पुलिस प्रशासन की एसआईटी ने निजी अस्पताल व मेडिकल में दी दबिश, मरीजों को दिए गए उपचार सहित दवाओं की कराई गई जांच..
कटनी. कटनी (katni) जिले में लगातार सामने आ रहीं रेमडेसिविर इंजेक्शन (remdesivir injection) की कालाबाजारी (black marketing) और इलाज के नाम पर मची लूट की खबरों के बीच एसआईटी (sit) की टीम एक्शन (action) में उतर आई है। बुधवार की दोपहर पुलिस प्रशासन की एसआईटी टीम द्वारा निजी अस्पताल (private hospital) व मेडिकल स्टोर्स (medical store) पर ताबड़तोड़ जांच की गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप मिश्रा, तहसीलदार संदीप श्रीवास्तव के नेतृत्व में कोतवाली टीआई विजय विश्वकर्मा, माधवनगर संजय दुबे, कुठला विपिन सिंह, एनकेजे महेंद्र मिश्रा सहित पुलिस बल की मौजूदगी में जांच की गई।
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एक्शन में एसआईटी
1. एसआईटी टीम सबसे पहले कचहरी चौक स्थित एमजीएम अस्पताल में पहुंची यहां पर सूचना मिली थी कि गुजरात का स्टाफ व गुजरात से कोरोना से संबंधित दवाएं आ रही हैं एवं रेमडेसीविर इंजेक्शन भी गुजरात से मंगाया गया है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने बताया कि एमजीएम अस्पताल में गुजरात से आए इंजेक्शन की जांच की गई है। ड्रग इंस्पेक्टर स्वप्निल सिंह द्वारा बैच नंबर आदि का मिलान कर वास्तविकता का पता लगाया जा रहा है। इसके साथ ही कोविड-19 के मरीजों को दिए गए उपचार व बिल संबंधी जानकारी के दस्तावेज लिए गए हैं और उनकी जांच की जा रही है।
2. इसके बाद एसआईटी टीम रामा मेडिकल पहुंची जहां पर रिकॉर्ड की जांच की गई है। यहां पर यह देखा गया कि कितने रेमडेसीविर इंजेक्शन मुहैया कराए गए हैं और कितने रिटेलर व अस्पतालों को दिए गए हैं।
3. आरपी मेडिकल में तय दाम से ज्यादा दामों पर इंजेक्शन बेचे जानी की सूचना मिलने टीम वहां पर भी पहुंची और जांच की। सूचना मिली थी कि 39 सौ रुपए में इंजेक्शन दिए जा रहे हैं। जबकि इनकी वास्तविक कीमत 1400 रुपये है तो इस पर बताया गया कि 14 सौ रुपए में यह कंपनी से होलसेलर के पास आता है। जीएसटी लगाकर के यह रिटेलर को 28 सौ रुपए में मुहैया कराया जाता है रिटेलर इसे फिर 3900 रुपए में ग्राहकों को मुहैया करा रहे हैं। हालांकि इस संबंध में भी प्रशासन जांच करा रहा है कि कीमत में इतना बड़ा अंतर कैसे आया।
4. एसआईटी की टीम इसके बाद आदर्श कॉलोनी स्थित धर्मलोक अस्पताल में पहुंची यहां पर भी मरीजों को दिए गए अब तक उपचार, लगाए गए इंजेक्शन, मरीजों से ली गई फीस के संबंध में दस्तावेज लेकर के जांच की गई। वहीं इस जांच के बाद से हड़कंप की स्थिति अस्पताल संचालकों व मेडिकल स्टोर्स संचालकों में बनी रही।
इसलिए जांच के लिए नहीं भेजे गए रेमडेसिविर इंजेक्शन
बता दें कि इस जांच के दौरान एक भी रेमडेसिविर इंजेक्शन को जांच के लिए नहीं भेजा गया, क्योंकि जांच के लिए 12 इंजेक्शन चाहिए होते हैं। ऐसे में यदि 12 इंजेक्शन सेम्पल के लिए चले जाएंगे तो फिर 2 मरीजों को इंजेक्शन कैसे मिलेंगे। इसलिए बैच नम्बर के माध्यम से ही मिलान करने की बात पुलिस प्रशासन कह रहा है। इस मामले में पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी का कहना है कि एसआईटी टीम द्वारा सभी निजी अस्पतालों व दवा कारोबारियों के लिए यहां जांच की गई है जांच रिपोर्ट के बाद गड़बड़ी पाए जाने पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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