
Khandwa Municipal Corporation Office
नगर निगम खंडवा में 2017 से 2023 के बीच कलेक्टर दर पर तत्कालीन आयुक्तों ने दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की बंपर नियुक्तियां की है। इसमें चार प्रकार ( उच्च कुशल, अर्द्धकुशल, कुशल, अकुशल ) कर्मचारियों की नियुक्तियां की गई हैं। जिसमें पांच तत्कालीन आयुक्तों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। ईओडब्ल्यू की प्रारंभिक जांच में मामला सामने आया है।
नगर निगम कार्यालय में कलेक्टर दर पर रखे गए 468 कर्मचारियों की नौकरी पर अब अपात्रता का संकट मंडराने लगा है। मामला वर्ष 2017 से 2023 के बीच कलेक्टर दर पर रखे गए दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की नियुक्तियों का है। इसमें चार प्रकार ( उच्च कुशल, अर्द्धकुशल, कुशल, अकुशल ) कर्मचारियों की नियुक्तियां की गई हैं। ईओडब्ल्यू की प्रारंभिक जांच में दैनिक कर्मचारियों की पात्रता सवालों के घेरे में आ गई है। नियुक्तियों के दौरान नियमों का पालन नहीं किए जाने का मामला सामने आया है। मामले की शिकायत ईओडब्ल्यू भोपाल से की गई है। करीब तीन साल बाद एक बार फिर मामले की फाइल खुली है। निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों में खलबली मची हुई है। मामले में लोकायुक्त ने प्रकरण दर्ज कर निगम आयुक्त और शिकायतकर्ता आयूब लाला का भी बयान दर्ज कर लिया गया है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार ईओडब्ल्यू की प्रारंभिक जांच में वर्ष 2017 से 2023 के बीच पदस्थ रहे तत्कालीन नगर निगम आयुक्तों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। इस अवधि में जेजे जोशी, हिमांशु सिंह, हिमांशु भट्ट, सविता प्रधान और निलेश दूबे नगर निगम आयुक्त के रूप में पदस्थ रहे। जांच एजेंसी नियुक्तियों से संबंधित दस्तावेजों और प्रक्रिया की पड़ताल कर रही है। मामले में संबंधितों पर आरोप पत्र जारी होना तय है।
निगम में वर्ष 2017 से 2023 के बीच बड़ी संख्या में कर्मचारियों को कलेक्टर दर पर दैनिक वेतनभोगी के रूप में रखा गया। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इनमें सबसे अधिक 264 कर्मचारियों की नियुक्तियां तत्कालीन महापौर सुभाष कोठारी के कार्यकाल में हुई थीं। शेष नियुक्तियां अन्य अवधि में की गईं। जांच में तत्कालीन प्रशासनिक व्यवस्था और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
प्रारंभिक जांच में यह भी शिकायत सामने आई है कि उस समय नेताओं, पार्षदों और निगम कर्मचारियों के सगे-संबंधियों को नियुक्तियां दी गईं। इनमें से कुछ कर्मचारी वर्तमान में भी प्रभावशाली लोगों और अधिकारियों के आवासों पर सेवाएं दे रहे हैं। हालांकि इन बिंदुओं की जांच ईओडब्ल्यू द्वारा की जा रही है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
शासन और नगरीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों के बावजूद वर्तमान में भी कलेक्टर दर पर नए कर्मचारियों को रखने के लिए सिफारिशें किए जाने की चर्चा है। सूत्रों के अनुसार कुछ जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों के सगे-संबंधियों के नामों को लेकर निगम कार्यालय में सिफारिशें पहुंच रही हैं। अब ईओडब्ल्यू की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नियुक्तियों में किन स्तरों पर नियमों का उल्लंघन हुआ और किन कर्मचारियों की पात्रता प्रभावित हो सकती है। जांच ईओडब्ल्यू भोपाल के स्तर की जा रही है।
मामले की जांच के दौरान जो दस्तावेज मांगे गए थे, वे नगर निगम द्वारा ईओडब्ल्यू को उपलब्ध करा दिए गए हैं। शासन के दिशा-निर्देश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-468 कर्मचारियों को कलेक्टर दर पर रखा गया।
-नियुक्तियां वर्ष 2017 से 2023 के बीच हुईं।
-पांच तत्कालीन आयुक्तों की भूमिका संदिग्ध।
-एक कार्यकाल में 264 कर्मचारियों की नियुक्ति का दावा।
-ईओडब्ल्यू भोपाल के स्तर पर जांच जारी।
Updated on:
02 Sept 2026 12:18 pm
Published on:
02 Sept 2026 12:17 pm
