
खरगोन. मानसून की दस्तक देने के साथ ही बारिश का दौर शुरू हो गया। जर्जर मकानों के भरभराकर गिरने की जानलेवा घटनाएं लगातार सामने आ रही है। शहर में भी इस तरह के 50 से ज्यादा मकान है, जो खतरनाक साबित हो रहे हैं। तेज हवा-आंधी व बारिश में यह कभी भी जमींदोज हो सकते हैं। इससे अनहोनी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद कार्रवाई के नाम पर कागजी खानापूर्ति की जा रही है। नपा अमला नोटिस भेजकर कर्तव्य की इतिश्री करने में लगा है। बीते तीन सालों में एक भी खंडहर मकान को नहीं तोड़ा गया। जिम्मेदारों की यही लापरवाही आम लोगों की जान पर भारी पड़ सकती है।
मालूम हो कि शहर में शासकीय सहित करीब एक दर्जन ऐसे मकान है, जो पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। इनके बारिश में धाराशायी होने से जानलेवा घटनाएं हो सकती है। कुछ मकान तो रहवासी क्षेत्र में होने से पूरे समय हादसों का डर बना रहता है। नपा ने ऐसे खतरनाक मकानों को चिन्हित भी किया है लेकिन इन्हें गिराने की हिम्मत अधिकारी नहीं उठा पा रहे हैं।
नोटिस भेजकर भूले कार्रवाई
नगर पालिका द्वारा बारिश का सीजन आने पर जर्जर मकानों को गिराने के लिए मालिकों को नोटिस भेजे जाते हैं। नोटिस की यह कार्रवाई हर साल होती है लेकिन मकानों को तोड़ा नहीं जा रहा है। शहर के भावसार मोहल्ला, सराफ बाजार, बावड़ी क्षेत्र, तिलकपथ, खसखसवाड़ी, पहाड़सिंहपुरा में कई मकान है जो जर्जर हो गए हैं। जिन्हें तोडऩे के लिए नपा ने मकान मालिकों को नोटिस भी दिए लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
शासकीय भवनों की हालत भी खस्ता
शहर में निजी मकानोंं के अलावा कुछ शासकीय भवन भी है जो खस्ताहाल हो रहे हैं। इनमें सनावद रोड स्थित आरटीओ कार्यालय के पास पुरानी बिल्डिंग, सीएमएचओ कार्यालय परिसर में पुराना अस्पताल की बिल्डिंग खतरनाक घोषित हो चुकी है। जिसके डिस्मेंटल की कार्रवाई नहीं हो रही।
नोटिस दिए हैं
पुराने व जर्जर हो चुके मकानों को चिन्हित कर संबंधित मकान मालिकों को नोटिस दिए हैं। संतुष्टप्रद जवाब नहीं मिलने पर मकानों को तोडऩे की कार्रवाई की जाएगी।
निशिकांत शुक्ला, सीएमओ नपा