
मध्य प्रदेश सरकार देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर 17 सितंबर से सेवा ही संकल्प अभियान के तहत आबादी में भू-खंडों की रजिस्ट्री पत्र नि:शुल्क देगी। अभियान के दौरान स्वामित्व योजना में भू-खंडों की नि: शुल्क रजिस्ट्री से भू-खंड मालिकों को 200 करोड़ से अधिक बचत होगी। 17 सितंबर से शुरू होने वाले विशेष अभियान में गांव-गांव शिविर लगाकर एक महीने तक रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।
जिले के 1.67 लाख से अधिक लोगों को जल्द ही आबादी में आवासीय भू-खंडों का कानूनी मालिकाना हक मिलेगा। यह आंकड़े प्रदेश स्तर पर 50 लाख से अधिक भू-खंडों का है। खास बात यह है कि इसके लिए उन्हें रजिस्ट्री पर एक भी रुपए खर्च नहीं करने होंगे। सरकार स्वयं रजिस्ट्री और स्टाम्प ड्यूटी का खर्च उठाएगी। जिससे जिले में भू-खंडधारियों को 20 करोड़ रुपए से अधिक का सीधा फायदा होगा। जबकि प्रदेशभर में 200 करोड़ रूपए से अधिक की बचत होगी।
शासन ने वर्ष 2022-23 में स्वामित्व योजना के तहत जिले के 611 गांवों में आबादी क्षेत्र का सर्वे कराया था। ड्रोन सर्वे के माध्यम से 2 लाख 22 हजार 198 स्वामित्व भू-खंडों का रिकॉर्ड तैयार किया गया। इनमें 1 लाख 67 हजार 528 निजी आवासीय भू-खंड चिन्हित किए गए हैं, जिन पर लोग मकान बनाकर रह रहे हैं। अब इन भू-खंडों की रजिस्ट्री कराई जाएगी। इससे भू-खंडधारियों को कानूनी रूप से मालिकाना हक मिलेगा। भविष्य में नामांतरण और वारिसानों की प्रक्रिया आसान होगी। बैंक से ऋण लेने में भी सुविधा मिलेगी। साथ ही अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ ले सकेंगे। हालांकि भूमि के क्रय-विक्रय को लेकर अभी स्थित स्पष्ट नहीं है।
रजिस्ट्री से पहले भू-खंडधारियों को समग्र और आधार से ई-केवायसी कराना अनिवार्य होगा। भू-लेख पोर्टल पर रिकॉर्ड में नाम और हिस्से का परिमार्जन भी जरूरी है। पटवारी स्तर पर भी भू-लेख पोर्टल पर ई-केवायसी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।भू-खंडधारी को एमपी ई-सेवा ऐप पर समग्र आईडी से लॉग इन कर अपने भू-खंड की डीड तैयार करनी होगी। इसके बाद वीडियो रिकॉर्डिंग कर सत्यापन के लिए संबंधित पटवारी को भेजा जाएगा। पटवारी सारा ऐप के माध्यम से डीड, चतुर्सीमा और अन्य जानकारी का सत्यापन करेगा।इसके बाद तहसीलदार और नायब तहसीलदार संपदा ऐप के माध्यम से अंतिम अनुमोदन करेंगे।
शासन ने इस अभियान के लिए अलग जिम्मेदारियां तय की हैं। पटवारी को निष्पादन अधिकारी बनाया गया है। तहसीलदार और नायब तहसीलदार रजिस्ट्री अधिकारी के रूप में काम करेंगे। प्रशासन ने अभियान की तैयारियां शुरू कर दी हैं और राजस्व अमले को जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।
फैक्ट फाइल :
तहसील निजी स्वामित्व भू-खंडों की संख्या
छैगांव माखन — 29,286
हरसूद — 8,972
खालवा — 25,786
खंडवा — 48,868
खंडवा नगर — 1,352
किल्लोद — 4,149
मूंदी — 10,221
पंधाना — 20,723
पुनासा — 18,171
कुल — 1,67,528 भू-खंड
ऐसे समझें 20 करोड़ से अधिक का फायदा
सामान्य स्थिति में आवासीय भू-खंड की रजिस्ट्री के दौरान छोटे से छोटे भू-खंड की रजिस्ट्री कराने पर स्टाम्प ड्यूटी और अन्य पंजीयन शुल्क में औसतन 10 से 12 हजार रुपए खर्च होते हैं। अधिकतम कलेक्टर गाइड लाइन पर तय होता है। आबादी में औसत खर्च यदि 12 हजार रुपए प्रति रजिस्ट्री की दरे से लिया जाए तो जिले में 1.67 लाख से अधिक भू-खंडों की रजिस्ट्री पर 20 करोड़ों रुपए खर्च आएगा। जबकि फाइनल खर्च की स्थिति रजिस्ट्री के बाद स्पष्ट होगा।
ये करना अनिवार्य
-समग्र पोर्टल पर समग्र ई-केवायसी।
-भू-लेख पोर्टल पर नाम और हिस्से का परिमार्जन।
-भू-लेख पोर्टल पर आवश्यक ई-केवायसी।
-सारा ऐप पर आधार आधारित प्रोफाइल अपडेट।
-एमपी ई-सेवा ऐप से डीड तैयार करना।
-पटवारी से सत्यापन और पंजीयन अधिकारी से अनुमोदन।
इनका कहना : क्षितिज शर्मा, अपर कलेक्टर, खंडवा
स्वामित्व के पट्टों की समग्र और आधार से ई-केवायसी का काम किया जा रहा है। रजिस्ट्री की शुरुआत 17 सितंबर से होगी। इसकी तैयारियां चल रही हैं। तहसीलदार, नायब तहसीलदार और पटवारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।