कटनी

सरकारी तंत्र की लापरवाही का प्रदेश में बड़ा मामला: भ्रष्टाचार के चलते धसका निर्माणाधीन पुल, 12 साल में ठेकेदार ने नहीं बनाया पुल

- शहर की जीवनदायनी व कटनी को दूसरे जिले, नेशनल हाइवे क्रमांक 7 को मिर्जापुर से जोडऩे वाले मार्ग पर 2008 में पुल की अधारशिला रखी गई। लगभग 13 करोड़ रुपये से पुल निर्माण का डीपीआर तैयार हुआ। साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत से पुल का निर्माण शुरू हुआ। 12 साल बाद भी पुल तैयार नहीं हुआ। - इसके मुख्य दोषी हैं मप्र सेतु निगम के अधिकारी व ठेकेदार। इतने वर्षों में विभाग ने अधिकारियों पर चार करोड़ से ज्यादा ही राशि बतौर वेतन दी होगी। - जनता के खून-पसीने की कमाई से सरकार के खजाने में जमा टैक्स के महत्व को न तो समझा और ना ही लोगों की समस्या को जाना।

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Jul 29, 2019
MP Bridge Corporation negligence in broken of Katni river bridge

कटनी. शहर की जीवनदायनी व कटनी को दूसरे जिले, नेशनल हाइवे क्रमांक 7 को मिर्जापुर से जोडऩे वाले मार्ग पर 2008 में पुल की अधारशिला रखी गई। लगभग 13 करोड़ रुपये से पुल निर्माण का डीपीआर तैयार हुआ। साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत से पुल का निर्माण शुरू हुआ। 12 साल बाद भी पुल तैयार नहीं हुआ। इसके मुख्य दोषी हैं मप्र सेतु निगम के अधिकारी व ठेकेदार। इतने वर्षों में विभाग ने अधिकारियों पर चार करोड़ से ज्यादा ही राशि बतौर वेतन दी होगी। जनता के खून-पसीने की कमाई से सरकार के खजाने में जमा टैक्स के महत्व को न तो समझा और ना ही लोगों की समस्या को जाना। जिम्मेदार पुल का निर्माण पूरा नहीं कर पाए और इसका खामियाजा जनता को भोगना पड़ रहा है। हैरानी की बात तो यह है कि सरकारी तंत्र की लापरवाही का प्रदेश में यह पहला उदाहरण है, जिसमें जनता के करोड़ों रुपये एक झटके में मिट्टी में मिला दिए गए, समस्य गंभीर है वह अलग। हैरानी की बात तो यह है कि शहर के लिए यह कोई सौगात नहीं मिल रही थी, बल्कि नदी पर बना पुल 12 साल पहले आवागमन के लिए अयोग्य घोषित हो गया है, इस समस्या से निपटने तत्काल पुल की जरुरत थी और जनता को इंतना लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

धमाके से सब हैरान, जांच में अनदेखी
जिसदिन पुल धसका था उसके पहले तेज धमका हुआ था। इस धमक को लोगों ने 200 मीटर दूर तक सुना है। बताया जा रहा है कि 22 जुलाई से केबिल खीचना शुरू किया है। 24 जुलाई को दो बजे तक तार खीचकर बराबर किया गया। इंजीनियरों का यह तर्क भी है कि यदि केबिल फेल होती, या पुल फेल होती है या क्रेक आता है तो सेंटर में समस्या आनी थी। धमाके की अवाज से पुल क्रैश हुआ, ब्लास्टिंग जैसी आवाज आई। कांक्रीट में जिलेटिन कैप नहीं थी, इससे धमको पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि जांच के दौरान अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। वहीं इस मामले में ठेकेदार रामसज्जन शुक्ला ने पुल धसकने के मामले में अन्य एक्सपर्ट एजेंसी से जांच कराने मांग की है।

शहर के नागरिकों को भारी नुकसान
पुल जर्जर घोषित है, जिला प्रशासन द्वारा घाट पर बकायदा सूचना पटल लगाया गया है, जिसमें लिखा है कि पुल जर्जर है। भारी वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित है। कभी भी पुल टूट सकता है और शहर दो हिस्सों में बट जाएगा। शहर का आवागमन पूरी तरह से बंद हो जाएगा। हैरानी की बात तो यह है कि 2008 से लेकर 2019 तक पुल नहीं बन पाया। जनता को अपना हिमायती बताने वाले जनप्रतिनिधि भी सिर्फ हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। अब पुल का निर्माण रुक गया है, बारिश के बाद भी आगे की कार्रवाई शुरू होगी।

इनका कहना है
पुल धसकने के मामले में विभागीय उच्च स्तर पर कार्रवाई हुई है। मुख्य अभियंता भोपाल द्वारा जांच की गई है। तकनीकी जांच और निर्णय के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी। अब आगे इस तरह की घटना की पुनर्रावृत्ति न हो। जल्दी ठोस पुल बने और लोगों को राहत मिले इस दिशा में पहल की जाएगी।
शशिभूषण सिंह, कलेक्टर।

Published on:
29 Jul 2019 11:45 am
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