
मेडिकल कॉलेज संबद्ध अस्पताल में आईएएस अधिकारी नोडल के रूप में मॉनीटरिंग कर रहे हैं। इसके बावजूद अस्पताल की व्यवस्था पटरी पर नहीं आ रही है। पत्रिका ने इस मंगलवार को स्कैन किया तो मेडिकल बोर्ड से मेडिसिन, नेत्र, ईएनटी, मनोरोग व सर्जरी विशेषज्ञों की कुर्सियां खाली, जूनियरों से हस्ताक्षर करा रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज सबद्ध जिला अस्पताल में मंगलवार को मेडिकल बोर्ड की व्यवस्था पूरी तरह अव्यवस्था की भेंट चढ़ी नजर आई। बारिश के बीच दूरदराज से पहुंचे दिव्यांगों को घंटों इंतजार और भटकना पड़ा। मेडिकल बोर्ड के लिए निर्धारित कक्ष-8 में मेडिसिन, सर्जरी, नेत्र, ईएनटी और मनोरोग विशेषज्ञों की कुर्सियां दोपहर डेढ़ बजे तक खाली रहीं। केवल हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. धर्मेंद्र पाटिल ही मरीजों की जांच करते मिले। बाकी विभागों के डॉक्टरों के पास सील और हस्ताक्षर कराने के लिए दिव्यांगों को इधर-उधर भटकना पड़ा।
दोपहर 12 बजे कक्ष-8 में डॉ. धर्मेंद्र पाटिल अकेले मरीजों की जांच कर रहे थे। अन्य विशेषज्ञों की अनुपस्थिति के कारण मरीज बाहर बैठकर उनका इंतजार करते रहे। आवेदन जमा करने के बाद भी जांच नहीं होने से दिव्यांगों को परेशानी उठानी पड़ी। दोपहर करीब एक बजे तक मेडिकल बोर्ड के लिए 15 आवेदन जमा हो चुके थे।
नया हरसूद से आए दिव्यांग गोविंद ओनकर पैर के असहनीय दर्द के कारण सहायता केंद्र के सामने फर्श पर बैठ गए। उन्होंने बताया कि 13 जुलाई को हरसूद शिविर में उन्हें मेडिकल बोर्ड के लिए जिला अस्पताल भेजा गया था। आवेदन जमा करने के बाद भी डॉक्टर नहीं मिले, जिससे लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। दिव्यांगों की सहायता के लिए कोई अलग कर्मचारी भी तैनात नहीं था।
श्री दादाजी वार्ड निवासी 80 प्रतिशत दिव्यांग अशोक भील मोटर ट्राइसाइकिल योजना के दस्तावेज दुरुस्त कराने पहुंचे थे। विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं मिलने पर कर्मचारियों ने पहले यूडीआईडी कार्ड में 80 प्रतिशत दिव्यांगता दर्ज कराने की सलाह दी। इसके बाद उन्हें बिना काम हुए लौटना पड़ा। ऐसे कई अन्य हितग्राही भी मायूस होकर वापस लौटे।
मेडिसिन : डॉ. रंजीत बड़ोले, डॉ. सागर मालवीय
सर्जरी : डॉ. एम. कलमे, डॉ. विरेंद्र
नेत्र : डॉ. दीपक तिवारी, डॉ. चांदनी करोले
ईएनटी : डॉ. अंकिता, डॉ. सुनील बाजोलिया
मनोरोग : डॉ. संजय इंगले
मेडिकल बोर्ड में अधिकांश विषय विशेषज्ञों की अनुपस्थिति और उनकी जगह जूनियर डॉक्टरों से दस्तावेजों पर सील व हस्ताक्षर कराए जाने से पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और वैधानिकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दिव्यांगों का कहना है कि जब विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद ही नहीं हैं तो मेडिकल बोर्ड की औपचारिकताएं कैसे पूरी की जा रही हैं।
इनका कहना : डॉ. ओपी जुगतावत, सीएमएचओ
दिव्यांगों की सुविधा के लिए मेडिकल बोर्ड की व्यवस्था कक्ष-8 में की गई है, जहां सभी विशेषज्ञ चिकित्सकों के बैठने की व्यवस्था है। यदि ऐसा नहीं हो रहा है तो इसकी जांच कराएंगे और इस संबंध में सिविल सर्जन से चर्चा करेंगे।