खंडवा

शिक्षक दिवस पर विशेष : सेवानिवृत्ति के बाद भी नहीं थमा ज्ञान का सफर, मुफ्त में बांट रहे शिक्षा का प्रसाद

पत्रिका शिक्षक दिवस के पूर्व शहर के ऐसे शिक्षकों की कहानी लेकर आया है जिनके ज्ञान का सफर सेवानिवृत्त के बाद भी नहीं थमा है। ऐसे शिक्षक जो सिर्फ नौकरी नहीं बल्कि पीढिय़ों को गढ़ने में लगे हैं। शिक्षकों का कहना है कि सेवा से सेवानिवृत्ति हो सकती है, लेकिन अंतिम सांस तक ज्ञान की ज्योति जलाते रहेंगे।
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Sep 03, 2026
happy teachers day special story of innovatin new idea
happy teachers day: पत्रिका (फोटो: सोशल मीडिया)

पत्रिका शिक्षक दिवस के पूर्व शहर के ऐसे शिक्षकों की कहानी लेकर आया है जिनके ज्ञान का सफर सेवानिवृत्त के बाद भी नहीं थमा है। ऐसे शिक्षक जो सिर्फ नौकरी नहीं बल्कि पीढिय़ों को गढ़ने में लगे हैं। शिक्षकों का कहना है कि सेवा से सेवानिवृत्ति हो सकती है, लेकिन अंतिम सांस तक ज्ञान की ज्योति जलाते रहेंगे।

बिना किसी पारिश्रमिक ज्ञान का प्रसाद बांट रहे

शिक्षक सिर्फ नौकरी नहीं करता है बल्कि वह पीढिय़ों का भविष्य गढ़ता है। सरकारी सेवा से सेवानिवृत्ति के साथ पद और जिम्मेदारियां बदल सकती हैं। लेकिन सच्चे शिक्षक का अपने विद्यार्थियों से रिश्ता कभी समाप्त नहीं होता। शिक्षक दिवस पर खंडवा के दो ऐसे शिक्षक प्रेरणा बनकर सामने आए हैं। डॉ शहजाद कुरैशी सेवानिवृत्ति के 7 साल बाद भी छात्रों का भविष्य निर्माण कर रहे हैं। दूसरे अजय मालवीय प्रतिदिन स्कूल, हॉस्टल पहुंचकर बच्चों को गणित पढ़ा रहे हैं। दोनों शिक्षक बिना किसी पारिश्रमिक के ज्ञान का प्रसाद बांट रहे हैं। अजय मालवीय ने वर्ष 1977-78 में उत्कृष्ट विद्यालय से पढ़ाई पूरी की थी। वर्ष 1998 में वे इसी स्कूल में गणित शिक्षक बने। आज सेवानिवृत्ति के बाद भी उसी स्कूल में पहुंचकर शिक्षा की अलख जला रहे हैं

विद्यार्थियों के लिए आज भी ‘ गुरु ’ हैं डॉ. शहजाद कुरैशी

हिन्दी के विद्वान प्राध्यापक एवं पूर्व प्राचार्य डॉ. शहजाद कुरैशी का विद्यार्थियों से रिश्ता सेवानिवृत्ति के बाद भी कायम है। उन्होंने नवंबर 1982 में शैक्षणिक सेवा शुरू की थी। अगस्त 2019 में वे शासकीय महाविद्यालय धुलकोट के प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त हुए। लेकिन सेवा से अलग होने के बाद भी उन्होंने शिक्षा और विद्यार्थियों से दूरी नहीं बनाई। आज भी विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं, उच्च शिक्षा और करियर से जुड़े विषयों पर उनसे मार्गदर्शन लेने पहुंचते हैं। कई विद्यार्थियों की फीस, अध्ययन सामग्री और अन्य आवश्यकताओं में वे व्यक्तिगत सहयोग भी करते हैं। शोध के क्षेत्र में भी उनका योगदान रहा है। डॉ. कुरैशी मानते हैं कि शिक्षक का दायित्व सेवानिवृत्ति के साथ समाप्त नहीं होता। विद्यार्थी को जरूरत के समय मार्गदर्शन और सहयोग देना ही सच्चे शिक्षक की पहचान है।

रिटायरमेंट के बाद हॉस्टल, स्कूल पहुंच बच्चों को पढ़ा रहे

मालवीय शहर के माधव नगर निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक अजय मालवीय मार्च 2025 में सेवानिवृत्त होने के बाद भी वे अपने उत्कृष्ट स्कूल से जुड़े हुए हैं। गणित विषय की कठिन समस्याओं को आसान तरीके से समझाते हैं। बच्चों की शंकाएं दूर करते हैं। जरूरतमंद बच्चों की फीस जमा कराने और किताबें उपलब्ध कराने में भी सहयोग करते हैं। अजय मालवीय ने वर्ष 1977-78 में उत्कृष्ट विद्यालय से पढ़ाई पूरी की थी। वर्ष 1998 में वे इसी स्कूल में गणित शिक्षक बने। आज सेवानिवृत्ति के बाद भी उसी स्कूल में पहुंचकर शिक्षा की अलख जला रहे हैं।

शिक्षकों का संदेश

दोनों शिक्षकों का मानना है कि ज्ञान बांटने के लिए कोई उम्र या सेवा अवधि तय नहीं होती। शिक्षक का असली सम्मान तभी है, जब उसके विद्यार्थी आगे बढ़ें। उनका कहना है कि अंतिम सांस तक जरूरतमंद विद्यार्थियों के बीच ज्ञान की ज्योति जलाते रहेंगे। शिक्षकों का कहना है कि सेवा से सेवानिवृत्ति हो सकती है, लेकिन अंतिम सांस तक ज्ञान की अलख जगाते रहेंगे।

Updated on:
03 Sept 2026 11:51 am
Published on:
03 Sept 2026 11:51 am