सूखे जलाशय, निस्तार को भी नहीं पानी, जिले के एक सैकड़ा से अधिक तालाबों का जलस्तर हुआ शून्य
कटनी. जिले में हुई अल्प वर्षा का असर शुरुआती गर्मी के साथ ही दिखाई देने लगा है। एक ओर जहां पीने के पानी की किल्लत जिले भर में बढ़ती जा रही है तो दूसरी ओर सिंचाई विभाग के एक सैकड़ा से अधिक जलाशयों को जलस्तर शून्य हो गया है। कुछ ही जलाशयों में इतना पानी बचा है कि उसमें मवेशी व वन्य प्राणी अपनी प्यास बुझा सकें। जिले में इस साल औसत से कम बारिश हुई थी, जिसके चलते जलाशयों का जलस्तर भी अधिक नहीं बढ़ सका था। स्थिति यह है कि फरवरी माह में ही अधिकांश जलाशयों की स्थिति गंभीर हो गई थी और रबी सीजन के आखिरी में किसानों को खेतों के लिए पानी नहीं मिला। वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को निस्तार के लिए भी जलाशयों से सहयोग नहीं मिल पा रहा है।
एक सब डिवीजन में बस रहा पानी
जिले में सिंचाई विभाग के चार सब डिवीजन हैं। जिसमें बरही, ढीमरखेड़ा, रीठी और बहोरीबंद शामिल हैं। रबी सीजन में फरवरी माह की स्थिति में मात्र एक ही डिवीजन के दो जलाशयों में पानी रहा। जिसमें बरही सब डिवीजन का अमाड़ी जलाशय, दतला डेम और सर्रा डेम शामिल थे। जिसमें ३.५९ मिलीयन क्यूबिक मीटर पानी फरवरी माह तक उपलब्ध था। अब इन जलाशयों में भी मवेशियों व वन्य प्राणियों के उपयोग के लिए ही बचा है। जिले में सिंचाई विभाग के १२० जलाशय हैं और उनमें से फरवरी माह से ही तीन डेम को छोड़कर सभी का जलस्तर शून्य हो चुका है।
तीसरी फसल को नहीं पानी
सिंचाई के लिए रबी सीजन में ही किसानों को पानी नहीं मिला है। ऐसे में तीसरी फसल के रूप में मूंग, उड़द व अन्य खेती करने वालों को जिले में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों को जलाशयों का सहयोग ही नहीं मिल पा रहा है और अधिकांश लोग खुद की बोरिंग के सहारे फसलें बचा रहे हैं।
~ जिले में इस साल अल्प वर्षा के चलते जलाशयों में पानी की स्थिति अच्छी नहीं रही है। रबी सीजन के अंतिम समय से ही कई जलाशय का जलस्तर शून्य हो गया था। तीसरी फसल के लिए जिले में जलाशयों का उपयोग हर साल न के बराबर ही होता है।
केडी ओझा, कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन विभाग