पत्रिका टॉक-शो में छात्र संगठनों के पदाधिकारी बोले, छात्र संघ चुनाव लीडरशिप की पाठशाला, छात्र संगठन के पदाधिकारियों से चर्चा की तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ( अभाविप ) और नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया ( एनएसयूआई ) के पदाधिकारियों ने मुखर होकर बोले छात्र संघ का चुनाव होना चाहिए। इस लिए कि छात्रहित जैसी मौलिक समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
प्रदेशभर के शासकीय कॉलेजों में एक दशक से छात्र संघ का चुनाव नहीं हुआ। पत्रिका टॉक-शो में छात्र संगठनों के पदाधिकारी बोले, छात्र संघ चुनाव लीडरशिप की पाठशाला, छात्र संगठन के पदाधिकारियों से चर्चा की तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ( अभाविप ) और नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया ( एनएसयूआई ) के पदाधिकारियों ने मुखर होकर बोले छात्र संघ का चुनाव होना चाहिए। इस लिए कि छात्रहित जैसी मौलिक समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। अध्ययन करने वाले छात्र भी चुनाव होने का इंतजार कर रहे हैं। छात्र संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि मोहन सरकार से उम्मीद थी कि कॉलेजों में चुनाव होंगे। क्यों कि शिवराज सरकार में मोहन यादव बतौर उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुए कॉलेजों में चुनाव कराने के लिए सिफारिश की थी।
प्रदेशभर के शासकीय कॉलेजों में एक दशक से छात्र संघ का चुनाव नहीं हुआ। इससे लोकतांत्रिक राजनीति में युवा पीढ़ी की हिस्सेदारी के साथ ही युवाओं में लीडरशिप की क्षमता कमजोर हो रही है। कॉलेजों में प्रत्यक्ष प्रणाली से 15 और अप्रत्यक्ष प्रणाली से 8 साल से छात्र संघ के चुनाव नहीं हुए।
कॉलेजों में प्रत्यक्ष प्रणाली से वर्ष 2010 में और अप्रत्यक्ष रूप से अंतिम चुनाव वर्ष 2017 में हुआ था। इसके बाद से चुनाव नहीं हो रहे हैं। पत्रिका ने छात्र संगठन के पदाधिकारियों से चर्चा की तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ( अभाविप ) और नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया ( एनएसयूआई ) के पदाधिकारियों ने मुखर होकर बोले छात्र संघ का चुनाव होना चाहिए।
इस लिए कि छात्रहित जैसी मौलिक समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। अध्ययन करने वाले छात्र भी चुनाव होने का इंतजार कर रहे हैं। छात्र संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि मोहन सरकार से उम्मीद थी कि कॉलेजों में चुनाव होंगे। क्यों कि शिवराज सरकार में मोहन यादव बतौर उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुए कॉलेजों में चुनाव कराने के लिए सिफारिश की थी।
प्रदेश में भाजपा का शीर्ष नेतृत्व छात्र राजनीति की सीढ़ी चढ़ते हुए यहां तक पहुंचा है। फिर भी छात्रसंघ चुनाव में इनकी अरुचि होना समझ से परे है। वर्तमान परिदृश्य में छात्रों में नेतृत्व क्षमता के लिए चुनाव अतिआवश्यक है। एनएसयूआई सरकार से प्रत्यक्ष प्रणाली से छात्रसंघ चुनाव कराए जाने अपनी मांग पर कायम है।
लोकतंत्र की सफलता के लिए जैसे शिक्षा जरूरी है। उसी तरह लोकतांत्रिक राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए छात्र राजनीति आवश्यक है। वर्ष 2024 में एनसयूआई ने छात्र संघ के चुनाव कराए जाने का मुद्दा उठाया था। परंतु सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। इससे न तो छात्रों की समस्याओं का समाधान हो रहा है और न ही क्षेत्रीय समस्याएं सरकार तक पहुंच रही हैं।
छात्रसंघ चुनाव प्रत्येक वर्ष होना चाहिए। छात्रसंघ चुनाव से ही कुशल नेतृत्व निकल कर आता है। आज देश में कई बड़े-बड़े नेतृत्वकर्ता छात्रसंघ चुनाव से ही निकल कर ही देश का नेतृत्व कर रहे हैं। प्रदेश सरकार से मांग करता हूं कि छात्रसंघ चुनाव जल्द से जल्द करवाए जाएं। जिससे देश को अच्छा और कुशल नेतृत्व मिल सके।
छात्रसंघ चुनाव इस दृष्टि से भी प्रासंगिक है कि छात्रहित जैसी मौलिक समस्याओं को सरकार तथा प्रशासन तक पहुंचाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निर्धारित करता है। छात्र संघ का चुनाव नेतृत्व क्षमता बढ़ाने की पाठशाला है। युवाओं को देश की राजनीति में आने का बेहतर मंच है। लंबे समय से चुनाव नहीं होने के कारण क्षमता कमजोर हो रही है।
छात्र संघ चुनाव से युवाओं में एक नई चेतना बनती है। नेतृत्व क्षमता बढ़ने के साथ ही समाज और देश को एक युवा नेता मिलता है। इस चुनाव मजबूत लोकतंत्र की राजनीति में भी युवाओं की भागीदारी बढ़ने से विकास को गति मिलती है।
...छात्र संघ चुनाव होना बहुत जरूरी है। इससे कॉलेज और स्थानीय स्तर पर युवा एक अच्छी लीडरशिप तैयार करेगा ।छात्र अपनी यूनिवर्सिटी और कॉलेज में हर समस्या को हल करने का प्रयास करेगा। छात्र संघ का चुनाव नहीं होने से लीडरशिप में कमी आ रही है।