जनजातीय कार्य विभाग खंडवा के सहायक संचालक एवं कवि नीरज पाराशर और कथाकार डॉ. रश्मि दीक्षित की पुस्तकों का लोकार्पण हुआ। नीरज पाराशर की कविता समग्र ‘ बोलते कुछ नहीं पापा ’ और डॉ. रश्मि दीक्षित का कथा संग्रह ‘ समानांतर जीवन के ’ का विमोचन किया गया।
जनजातीय कार्य विभाग खंडवा के सहायक संचालक एवं कवि नीरज पाराशर और कथाकार डॉ. रश्मि दीक्षित की पुस्तकों का लोकार्पण हुआ। नीरज पाराशर की कविता समग्र ‘ बोलते कुछ नहीं पिता’ और डॉ. रश्मि दीक्षित का कथा संग्रह ‘ समानांतर जीवन के ’ का विमोचन किया गया। पुस्तक का विमोचन वंदना राग ( कथाकार ) और पंकज राग (कवि) ने किया।
नई दिल्ली में आयोजित विश्व पुस्तक मेले में खंडवा के दो रचनाकारों की पुस्तकों का विमोचन हुआ है। इस अवसर पर कथाकार वंदना राग, हंस पत्रिका के कार्यकारी संपादक विवेक मिश्र, कवि पंकज राग, कवि उद्भ्रांत, जयप्रकाश मानस, शायर मुमताज, कवि राजेन्द्र उपाध्याय और प्रकाशन गृह के मुकेश ने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि साहित्य महानगरों से अधिक छोटे कस्बों में जीवंत रूप से रचा जा रहा है। कवि नीरज पाराशर ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह अवसर उनके लिए साहित्यिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है।
वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. प्रतापराव कदम ने कहा कि लेखक की पहली पुस्तक को पाठक सहजता से स्वीकार करते हैं, लेकिन दूसरी पुस्तक आते ही अपेक्षाएं बढ़ जाती हैं। भाषा, कथ्य और संदेश पर लेखक को परखा जाता है और सामाजिक कसौटी पर कसा जाता है। उन्होंने नीरज पाराशर की दूसरी पुस्तक के विमोचन को साहित्यिक परिपक्वता की दिशा में एक अहम कदम बताया।
कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारों ने इस बात पर सहमति जताई कि नई पीढ़ी के लेखक छोटे कस्बों से आकर साहित्य को नई ऊर्जा दे रहे हैं। इस विमोचन समारोह ने न केवल खंडवा के साहित्यकारों को राष्ट्रीय पहचान दिलाई, बल्कि यह भी साबित किया कि साहित्य की धड़कन कस्बों और शहरों के बीच समान रूप से जीवित है।
वंदना राग (कथाकार)
विवेक मिश्र (हंस के कार्यकारी संपादक)
पंकज राग (कवि)
उद्भ्रांत (कवि)
जयप्रकाश मानस (कवि)
मुमताज (शायर)
राजेन्द्र उपाध्याय (कवि)
मुकेश (प्रकाशन गृह)