
Neha Pachisia : कटनी में बहुचर्चित भूमि के बदले राहत वाले सौदेबाजी कांड में निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया समेत तीनों आरोपियों को बड़ी राहत मिली है। उनकी गिरफ़्तारी को लेकर जारी वारंट कोर्ट ने निरस्त कर दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने यह निर्णय दिया है। कोर्ट ने निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया समेत तीनों आरोपियों के 18 सितंबर को जारी गिरफ़्तारी वारंट तत्काल प्रभाव से निरस्त कर वापस लेने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही एसआइटी जबलपुर के निरीक्षक चंद्रकांत झा की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ गए हैं। इस पुलिस अधिकारी को कोर्ट ने भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
अदालत का यह आदेश केवल 18 सितंबर को जारी गिरफ़्तारी वारंट से संबंधित है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वारंट निरस्त होने से आरोपियों के खिलाफ दर्ज प्रकरण खत्म नहीं हुआ है।
कोर्ट ने वारंट जारी करने संबंधित पूर्व में सत्र न्यायालय से खारिज आवेदन की जानकारी नहीं देने पर पुलिस निरीक्षक चंद्रकांत झा को फटकार लगाते हुए कार्यवाही की चेतावनी दी। कोर्ट ने कहा, सत्र न्यायालय से आवेदन खारिज होने के बाद इस न्यायालय के पास वारंट जारी करने का क्षेत्राधिकार नहीं था।
बता दें, पूर्व सीएसपी नेहा पर पद का दुरुपयोग कर महंगी जमीन का कौडिय़ों के दाम सौदा कराने का आरोप है। उनपर मामले में केस दर्ज हुआ तो विभाग ने निलंबित कर दिया था।
कटनी की निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया की याचिका पर हाईकोर्ट की भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम संबंधित विशेष बेंच में सुनवाई होगी। नेहा ने उनके पर दर्ज केस को रद्द करने याचिका दाखिल की है। राज्य सरकार ने तर्क दिया गया कि एफआइआर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं हैं। इसलिए नियमानुसार सुनवाई भ्रष्टाचार से जुड़े प्रकरणों के लिए निर्धारित बेंच में होनी चाहिए।
नेहा पच्चीसिया मामले में आज कोर्ट में सुनवाई होनी है। कोर्ट ने केस को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली उपयुक्त बेंच के समक्ष भेजने का निर्णय लिया था। 22 सितंबर को नई बेंच के समक्ष ही मामले की सुनवाई होगी। हालांकि नेहा के वकीलों ने इसका विरोध किया। उन्होंने पहले से तय बेंच में ही सुनवाई पर जोर दिया। नेहा पच्चीसिया के वकीलों ने तर्क दिया था कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं पिछली सुनवाई के बाद जोड़ी गई हैं।