कटनी में नहीं बना एयरपोर्ट, सीएम कटनी को बना रहे ‘माइनिंग कैपिटल’, लेकिन एयर कनेक्टिविटी के नाम पर जमीन तक तय नहीं
कटनी. प्रदेश सरकार एक ओर कटनी को देश की नई ‘माइनिंग कैपिटल’ के रूप में स्थापित करने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर जिले की सबसे बुनियादी जरूरतों में शामिल हवाई सुविधा आज भी फाइलों में कैद है। खनिज संपदा, बड़े निवेश प्रस्ताव और स्वर्ण भंडार मिलने के बाद जिले में तेजी से औद्योगिक पहचान बना रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि 15 वर्ष बाद भी जिले में हवाई पट्टी निर्माण के लिए जमीन तक तय नहीं हो सकी है। हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और फेसबुक पर कटनी को माइनिंग कैपिटल बनाने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता जताई थी। मुख्यमंत्री ने कहा था कि आधुनिक खनन प्रबंधन, औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन के जरिए कटनी को राष्ट्रीय स्तर का औद्योगिक मॉडल बनाया जाएगा। लेकिन इन बड़े दावों के बीच जिले में एयर कनेक्टिविटी का अभाव विकास की तस्वीर पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। जिले में आयोजित माइनिंग कॉन्क्लेव के दौरान जिले को 56 हजार करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले। जिले में गोल्ड रिजर्व मिलने की पुष्टि के बाद खनन गतिविधियों की संभावनाएं और बढ़ गई हैं। कटनी पहले से ही मार्बल, डोलोमाइट, आयरन ओर, सेंड स्टोन, राइस और दाल उद्योगों के लिए प्रदेश की प्रमुख व्यापारिक नगरी माना जाता है। इसके बावजूद यहां हवाई पट्टी तक नहीं है।
जिले में हवाई पट्टी निर्माण की मांग वर्षों पुरानी है। वर्ष 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हवाई पट्टी निर्माण की घोषणा भी की थी, लेकिन 13 साल बाद भी परियोजना धरातल पर नहीं उतर सकी। प्रशासनिक उदासीनता और जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता के चलते योजना लगातार ठंडी पड़ी रही। जानकारी के अनुसार झिंझरी और मझगवां क्षेत्र में हवाई पट्टी निर्माण के लिए जमीन तलाशने की प्रक्रिया चली थी। झिंझरी में तकनीकी कारण बताए गए, जबकि मझगवां में जमीन उपयुक्त मानी गई थी। बाद में वहां खदान स्वीकृति मिलने के बाद प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया। वर्ष 2023 में विमानन विभाग ने मझगवां का प्रस्ताव निरस्त कर दिया।
प्रदेश सरकार कटनी में आदर्श हैलीपेड निर्माण की तैयारी कर रही है। मप्र शासन के विमानन विभाग ने 19 अगस्त 2025 को कलेक्टर को पत्र लिखकर जमीन चिन्हित करने और विस्तृत कार्ययोजना भेजने के निर्देश दिए थे। पत्र में मप्र नागर विमानन नीति 2025 के तहत भविष्य की जरूरतों को देखते हुए कटनी में आधुनिक हैलीपेड विकसित करने की बात कही गई थी। हालांकि पत्र जारी होने के दो बाद भी जिला प्रशासन जमीन चिन्हित नहीं कर सका। इससे स्पष्ट है कि जिले में विमानन सुविधाओं को लेकर गंभीरता अब भी नजर नहीं आ रही।
कटनी देश के प्रमुख रेलवे जंक्शनों में शामिल है और यहां से बांधवगढ़, कान्हा तथा पन्ना जैसे टाइगर रिजर्व तक सडक़ मार्ग से आसान पहुंच है। बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक कटनी होकर गुजरते हैं। औद्योगिक निवेश और खनन गतिविधियों के विस्तार के बीच एयर कनेक्टिविटी की कमी निवेशकों और कारोबारियों के लिए भी बड़ी बाधा बन रही है। जिले के विजयराघवगढ़ विधायक संजय पाठक के पास स्वयं चार्टर्ड विमान है, लेकिन कटनी में हवाई पट्टी नहीं होने के कारण उन्हें जबलपुर या उमरिया से उड़ान भरनी पड़ती है। मुख्यमंत्री और मंत्रियों के दौरे के समय भी अस्थायी हैलीपेड बनाना पड़ता है।
हवाई सुविधा नहीं होने का सबसे बड़ा नुकसान आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में सामने आता है। एयर एंबुलेंस जैसी सेवाएं उपलब्ध न होने के कारण गंभीर मरीजों को नागपुर, दिल्ली या मुंबई जैसे शहरों तक तेजी से नहीं पहुंचाया जा सकता। विशेषज्ञ मानते हैं कि एयर कनेक्टिविटी होने से कई मरीजों की जान बचाई जा सकती है।
जिले की स्लीमनाबाद तहसील के इमलिया गांव में करीब 3.35 लाख टन स्वर्ण अयस्क मिलने का अनुमान लगाया गया है। लंबे भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण के बाद इस खोज को अंतिम रूप दिया गया। क्षेत्र में सोने के अलावा तांबा, जिंक, लेड और चांदी के भंडार भी बताए जा रहे हैं। मुंबई की ‘प्रॉस्पेक्ट रिसोर्स मिनरल प्राइवेट लिमिटेड’ कंपनी ने 121 करोड़ रुपए से अधिक की बोली लगाकर 50 वर्षों के लिए खनन लीज हासिल की है। लगभग 6.5 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित खनन गतिविधियों से कटनी में बड़े औद्योगिक विस्तार और रोजगार सृजन की संभावना जताई जा रही है।
जिले में हवाई पट्टी और आदर्श हैलीपेड निर्माण को लेकर शासन से जमीन चिन्हांकन संबंधी पत्र आया है। अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी ली जाएगी। जल्द ही जमीन चिन्हित कर विभाग को जानकारी भेजी जाएगी।