
Katni-Pendra Road fourth line: रेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और लॉजिस्टिक्स क्षमता में सुधार के मकसद से केंद्र ने मेगा प्लान को मंजूरी दी है। व्यस्त रेल मार्गों पर बढ़ते यात्री-माल यातायात के दबाव को कम करने रेलवे ने पटरियों की क्षमता बढ़ाने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने रेल मंत्रालय की 10,783 करोड़ की लागत वाली तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इसमें 201 किमी वाली कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइनभी शामिल है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnav) ने बताया कि परियोजनाएं प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत बनाई गई हैं।
मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ के खनिज क्षेत्र को जोड़ने वाला अहम रूट है। मौजूदा क्षमता उपयोग 95% है। परियोजना नहीं होने पर 107% तक पहुंच सकता है है। एसईसीएल की कोयला खदानों से उत्तरी, पश्चिमी राज्यों के पावर प्लांट तक कोयला पहुंचाने में अहम भूमिका होगी।
कटनी की पटरियों पर आने वाले वर्षों में कोयले की मालगाड़ियों का दबाव तेजी से बढ़ने वाला है। अनूपपुर-न्यू कटनी रेलखंड पर 2030 तक रोजाना करीब 119 कोयला रेक चलने का अनुमान है, जबकि 2022 में यह आंकड़ा 33.87 रैक प्रतिदिन था। यानी महज कुछ वर्षों में कोयला परिवहन तीन गुना से ज्यादा बढ़ने की संभावना है। नई लाइन कटनी के रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के साथ मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों के संचालन को भी राहत देगी।
33.87 से 119.22 रैंक तक पहुंचने का अनुमान-कोयला मंत्रालय के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अनूपपुर-न्यू कटनी सेक्शन पर 2022 में औसतन 33.87 कोयला रैक प्रतिदिन का यातायात था। भविष्य के आकलन में 2030 तक यह आंकड़ा 119.22 रेक प्रतिदिन तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। इसका मतलब है कि इस रेलखंड पर कोयले की ढुलाई का दबाव बेहद तेजी से बढ़ सकता है। ऐसे में यदि मौजूदा ट्रैक क्षमता पर ही निर्भरता बनी रहती, तो मालगाड़ियों के साथ यात्री ट्रेनों के संचालन पर भी दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। चौथी लाइन इस चुनौती से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
कटनी-पेंडा रोड रेलखंड पर चौथी लाइन बनने का फायदा सिर्फ मालगाड़ियों को नहीं, यात्रियों को भी मिलेगा। इस रूट पर कोयला मालगाड़ियों का दबाव लगातार बढ़ने की संभावना है। अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होने से मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों के संचालन के लिए ज्यादा क्षमता मिलेगी। इससे ट्रेनों को एक-दूसरे के लिए रास्ता देने में होने वाली देरी और अनावश्यक ठहराव कम हो सकते हैं। कटनी से बिलासपुर, अनूपपुर, शहडोल और छत्तीसगढ़ की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए इसका सीधा फायदा बेहतर परिचालन के रूप में मिल सकता है। ट्रैक क्षमता बढ़ने से समयपालन में सुधार, अतिरिक्त यात्री ट्रेनें चलाने और मौजूदा ट्रेनों के फेरे बढ़ाने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। यानी चौथी लाइन बढ़ते माल यातायात के साथ यात्री सुविधाओं के विस्तार का रास्ता भी खोलेगी।
कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन बनने के बाद इस मार्ग पर ट्रेनों के संचालन के लिए अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होगा। इसका सबसे बड़ा फायदा मालगाड़ियों को होगा, क्योंकि कोयले की बढ़ती खेप को अधिक क्षमता के साथ निकाला जा सकेगा। वहीं यात्री ट्रेनों को भी इसका अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। मालगाड़ियों को रास्ता देने के लिए यात्री ट्रेनों को रोकने या उनके संचालन में समय का समायोजन करने की जरूरत कम हो सकती है। ट्रेनों का परिचालन अधिक सुधारू और भविष्य में यात्री ट्रेनें बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत होगी।
कटनी के लिए इस परियोजना की अहमियत इसलिए और बढ़ जाती है, क्योंकि पेंड्रा रोड-अनूपपुर-कटनी रेल नेटवर्क छत्तीसगढ़ के कोयला क्षेत्रों को देश के दूसरे हिस्सों से जोड़ता है। एसईसीएल की खदानों से निकलने वाला कोयला इसी रेल नेटवर्क के जरिए मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और पंजाब सहित कई राज्यों के बिजलीघरों और औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंचाया जाता है। जैसे-जैसे बिजली की मांग और औद्योगिक गतिविधियां बढ़ रही हैं, वैसे-वैसे कोयले की ढुलाई की जरूरत भी बढ़ रही है। इसका सीधा असर कटनी से गुजरने वाले रेल यातायात पर पड़ना तय है। यही वजह है कि रेलवे ने भविष्य की जरूरत को देखते हुए मौजूदा नेटवर्क में अतिरिक्त ट्रैक की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया है।
कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन बनने के बाद इस मार्ग पर ट्रेनों के संचालन के लिए अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होगा। इसका सबसे बड़ा फायदा मालगाड़ियों को होगा, क्योंकि कोयले की बढ़ती खेप को अधिक क्षमता के साथ निकाला जा सकेगा। वहीं यात्री ट्रेनों को भी इसका अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। मालगाड़ियों को रास्ता देने के लिए यात्री ट्रेनों को रोकने या उनके संचालन में समय का समायोजन करने की जरूरत कम हो सकती है। ट्रेनों का परिचालन अधिक सुधारू और भविष्य में यात्री ट्रेनें बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत होगी।
केंद्र सरकार ने कुल 10,783 करोड़ रुपए की लागत से तीन मल्टीट्रैकिंग रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं के तहत करीब 656 किलोमीटर रेल नेटवर्क में अतिरिक्त ट्रैक क्षमता विकसित की जाएगी। सरकार के अनुसार इससे लगभग 27 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता तैयार होगी। इन रेल मार्गों पर कोयले के अलावा सीमेंट, लोहा, इस्पात और अन्य औद्योगिक माल की भी आवाजाही होती है। इसलिए परियोजना पूरी होने के बाद इसका फायदा केवल कोयला परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा।