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Video: हाथों में खाली बैग लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे बच्चे, अफसरों से पूछा- ‘सर’, हमें स्कूल कब मिलेगा

चरगवा में हाई स्कूल नहीं होने से बच्चों का भविष्य अधर में, 8 किलोमीटर दूर पढऩे जाने को मजबूर छात्र-छात्राएं, बालिका शिक्षा पर सबसे ज्यादा असर, ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन

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कटनी

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Balmeek Pandey

May 13, 2026

school

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कटनी. कलेक्ट्रेट कार्यालय में मंगलवार को शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत से जुड़ा एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने वहां मौजूद अधिकारियों, कर्मचारियों और आम लोगों को भावुक कर दिया। ग्राम चरगवा, थाना स्लीमनाबाद के स्कूली बच्चे अपने अभिभावकों और ग्रामीणों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे। बच्चों के हाथों में किताबें नहीं, बल्कि खाली स्कूल बैग थे। इन बैगों को प्रशासन के सामने रखते हुए बच्चों ने मासूम आवाज में सवाल किया- सर, हमें हमारा स्कूल कब मिलेगा। बच्चों का यह सवाल केवल एक गांव की मांग नहीं, बल्कि ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की उस पीड़ा को सामने लाया, जहां हाई स्कूल की सुविधा नहीं होने से हजारों बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। प्रदर्शन के दौरान कई बच्चों ने कहा कि वे पढऩा चाहते हैं, आगे बढऩा चाहते हैं, लेकिन गांव में हाई स्कूल नहीं होने से उनकी पढ़ाई बीच में ही रुकने की स्थिति बन रही है।
ग्राम चरगवा सहित आसपास के गांवों के ग्रामीण, अभिभावक और छात्र-छात्राएं आम आदमी पार्टी के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए ग्राम चरगवा में तत्काल शासकीय हाई स्कूल स्वीकृत करने की मांग की गई। ग्रामीणों ने बताया कि चरगवा क्षेत्र का बड़ा ग्रामीण केंद्र है, जहां पाली, पुरा, पहरुआ, सल्हना सहित कई गांवों के बच्चे पढ़ाई के लिए आते हैं। इसके बावजूद यहां केवल माध्यमिक स्तर तक ही शिक्षा की व्यवस्था है। कक्षा 8वीं के बाद बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए लगभग 8 किलोमीटर दूर घुघर, देवरी और कोडियां जाना पड़ता है।

रोजाना 16 किलोमीटर का सफर

ग्रामीणों ने बताया कि विद्यार्थियों को प्रतिदिन आने-जाने में करीब 16 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। कई बच्चे पैदल या साइकिल से स्कूल जाते हैं। बरसात के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब रास्ते खराब होने के कारण स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है। अभिभावकों का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार अपने बच्चों के लिए निजी वाहन या अन्य परिवहन सुविधा उपलब्ध नहीं करा सकते। ऐसे में कई बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं।

बालिकाओं की शिक्षा पर सबसे अधिक असर

ग्रामीणों ने कहा कि हाई स्कूल नहीं होने का सबसे ज्यादा असर बालिका शिक्षा पर पड़ रहा है। दूरस्थ क्षेत्रों में पढ़ाई के लिए भेजने को लेकर अभिभावकों में सुरक्षा संबंधी चिंता बनी रहती है। कई परिवार दूरी और सुरक्षा कारणों से बेटियों की पढ़ाई आठवीं के बाद बंद कर देते हैं। ग्रामीण महिलाओं ने कहा कि सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अलग हैं। गांव में हाई स्कूल नहीं होने से बेटियों के सपने अधूरे रह जाते हैं।

खाली बैग बने आंदोलन का प्रतीक

जनसुनवाई में पहुंचे बच्चों ने जब अपने खाली बैग अतिरिक्त कलेक्टर के सामने रखे तो वहां मौजूद लोग कुछ देर के लिए भावुक हो उठे। बच्चों ने कहा कि उनके बैग किताबों से भरने चाहिए, लेकिन स्कूल नहीं होने के कारण उनका भविष्य खाली होता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना था कि यह प्रदर्शन बच्चों के भविष्य को बचाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा हर बच्चे का संवैधानिक और मौलिक अधिकार है।

ज्ञापन में रखीं प्रमुख मांगें

ग्रामीणों और अभिभावकों ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की कि ग्राम चरगवा में तत्काल शासकीय हाई स्कूल स्वीकृत किया जाए। आगामी शैक्षणिक सत्र से कक्षा 9वीं एवं 10वीं की पढ़ाई शुरू कराई जाए। विद्यालय भवन का निर्माण करवाकर पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति की जाए। पेयजल, शौचालय, फर्नीचर एवं अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। प्रदर्शन के दौरान इस दौरान एडवोकेट अनिल सिंह सेंगर, सुशील सिंह, धर्मेंद्र सिंह राणा, धर्मेंद्र सिंह, अर्जुन कुशवाहा, सुखदेव यादव, सुमत सिंह, रवि पाल, हरकेश पाल, अजय चौधरी, संदीप चौधरी, रवि चौधरी, कल्लू यादव सहित सैकड़ों ग्रामीण, छात्र-छात्राएं, अभिभावक और क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।