
पत्रिका की पहल पर 300 बच्चों ने धैर्य, विवेक और एकाग्रता के सूत्र को सीखा और समझा। गणेश उत्सव शुरू होने के एक दिन पूर्व रविवार को उत्कृष्ट विद्यालय का सभागार जय गणेश के जयकारों से गूंज उठा। बड़े मस्तक से बड़ा सोचने, छोटी आंखों से एकाग्रता, बड़े कानों से सुनने की कला और बड़े पेट से धैर्य व सहनशीलता का संदेश दिया गया।
गणेश उत्सव शुरू होने के एक दिन पूर्व रविवार को उत्कृष्ट विद्यालय का सभागार जय गणेश के जयकारों से गूंज उठा। अवसर था पत्रिका के द्वारा आयोजित ‘ गणेश जी की पाठशाला ’ का । यहां करीब 300 बच्चों ने विघ्नहर्ता गणेश के स्वरूप से जीवन प्रबंधन के मूल मंत्र सीखे। बड़े मस्तक से बड़ा सोचने, छोटी आंखों से एकाग्रता, बड़े कानों से सुनने की कला और बड़े पेट से धैर्य व सहनशीलता का संदेश दिया गया।
पाठशाला में जिला संस्कार भारती के जिला इकाई अध्यक्ष विजय सोनी, प्राचार्य भूपेंद्र सिंह चौहान और शिक्षक नितीशलाड़ ने गणेश जी के स्वरूप के माध्यम से बच्चों को बुद्धि, विवेक, संयम और समस्याओं का समाधान खोजने की सीख दी। उन्होंने बताया कि गणेश जी का प्रत्येक अंग जीवन में सफलता का एक संदेश देता है। कठिनाइयों से घबराने के बजाय उनका समाधान तलाशना ही विघ्नहर्ता के स्वरूप की सबसे बड़ी सीख है।
पाठशाला का सबसे आकर्षक हिस्सा मिट्टी से गणेश प्रतिमा निर्माण रहा। करीब 50 बच्चों ने मूर्तिकार धर्मेंद्र जौहरी के मार्गदर्शन में मिट्टी के गणेश बनाए। जौहरी ने लाइव प्रदर्शन करते हुए 15 से 20 मिनट में गणेश प्रतिमा बनाकर दिखाई। बच्चों ने भी समूह बनाकर प्रतिमाएं तैयार कीं। प्रतिमाएं बनते ही सभागार तालियों की गड़गड़ाहट और जय गणेश के जयकारों से गूंज उठा। बच्चों ने घर-घर मिट्टी के गणेश स्थापित कर पर्यावरण बचाने का संकल्प लिया।
साक्षी... सवाल : गणेश जी का बड़ा मस्तक क्या सिखाता है ?
जवाब : बड़ा सोचने और बुद्धि-विवेक से निर्णय लेने की प्रेरणा देता है।
वैभवी यादव ...सवाल : बड़े कान और छोटा मुख होने का क्या संदेश है?
जवाब : ज्यादा सुनो, कम बोलो और दूसरों के अनुभवों से सीखो।
लवान्या...सवाल : गणेश जी की छोटी आंखों का क्या अर्थ है ?
जवाब : लक्ष्य पर एकाग्र रहने और हर बात को बारीकी से समझने की सीख।
सवाल : बड़ा पेट हमें क्या सिखाता है ?
जवाब : कठिन परिस्थितियों में धैर्य, संयम और सहनशीलता बनाए रखना।
सवाल : छोटे मूषक को वाहन क्यों बनाया गया ?
जवाब : छोटे संसाधनों से भी बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
सवाल : गणेश जी को विघ्नहर्ता क्यों कहा जाता है ?
जवाब : क्योंकि उनका संदेश है कि कठिनाइयों से डरने के बजाय समाधान तलाशें।
बड़ा मस्तक : बड़ा सोचें, विवेक से निर्णय लें।
छोटी आंखें : एकाग्रता और सूक्ष्मता अपनाएं।
बड़े कान : ज्यादा सुनें, कम बोलें।
बड़ा पेट : धैर्य और सहनशीलता रखें।
एकदंत : कमियों को स्वीकार कर उन्हें सुधारें।
मूषक वाहन : छोटे साधनों से बड़े लक्ष्य पाएं।
मोदक : वाणी में मिठास रखें।
विचित्र स्वरूप : बाहरी रूप नहीं, गुणों को महत्व दें।
विघ्नहर्ता : चुनौतियों में अवसर खोजें।
माता-पिता का सम्मान : सेवा और संस्कार को जीवन में अपनाएं।
विजय सोनी, अध्यक्ष, जिला संस्कार भारती, जिला इकाई
भारतीय संस्कृति में भगवान गणेश सफलता और बुद्धि के प्रतीक हैं। पत्रिका की यह पहल सराहनीय है। गणेश जी ने माता-पिता को सर्वोच्च स्थान दिया। बच्चों को इस आदर्श को अपने संस्कार और जीवन में उतारना चाहिए।
भूपेंद्र सिंह चौहान, प्राचार्य, उत्कृष्ट विद्यालय
गणेश जी का प्रत्येक अंग जिंदगी में सफलता का संदेश देता है। उनकी बुद्धि, विवेक और ज्ञान से प्रेरणा लेकर विद्यार्थी शिक्षा और जीवन में आगे बढ़ सकते हैं। उनका आदर्श कठिनाइयों में धैर्य रखने और समाधान की राह खोजने की सीख देता है।
ये रहे मौजूद : पाठशाला में उत्कृष्ट विद्यालय के सैकड़ों विद्यार्थी शामिल हुए। संचालन शिक्षक नितीशलाड़ ने किया। इस अवसर पर शिक्षक वासुदेव पटेल, पूजा सोलंकी, सविता बर्डे सहित अन्य शिक्षक मौजूद रहे।