबाई
  • 185 मीटर है टनल में शेष कार्य
  • 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचाई लक्ष्य
  • 21,823 हेक्टेयर भूमि एवं शहर को पेयजल आपूर्ति की योजना

वर्जन

समीक्षा बैठक में नर्मदा नहर और सिंचाई परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। 185 मीटर शेष टनल का काम दो माह में पूरा होने का अनुमान है। ढीमरखेड़ा माइक्रो उद्वहन सिंचाई योजना की पाइपलाइन का कार्य 15 मई तक पूरा कराने को कहा। बहोरीबंद सूक्ष्म उद्वहन सिंचाई परियोजना की धीमी प्रगति पर अधिकारियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए। पेयजल योजना को लेकर भी अधिकारियों को घिनौची नाला क्षेत्र में पक्का निर्माण और पाइपलाइन की कार्ययोजना पहले से तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि नर्मदा जल आपूर्ति शुरू होते ही शहरवासियों को लाभ मिल सके।

आशीष तिवारी, कलेक्टर।