
कटनी. जिला अस्पताल में शनिवार को परिवार नियोजन योजना के तहत नसबंदी कैंप का आयोजन किया गया। इस शिविर में 48 हितग्राहियों के ऑपरेशन अव्यवस्थाओं के बीच हुए। सुबह से कोहरा, शीतलहर होने के कारण दिनभर गलाव वाली ठंडी रही। खराब मौसम के बीच आयोजित इस कैंप में स्वास्थ्य विभाग की मानवीय संवेदनाएं तार-तार होती दिखीं। लाखों रुपए का बजट होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग शिविर के लिए आवश्यक इंतजाम नहीं कर रहा है, लाचार व्यवस्था के बीच महिलाएं ऑपरेशन कराने को विवश हैं। पत्रिका ने शनिवार को ऑपरेशन कैंप में की जाने वाली व्यवस्थाओं की नब्ज टटोली तो हकीकत रोंगटे खड़े करने वाली रही। शिविर में व्यवस्था को लेकर सिविल सर्जन, सीएमएचओ गंभीर नहीं दिखे।
कैंप में ऑपरेशन कराने पहुंची महिलाओं की जांच की औपचारिकता पूरी करने के बाद बेहोशी का इंजेक्शन लगा दिया गया। इंजेक्शन लगाने के बाद उनको एक स्थान पर झुंड बनाकर बैठा दिया गया। जैसे-जैसे महिलाएं अचेत हो रहीं थीं, वैसे-वैसे एक-दूसरे के ऊपर बेहोश होकर गिर रहीं थीं। ठंडे फर्श पर बैठकर दो घंटे से भी अधिक समय तक महिलाएं ऑपरेशन का इंतजार करती रहीं। इस नजारे को देखकर कर्मचारी चटकारे लेते रहे, लेकिन ने भी गद्दा, दरी आदि की व्यवस्था नहीं की।
ठंड से ठिठुरती रहीं महिलाएं
ऑपरेशन के बाद एक गद्दे में दो-दो महिलाओं को लिटा गया। मनमानी यहां तक हावी नहीं रही। भयंकर ठंड होने के बाद भी महिलाओं के गद्दों में चादर बिछवाना तक जिम्मेदारों ने मुनासिब नहीं समझा। हद तो तब हो गई कि जब महिलाएं ठंड से कांप रहीं थीं और उन्हें कंबल तक नहीं दिया गया। परिजन साल, गमछा आदि के सहारे उनकी ठंड मिटाने में जुटे रहे। ऑपरेशन के कुछ देर बाद घर लेजाना ही मुनासिब समझा।
हुए इतने ऑपरेशन
ब्लॉक ऑपरेशन
कन्हवारा 35
रीठी 08
बड़वारा 01
शहरी 04
मात्र एक बेड, उसमें भी बेडशीट नहीं
फोटो-22
जिला अस्पताल के जिस वार्ड में नसबंदी ऑपरेशन के लिए कैंप लगाया गया था वहां पर महिलाओं के लिए मात्र एक बेड की व्यवस्था थी। इस बेड में भी चादर नहीं बिछाया गया। रेग्जीन के ठंडे गद्दे में ही महिला को लिटाया गया। गलाव वाली ठंड होने के बाद भी अधिकारी-कर्मचारियों को करेजा नहीं पसीजा, अव्यवस्था के बीच ही ऑपरेशन का सिलसिला जारी रहा।
घर जाने झेलनी पड़ी बेबसी
ऑपरेशन के बाद घर जाने के लिए महिलाओं को बड़ी बेबसी का सामना करना पड़ा। वार्ड से बाहर तक लाने के लिए कई महिलाओं के साथ कोई भी कर्मचारी सहायोग करता नहीं दिखा। परिजन व आशा-ऊषा उन्हें सहारा देकर बाहर तक लेकर आईं, फिर ऑटो, इ-रिक्शा, एंबुलेंस आदि में बैठाने को लेकर भारी जद्दोजहद करनी पड़ी। इस व्यवस्था में भी स्वास्थ्य विभाग की बड़ी बेपरवाही सामने आई।
ठंडे फर्श पर बैठकर दुधमुंहे बच्चों को संभाला
ऑपरेशन कराने के लिए महिलाएं ननंद, सांस, मां, पड़ोसन, पति, भाई आदि को साथ लेकर पहुंची थीं, ताकि उनकी व उनके बच्चों की देखभाल कर सकें। ठंडे फर्श में महिलाएं बैठकर दुधमुंहे बच्चों को संभालती रहीं। कोई बच्चे को ठंड से बचाती दिखी तो कोई महिला को। नसबंदी कैंप में मानवीय संवेदनाएं दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहीं थीं।
मर्यादा होती रही तार-तार
जिला अस्पताल के 150 बिस्तर वाली नई बिल्डिंग के मैदानी तल के वार्ड में शिविर लगाया गया था। एक ही कमरे में ओटी व महिलाओं को भर्ती करने की व्यवस्था की गई थी। लगभग दो घंटे में धड़ाधड़ सर्जन डॉ. आरबी सिंह ने 48 के ऑपरेशन किए। इस दौरान एक पतले सफेद कपड़े का पर्दा बनाकर उसी कमरे में ऑपरेशन किए गए, जहां पर पुरुषों की भी आवाजाही जारी रही व मर्यादा तार-तार होती रही। सवाल यह उठता है कि जिले के अधिकारी स्वास्थ विभाग के व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं, लेकिन नसबंदी कैंप में लापरवाही के हालात नहीं सुधर रहे।
वर्जन
शिविर के दौरान टीम को सभी आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए गए हैं। संख्या अधिक हो जाने के कारण ऐसी स्थिति बनी होगी। महिलाओं को चादर, कंबल, व्हीलचेयर, स्ट्रेचर आदि की सुविधा क्यों नहीं मिली इसका पता लगाया जाएगा। मामले की जांच कराएंगे। जांच में दोषियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. आरके अठया, सीएमएचओ।