
शहर में 18 बड़े होटल और 15 से अधिक लॉज संचालित हो रहे हैं। इनमें से कई होटल ऐसे हैं, जहां नक्शे में दर्ज निर्माण और मौके पर बने निर्माण में अंतर है। शहरी क्षेत्र में जीआईएस सर्वे की रिपोर्ट भोपाल में अटकी है। होटल-लॉज का दस साल बाद भी दोबारा सर्वे नहीं किया गया। इससे नगर निगम के खजाने को हर साल लाखों रुपए की चपत लग रही है।
शहर में होटल और लॉज कारोबार में नगर निगम के संपत्तिकर की वसूली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर में 18 बड़े होटल और 15 से अधिक लॉज संचालित हो रहे हैं। इनमें से कई होटल ऐसे हैं, जहां नक्शे में दर्ज निर्माण और मौके पर बने निर्माण में अंतर है। होटल संचालकों ने नक्शे में जितने निर्माण की अनुमति ली, उससे अधिक निर्माण कर लिया है। कहीं पीछे तो कहीं साइड में अतिरिक्त निर्माण हुआ है। कई जगह हर साल छोटे-छोटे निर्माण कर होटल का स्वरूप बदला जा रहा है। इसका सीधा असर संपत्तिकर पर पड़ रहा है।
शहर में 18 बड़े होटल संचालित हो रहे हैं। प्रति होटल औसत 15-20 हजार रुपए हर साल टैक्स भरता है। निगम सूत्रों के अनुसार हर साल करीब 35 से 40 लाख रुपए संपत्तिकर होता है। नए जीआईएस सर्वे और निगम के नक्शे के आधार पर यह राशि 50 लाख रुपए से अधिक होनी चाहिए। यानी हर साल लाखों रुपए के टैक्स का अंतर सामने आ रहा है। होटल संचालकों द्वारा अतिरिक्त निर्माण की जानकारी समय पर नहीं देने से वास्तविक संपत्ति का आकलन नहीं हो पाता। इससे निगम के खजाने को हर साल 20 लाख रुपए से अधिक की चपत लगने का अनुमान है।
शहर में नई संपत्तियों का सर्वेक्षण कराया गया है। जिसमें होटल और अन्य व्यावसायिक संपत्तियों का वास्तविक आकलन करने के लिए नया जीआईएस सर्वे कराया गया था। इसकी रिपोर्ट अभी भोपाल में अटकी हुई है। करीब दस हजार नई संपत्तियां निगम को अर्जित हुई हैं। रिपोर्ट फाइनल होने के बाद कई संपत्तियों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। जिसमें होटल-लॉज भी शामिल हैं। दूसरी ओर पुराने सर्वे के बाद होटल और लॉज का दोबारा सर्वे नहीं कराया गया। इससे मौके पर बढ़े निर्माण का रिकॉर्ड अपडेट नहीं हो सका।
निगम ने पांच साल के भीतर 10 से अधिक होटल संचालकों को नक्शे के विपरीत निर्माण को लेकर नोटिस दिए। कई मामलों में कंपाउंडिंग कर प्रकरण का निराकरण कर दिया गया। लेकिन सवाल यह है कि कंपाउंडिंग के बाद संपत्तिकर का नए निर्माण और कलेक्टर गाइड लाइन के के आधार पर दोबारा निर्धारण नहीं हो सका है। है। सूरजकुंड वार्ड में एक होटल ने साइड और पीछे के हिस्से की कंपाउंडिंग कराई है। सामने का हिस्सा अभी भी सवालों के घेरे में है। आनंद नगर, स्टेशन रोड और इंदौर रोड सहित अन्य क्षेत्रों में भी ऐसे होटल बताए जा रहे हैं, जहां
रेलवे ब्रिज के पास एक होटल के पीछे अतिरिक्त निर्माण किए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि निगम कार्यालय में इसकी जानकारी दर्ज नहीं है। ऐसे मामलों में मौके का निरीक्षण नहीं होने से संपत्तिकर भी पुराने रिकॉर्ड के आधार पर ही चलता रहता है।
निगम के रिकॉर्ड के अनुसार होटल स्टेपिन पर एक लाख रुपए से अधिक संपत्तिकर बकाया है। निगम की ओर से बकाया राशि जमा करने की सूचना भी दी गई। इसके बावजूद राशि जमा नहीं हुई है। निगम को इस होटल के नक्शे और मौके पर हुए निर्माण में अंतर की जानकारी भी मिली है।
होटल और अन्य व्यावसायिक संपत्तियों में नक्शे और मौके पर हुए निर्माण में अंतर की जांच कराई जाएगी। जहां अतिरिक्त निर्माण मिलेगा, वहां नियमानुसार कार्रवाई और संपत्तिकर का पुनर्निर्धारण किया जाएगा। समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। नियम के तहत नोटिस देकर कंपाउंडिंग की कार्रवाई भी की जाती है।