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कटनी में ई-व्हीकल का बढ़ता क्रेज लेकिन चार्जिंग स्टेशन शून्य, ग्रीन एनर्जी की राह में बुनियादी ढांचे की बड़ी बाधा

सरकार ईवी को दे रही बढ़ावा, फिर भी करीब 98 पेट्रोल पंपों पर एक भी चार्जिंग प्वाइंट नहीं, नगर निगम व कंपनियों की सुस्ती उजागर

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कटनी

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Balmeek Pandey

May 05, 2026

Charging Stations Not Built for E-Vehicles

Charging Stations Not Built for E-Vehicles

कटनी. केंद्र और राज्य सरकारें प्रदूषण कम करने और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) को तेजी से प्रमोट कर रही हैं, लेकिन शहर में इसकी जमीनी तस्वीर चिंताजनक बनी हुई है। शहर में ई-रिक्शा, दोपहिया, कार और लोडिंग ई-वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, फिर भी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह नदारद है। एक भी सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन नहीं होने से इस बदलाव की रफ्तार थमती नजर आ रही है।
सरकार द्वारा ईवी खरीद पर सब्सिडी, टैक्स में छूट और कई प्रोत्साहन योजनाएं लागू की गई हैं, ताकि लोग पेट्रोल-डीजल से हटकर स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ें। इन प्रयासों का असर भी दिख रहा है। बीते तीन वर्षों में जिले में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में हर साल करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में जिले में लगभग 5538 इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हैं, जिनमें करीब 80 प्रतिशत हिस्सेदारी ई-रिक्शा की है। इसके अलावा बाइक और स्कूटी, थ्री-व्हीलर और इलेक्ट्रिक कारें शामिल हैं। इसके बावजूद चार्जिंग सुविधा का अभाव बड़ी समस्या बना हुआ है। वाहन मालिकों को मजबूरी में अपने घरों पर ही सामान्य वायरिंग के माध्यम से चार्जिंग करनी पड़ रही है। बिजली कंपनी द्वारा कमर्शियल उपयोग पर लागू दरों के कारण यह व्यवस्था महंगी भी पड़ रही है।

नगरनिगम की योजना भी कागजों पर

नगर निगम ने दीनदयाल कटनी सिटी बस सर्विस लिमिटेड के माध्यम से शहर में दो आधुनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना बनाई थी। इस योजना में ऐप आधारित चार्जिंग सिस्टम, क्यूआर कोड स्कैनिंग, ऑनलाइन भुगतान, वेटिंग हॉल, रेस्टोरेंट और प्रसाधन जैसी सुविधाएं प्रस्तावित थीं। इसके साथ ही शहर के विभिन्न स्थानों पर पांच अतिरिक्त चार्जिंग प्वाइंट विकसित करने की रूपरेखा भी तैयार की गई थी। सब्सिडी और निजी निवेशकों की कमी के चलते यह महत्वाकांक्षी योजना अब तक कागजों में ही कैद है।

98 पेट्रोलपंप लेकिन चार्जिंग स्टेशन नहीं

जिले में संचालित 98 पेट्रोल पंप भी इस दिशा में कोई पहल नहीं कर सके हैं। पिछले एक वर्ष में करीब एक दर्जन नए पेट्रोल पंप खुले, लेकिन पेट्रोलियम कंपनियों ने अपने किसी भी आउटलेट पर ईवी चार्जिंग सुविधा स्थापित नहीं की। इससे साफ है कि ग्रीन एनर्जी को लेकर नीतिगत इच्छाशक्ति जमीनी स्तर पर कमजोर नजर आ रही है। दिलचस्प बात यह है कि ईवी की संख्या बढऩे के बावजूद पेट्रोल-डीजल की खपत में कोई खास कमी नहीं आई है। जिले में प्रतिदिन करीब 50 हजार लीटर पेट्रोल और लगभग 1 लाख लीटर डीजल की खपत हो रही है, जो पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता को दर्शाती है।

घरों में चार्जिंग से खतरा, इंदौर में हुआ था हादसा

विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश घरों की वायरिंग अधिक लोड सहने के लिए उपयुक्त नहीं होती, जिससे ओवरलोडिंग और शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ जाता है। सस्ते और लोकल चार्जर वोल्टेज को नियंत्रित नहीं कर पाते, जिससे बैटरी ओवरहीट होकर फटने का जोखिम रहता है। खराब अर्थिंग और बंद स्थानों में चार्जिंग करने से वेंटिलेशन की कमी के कारण तापमान खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है। प्रदेश के इंदौर में चार्जिंग के दौरान हुए हादसे में आठ लोगों की मौत हो चुकी है, जो इस खतरे की गंभीरता को दर्शाता है। इसके बावजूद न तो जिम्मेदार विभाग पूरी तरह सक्रिय हुए हैं और न ही उपभोक्ताओं में पर्याप्त जागरूकता दिखाई दे रही है।

अब दोनों बस स्टैंड में बनी योजना

नगरनिगम द्वारा एक बार फिर शहर के प्रियदर्शनी बस स्टैंड व झिंझरी में निर्माणाधीन बस स्टैंड में ई- चार्जिंग स्टेशन बनाने की योजना बनाई है। इसके लिए टेंडर भी जारी किए जा चुके हैं लेकिन अबतक बोर्ड की बैठक में इसे स्वीकृति नहीं मिली है। बताया जा रहा है कि ये स्टेशन पीपीपी मोड पर बनाए जाएंगे। फिलहाल वाहन चालकों को जिले में एक भी चार्जिंग स्टेशन की सुविधा नहीं मिल सकी है।

इनका कहना

शहर में दोनों बस स्टैंड में ई-चार्जिंग स्टेशन खोलने की योजना है। इसके लिए टेंडर जारी किए जा चुके हैं। बोर्ड की बैठक में स्वीकृति मिलने पर वर्क आर्डर जारी किए जाएंगे। दोनों चार्जिंग स्टेशन पीपीपी मॉडल पर आधारित हैं।

योगेश पवार, नोडल अधिकारी, नगर निगम।