चालू शैक्षणिक सत्र में 1400 स्कूल भवनों का निरीक्षण किया गया। जिसमें 383 स्कूलों में मेंटेनेंस और रिपेयर की जरूरत है। हैरानी की बात तो यह कि इसमें अधिकतर स्कूल 20 साल के पहले ही बूढ़े हो गए। इंनीजियरों की रिपोर्ट पर डीइओ ने शासन को भेजा प्रस्ताव है और कलेक्टर ने लिखा स्कूल शिक्षा विभाग को पत्र लिखा है।
चालू शैक्षणिक सत्र में 1400 स्कूल भवनों का निरीक्षण किया गया। जिसमें 383 स्कूलों में मेंटेनेंस और रिपेयर की जरूरत है। हैरानी की बात तो यह कि इसमें अधिकतर स्कूल 20 साल के पहले ही बूढ़े हो गए। इंनीजियरों की रिपोर्ट पर डीइओ ने शासन को भेजा प्रस्ताव है और कलेक्टर ने लिखा स्कूल शिक्षा विभाग को पत्र लिखा है।
स्कूल शिक्षा विभाग में 10-20 साल में ही अधिकांश स्कूल भवन बूढे गए। इसका खुलासा सब इंजीनियरों की रिपोर्ट में हुआ है। चालू शैक्षणिक सत्र में 383 भवनों को मेंटेनेंस और मरम्मत के लिए शासन को प्रस्ताव को भेजा गया है। सब इंजीनियरों की रिपोर्ट में स्कूलों भवन, छत में मेंटेनेंस और मरम्मत के साथ ही 15 नए भवन बनाने के लिए करीब आठ करोड़ चाहिए। समय रहते स्कूलों का मेंटनेंस और मरम्मत नहीं कराया गया तो जुलाई में स्कूल भवनों की छत से पानी टपकेगा। इसको लेकर शिक्षक भयभीत हैं। गत दिनों जिला प्रशासन की समीक्षा के बाद शासन को पत्र भेजा गया है।
जिले में 1400 से अधिक स्कूल हैं। इसमें से 383 स्कूलों में मेंटेनेंस एवं मरम्मत के कार्य होने हैं। इसमें 10 से 20 साल के बीच के अधिकांश स्कूल शामिल हैं। इसमें अतिशीघ्र मरम्मत के लिए 188 स्कूल और 20 से अधिक स्कूल तत्काल मरम्मत योग्य हैं। इन स्कूलों के मेंटेनेंस और मरम्मत के लिए 6 करोड़ 20 लाख रुपए की जरूरत है। जबकि 1 करोड़ 79 लाख रुपए की लागत से 90 स्कूलों के मरम्मत का कार्य एक साल पहले से ही चल रहे हैं। कुल मिलाकर करीब आठ करोड़ की जरूरत पड़ेगी। इसमें प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर ट्राइबल के भी स्कूल शामिल हैं।
-शैक्षणिक सत्र 2025 में 90 स्कूलों में मेंटेनेंस और मरम्मत शुरू किया गया है। शासन ने 1 करोड़ 79 लाख रुपए में से अभी तक 85 फीसदी राशि जारी हुई। इसमें भी 60 कार्य ऐसे हैं जिनकी तीसरी किस्त आना बाकी है। अभी पुराने कार्य ही पूरे नहीं हुए। नए भवनों की लिस्ट सामने आ गई।
15 स्कूल भवन डिस्मेंटल हो गए। इनकी जगह नए भवन डिमांड भेजी गई है। इसकी लागत प्रति स्कूल भवन के हिसाब से 18 लाख 25 हजार है। कुल मिलाकर नए भवन निर्माण के लिए 2.73 करोड़ रुपए बजट की जरूरत है।
शिक्षा विभाग में 2006-07 तक प्राचार्यों के द्वारा स्कूल भवनों के निर्माण होते थे। गुणवत्ता सवालों के घेरे में है। यही कारण है कि 20 साल के भीतर है अधिकांश स्कूल बूढे हो गए हैं। जिसे रिपेयर किया जाना है। इसमें पीएस रोहाणी 2006-07 निर्माण हुआ था। मरम्मत योग्य है। हापला, एमएस कोलगांव, एमएस भैसवा आदि शामिल हैं।
सब इंजीनियर की रिपोर्ट मेंटेनेंस और मरम्मत के लिए स्कूलों का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। 10 साल से अधिक समय वाले स्कूलों को मेंटनेंस और इससे अधिक समय वाले कुछ भवन रिपेयर होंगे। मेंटनेंस के कार्य पूर्व में चल रहे हैं। इस वर्ष सर्वे में भी जो मेंटेनेंस या रिपेयर के लिए उनके भी प्रस्ताव भेजे गए हैं।