
- पिछले साल 200 ध्वज से 1.50 लाख का कारोबार, अब तक 80 ध्वज बिके
आजादी के महापर्व स्वतंत्रता दिवस को लेकर लोगों में उत्साह हैँ। बाजार में दुकानें राष्ट्रध्वज से सज गई है। राष्ट्रध्वज के स्टीकर, बैच और छोटे झंडे खरीदने लोग बच्चों के साथ दुकानों पर पहुंच रहे हैं। सड़क किनारे भी महिलाएं व युवक वाहनों पर लगाए जाने वाले राष्ट्रध्वज लेकर बेचने के लिए खड़े है। दूसरी तरफ पोस्ट ऑफीस के सामने खादी भंडार में राष्ट्रध्वज की मांग बढ़ गई है। एक अगस्त से ही यहां खरीदी शुरू हो गई है। बुधवार को भी खादी भंडार में सरकारी कार्यालय, पंचायत और स्कूलों से राष्ट्रध्वज खरीदने अधिकारी व कर्मचारी पहुंचते रहे।
गत वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर 1.50 लाख रुपए का कारोबार हुआ था। करीब 200 ध्वज बिके थे। इस बार भी इतनी ही तादाद में ध्वज बिकने का अनुमान लगाया जा रहा है।
250 रुपए का सबसे छोटा, 2400 रुपए का सबसे बड़ा
साइज - तिरंगा कीमत
1 बाय 1.5 फीट - 250 रुपए
2 बाय 3 फीट - 900 रुपए
3 बाय 4.5 फीट - 1700 रुपए
4 बाय 6 फीट - 2400 रुपए
ऐसे होता है तिरंगा का निर्माण
- राष्ट्रीय खादी आयोग से खादी संघ 368 रुपए किलो कॉटन खरीदता है।
- जिससे निर्धारित मापदंड के अनुसार धागा तैयार किया जाता है।
- इस धागे से हैंडलूम पर कपड़े की बुनाई की जाती है।
- बुनाई के बाद कपड़े के आकार और फिनिशिंग की बारीकी से टेस्टिंग की जाती है।
- सफेद कपड़े की हरे और केसरिया रंग से रंगाई की जाती है।
- सफेद कपड़े पर स्क्रीन प्रिंटिंग के अशोक चक्र की 24 तीलियां बनाई जाती हैं।
- उसके बाद तीन रंगों के कपड़ों को जोड़ने सिलाई की जाती है।
- सिलाई के बाद सघन जांच की जाती है कि सिलाई निर्धारित मापदंड के पूरी तरह अनुरूप है या नहीं।
- उसके बाद रस्सी डाली जाती है और प्रेस करके पैकिंग कर दी जाती है।
एक अगस्त से ही राष्ट्रीय ध्वज की मांग बढ़ जाती है। अब तक 80 से अधिक ध्वज बिक चुके हैं। जिसमें 2 गुणा 3 फीट के ध्वज अधिक संख्या में बिके हैं। 14 अगस्त तक 200 ध्वज बिक जाते हैं। पिछले साल 1.50 लाख रुपए का कारोबार हुआ था। - प्रमोद पाटिल, मध्य भारत खादी संघ।