CG News: कवर्धा जिले में पशु संगणना का कार्यक्रम प्रारंभ हो चुका है जो फरवरी 2025 तक चलेगा। जैसे जनगणना का कार्य प्रत्येक 10 वर्षों में किया जाता है ठीक वैसे ही पशु संगणना का कार्य हर 5 वर्षों में किया जाता है।
CG News: छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में पशु संगणना का कार्यक्रम प्रारंभ हो चुका है जो फरवरी 2025 तक चलेगा। जैसे जनगणना का कार्य प्रत्येक 10 वर्षों में किया जाता है ठीक वैसे ही पशु संगणना का कार्य हर 5 वर्षों में किया जाता है। 2024 में 21वीं संगणना की जा रही है।
CG News: कबीरधाम जिले के 983 आबाद ग्रामों और 102 शहरी वार्डों को मिलाकर लगभग 2 लाख 15 हजार 936 गृह-परिवारों में पशुओं और पक्षियों(कुक्कुट) का सर्वे कर गणना किया जा रहा है। इस वृहद् काम को सफ लतापूर्वक क्रियान्वित करने के लिए जिले के चारों ब्लॉक अंतर्गत 83 प्रगणक और 24 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है। समस्त प्रगणकों द्वारा प्रत्येक ग्राम और वार्ड के घर-घर पहुंचकर डिजीटल तकनीक से डाटा एकत्र किया जा रहा है। पशु संगणना के लिए घर पर आये प्रगणकों को सही और संपूर्ण जानकारी प्रदान करने के लिए जिला प्रशासन की ओर से समस्त ग्रामीण और शहरी पशुपालकों से अपील की है।
देश में 21 वीं पशुधन संगणना का काम शुरू हो गया है। जिले में भी 25 अक्टूबर से इसकी शुरूआत हो चुकी है। जिले में पर्यवेक्षक व 83 प्रगणकों की टीम बनाई गई है जो घर-घर जाकर पशुपालकों और उनके पास कौन-कौन से पालतू पशुधन हैं इसकी जानकारी जुटा रहे हैं। साथ ही मोहल्ले के घूमंतू मवेशी व पशुओं की भी गणना की जाएगी।
वर्ष 2019 में हुए 20वीं पशुगणना के अनुसार कबीरधाम जिले में कुल 4 लाख 80 हजार 596 पशु थे। इसमें मुय रुप से गौवंशीय सबसे अधिक थे। इसमें 1 लाख 18 हजार 994 नर और 2 लाख 38 हजार 694 मादा थी। वहीं 40 हजार 90 भैंसवंशीय, 77 हजार 181 बकरी-बकरा, 829 भेंड और 4808 सुकर की गणना हुई थी। इस वर्ष गौवंशीय घरों में कम मिलेंगे, क्योंकि इसका पालन बेहद कम हो चुका है। गौवंशीय पशु सड़कों पर ही धक्के खा रहे हैं।
संगणना में आवारा श्वानों और मवेशियों की भी गिनती करनी है जो बड़ा पेचिदा कार्य है। मुय सवाल यही है कि आखिर गांव, शहरों में घूमने वाले श्वानों और मवेशियों की टीम किस तरह गिनती कर पाएगी। हालांकि अफ सरों का कहना है कि ट्रेनिंग में इसके लिए विधि बताई गई है।
टीम किसी गांव में जाएगी तो आवारा मवेशी दिखेंगे, उनमें एक तरह का कलर लगाएंगे और गणना करेंगे। ऐसे में दूसरी बार वही श्वान आवारा घूमते मिलने पर पहचान हो जाएगी। इसी तरह घुमंतू मवेशियों के सींग पर कलर करेंगे। कलर पक्का नहीं होगी। इसलिए मवेशियों को कोई नुकसान नहीं होगा जो आसानी से धूल जाएगी। वहीं डेरावालों के पशु गणना के बाद उन्हें सर्टिफिकेट दिया जाएगा ताकि उनके मवेशियों की दोबारा गिनती न हो।
पशु संगणना देश में हर पांच साल में की जाती है। कृषि और पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुय आधार है इसलिए पशुओं के संबंध में सटीक और पूर्ण जानकारी के आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था में पशुपालन की भागीदारी का आकलन किया जा सकता है। इस बार कई नए पशु-पक्षियों की गणना भी हो रही है। इसमें पहली बार ऐमू पक्षी को भी शामिल किया गया है।
पशु संगणना के दौरान गौवंशीय, भैंस वंशीय, भेड़, बकरी, सूकर, ऊंट, घोड़ा, गधा, खच्चर, टट्टू, याक, कुत्ता, खरगोश, हाथी, मुर्गा-मुर्गी, बटेर, गिनी फाउल, बत्तख, टर्की, एमु, शुतुरमुर्ग और गीज जैसे पशु-पक्षियों की गणना की जाएगी। इसके अतिरिक्त गुजरात, राजस्थान व अन्य राज्यों से आये हुए घुमंतू चरवाहा समुदाय के पशुओं की भी गणना की जानी है। सिर्फ तोता और मैना को संगणना में शामिल नहीं किया गया है।
उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं कबीरधाम के डॉ.एसके मिश्रा ने कहा की पशुओं के सर्वे के लिए हमारे प्रगणक घर-घर जा रहे हैं। सभी प्रकार के पशु व पक्षियों का सर्वे किया जा रहा है। गांव, गली में जहां पर भी घुमंतू मवेशी है उनकी भी गणना की जाएगी। सर्र्वे कार्य फरवरी 2025 तक चलेगा।
इस गणना में पहली बार सर्वे ऑफ लाइन के अलावा ऑनलाइन मोड में भी हो रही है। प्रगणक मोबाइल एप में डाटा फ ीड कर रहे हैं। सर्वे में पहली बार आवारा मवेशियों और श्वानों की भी गणना की जाएगी। किस गांव में कितने गाय, बैल, भैस, बकरी, सूअर, आवारा मवेशी और श्वान है। इसका अलग-अलग रिकार्ड तैयार किया जाएगा।
इसके अलावा इस बार चरवाहा समूह भी अलग से तैयार किया जाएगा। इनमें उन पशुधन का रिकार्ड अलग से बनेगा जो जिले में बाहर से पशु-पक्षी लेकर आते हैं। इससे पहले तक इनकी गणना नहीं की जाती थी। इसके लिए सभी सुपरवाइजर और प्रगणकों को ट्रेनिंग दी गई थी।