Census Preparation 2026: भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप जिले में पहले चरण की कार्ययोजना के तहत 1 से 30 मई 2026 तक सभी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मकानों की गणना की जाएगी।
Census Preparation 2026: छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में देशव्यापी जनगणना 2027 के मद्देनजऱ कबीरधाम जिला में प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप जिले में पहले चरण की कार्ययोजना के तहत 1 से 30 मई 2026 तक सभी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मकानों की गणना की जाएगी। इस महत्त्वपूर्ण प्रक्रिया के सफल क्रियान्वयन के लिए जिला मुख्यालय में दो दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गई।
जिला कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित इस प्रशिक्षण में जनगणना कार्य से जुड़े राजस्व एवं नगरीय प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारियों को विधिवत मार्गदर्शन दिया गया। प्रशिक्षण के प्रथम दिवस कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी गोपाल वर्मा ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि जनगणना केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है।
उन्होंने निर्देश दिए कि सभी अधिकारी प्रशिक्षण को गंभीरता और सजगता से पूर्ण करें तथा विषय की व्यावहारिक समझ विकसित करें। उन्होंने प्रशिक्षकों से भी कहा कि सत्र को संवादात्मक बनाएं, प्रश्नोत्तर के माध्यम से शंकाओं का समाधान करें, ताकि मैदानी स्तर पर किसी प्रकार की त्रुटि न रहे।
जनगणना निदेशालय रायपुर से आए मास्टर ट्रेनर्स कविंद्र कुमार रंगारी व आशीष मिश्रा ने जनगणना की रूपरेखा, उद्देश्य और व्यापकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। प्रशिक्षण में भवनए मकान और परिवार की परिभाषाए प्रपत्रों की प्रविष्टिए आंकड़ों की शुद्धता और समयबद्ध क्रियान्वयन जैसे तकनीकी बिंदुओं को स्पष्ट किया गया।
अधिकारियों को यह भी बताया गया कि मकान गणना के दौरान प्रत्येक संरचना का पृथक-पृथक सत्यापन किया जाएगा, जिससे आगामी मुख्य जनगणना के लिए सटीक आधार तैयार हो सके।
प्रशिक्षण के दूसरे दिन अधिकारियों को डिजिटल उपकरणों और सॉफ्टवेयर के उपयोग का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया, ताकि मैदानी स्तर पर तकनीकी दक्षता सुनिश्चित हो सके। मकान गणना के बाद फरवरी 2027 में मुख्य जनगणना का कार्य संपन्न कराया जाएगा।
प्रशासन का लक्ष्य है कि जिले में यह राष्ट्रीय अभियान त्रुटिरहित और समयबद्ध तरीके से पूर्ण हो। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनगणना से प्राप्त आंकड़े शासन की नीतियों, योजनाओं और विकास कार्यक्रमों की दिशा तय करते हैं।