दो सप्ताह से बच्चों को पौष्टिक दूध व आहार नहीं मिल पा रहा है। साथ ही गर्भवति महिलाओं को भी गर्म भोजन भी नहीं मिल पा रहा है।
कवर्धा. दो सप्ताह से बच्चों को पौष्टिक दूध व आहार नहीं मिल पा रहा है। साथ ही गर्भवति महिलाओं को भी गर्म भोजन भी नहीं मिल पा रहा है।जिले भर में 1046 आंगनबाड़ी केंद्र बंद है। यहां पढऩे वाले 26 हजार बच्चों को हर सोमवार को मिलने वाला पौष्टिक दूध नहीं मिल पा रहा है। इसके कारण उनके सेहत पर असर पड़ रहा है। क्योंकि इनमें कुपोषित बच्चों की संख्या में भी अधिक है।
दो सप्ताह से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं की हड़ताल में चले जाने से योजना ठप हो गई है। साथ ही केंद्र में बच्चों को रेडी टू ईट देने की भी योजना है। जहां रोजाना बच्चों को पोषण के लिए चना फल्लीदाना सहित लड्डू व रेडी टू ईट दिया जाता है । लेकिन दो सप्ताह से बच्चों को पोषण आहार भी नहीं मिल पा रहा है।
कलक्टर ने निर्देश दिए थे कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं के हड़ताल तक सुपरवाईजर चाबी लेकर केंद्र खोले और बच्चों को पोषण आहार का वितरण करे। साथ ही गर्भवति महिलाओं को भी गर्भ भोजन दें, लेकिन जिले की सुपरवाईजर आंगनबाड़ी केंद्र नहीं खोल सके। इसके लिए अधिकारी भी प्रयास नहीं कर सके।
सोमवार को आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चों को दूध पिलाया जाना है। लेकिन पिछले दो सप्ताह से 26 हजार बच्चों को दूध नहीं पिलाया गया है। शासन से मिले मिल्क परियोजना कार्यालय में पड़ा हुआ है। केवल 525 केंद्रों में सात हजार बच्चों को मिल्क का वितरण किया जा रहा है। उपयोग नहीं होने पर परियोजना में रखे मिल्क खराब हो जाएगा।
नहीं मिल रहा गर्म भोजन
शासन का मानना है कि गर्म व पौष्टिक भोजन देने से गर्भवति महिला व होने वाला बच्चा भी स्वस्थ रहेगा। इसके लिए शासन ने आंगनबाड़ी केंद्र में गर्भवति महिलाओं को भी आंगनबाड़ी केंद्र मेें गर्म भोजन देने की योजना बनाई। इसके लिए शासन द्वारा लाखों रुपए खर्च भी कर रही है, लेकिन पिछले 15 दिनों से जिले के करीब 5 हजार गर्भवति महिलाओं को गर्म भोजन नहीं मिल पा रहा है।
महिला एवं बाल विकास विभाग कबीरधाम के कार्यक्रम अधिकारी एलआर कच्छप ने बताया कि कार्यकर्ता व सहायिकाओं के हड़ताल पर चले जाने से दो सप्ताह से बच्चों को पोषण आहार नहीं मिल पाया है। मिल्क आया है पर वितरण नहीं हुआ। करीब 5 हजार गर्भवति महिलाओं को गर्म भोजन भी नहीं मिल पा रहा है।