
कटनी. प्रदेश के ए ग्रेड की मंडियों में शुमार जिले की कृषि उपज मंडी पिछले छह माह से प्रभारियों के भरोसे चल रही है। कर्मचारियों समय पर टीए-डीए सहित अन्य भुगतान नहीं हो पा रहे हैं। किसानों की समस्याओं का भी अधिकारी के न रहने पर निराकरण मुश्किल से होता है।
कृषि उपज मंडी पहरुआ में प्रतिदिन सैकड़ों क्विंटल अनाज लेकर किसान आते हैं और अच्छा खासा राजस्व भी समिति को मिलता है। हर माह मंडी को दो करोड़ के लगभग राजस्व मिलता है। जुलाई माह में पदस्थ सचिव करुणेश तिवारी का बोर्ड ने सिहोर मंडी तबादला कर दिया है। उसके बाद से पहले प्रभारी सचिव के भरोसे कार्य संचालित रहा तो अब मंडी बोर्ड जबलपुर में पदस्थ पीयूष शर्मा को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। शर्मा सप्ताह में दो या तीन दिन कटनी आते हैं और बाकी समय जबलपुर कार्यालय का कार्य देखते हैं। ऐसी ही स्थिति लेखापाल को लेकर बनी हुई है। करुणेश तिवारी के साथ ही पदस्थ रहे लेखापाल गणेश कोष्ठा का भी जबलपुर मंडी स्थानांतरण किया गया है। उसके बाद से जबलपुर से ही सहायक लेखापाल अनंत केवट को प्रभार दिया गया है और वे भी सप्ताह में दो से तीन दिन ही सेवाएं मंडी को दे पा रहे हैं।
नहीं हो पा रहा है समय पर भुगतान
स्थाई सचिव व लेखापाल की तैनाती न होने से कर्मचारियों के भुगतान लंबित पड़े हैं। मंडी में लगभग ७० अधिकारी, कर्मचारी पदस्थ हैं और उनकी छुट्टी के आवेदनों की स्वीकृति, टीए, डीए का भुगतान सहित अन्य कार्य रुके पड़े हैं। इस माह भी सहायक लेखापाल अभी अवकाश पर हैं और उसके चलते समय पर वेतन निकलने में भी परेशानी है।
विशेष-
- छह माह से नहीं मंडी स्थाई सचिव व लेखापाल की नियुक्ति
- हर माह दो करोड़ के लगभग मिलता है राजस्व
- छुट्टी, टीए-डीए सहित अन्य कार्य भी प्रभावित
- किसानों, व्यापारियों की समस्याओं का भी नहीं हो पा रहा त्वरित निराकरण
- जबलपुर के साथ दिया गया कटनी का भी दोनों अधिकारियों को प्रभार
इनका कहना है...
मंडी में स्थाई रूप से सचिव व लेखापाल न होने कार्य प्रभावित हो रहे हैं। हर करोड़ों का राजस्व देने वाली मंडी है। १५ दिन पूर्व ही समिति की बैठक में प्रस्ताव रखकर उसे वरिष्ठ कार्यालय को भेजा गया है और प्रभारी की जगह स्थाई रूप से सचिव व लेखापाल की नियुक्ति करने को कहा गया है।
संतोष राय, अध्यक्ष कृषि उपज मंडी कटनी