चर्चित फलता विधानसभा सीट पर होने वाले पुनर्मतदान से ठीक 48 घंटे पहले तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जहांगीर खान के चुनाव मैदान से हटने से पश्चिम बंगाल में सियासी हलचल तेज हो गई है।
चर्चित फलता विधानसभा सीट पर होने वाले पुनर्मतदान से ठीक 48 घंटे पहले तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जहांगीर खान के चुनाव मैदान से हटने से पश्चिम बंगाल में सियासी हलचल तेज हो गई है। 21 मई को यहां दोबारा वोटिंग होनी थी, लेकिन मतदान से पहले ही जहांगीर खान के चुनावी प्रक्रिया से हटने के फैसले ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है। तृणमूल कांग्रेस ने इसे जहां पार्टी नहीं, जहांगीर खान का निजी फैसला करार दिया है तो भाजपा ने धुरंधर फिल्म का हवाला देते हुए तंज कसा है। दूसरी तरफ माकपा ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधा है।
तृणमूल ने कहा कि जहांगीर खान का चुनाव से हटना उनका निजी फैसला है, पार्टी का नहीं। अपने ट्वीट में टीएमसी ने लिखा कि जहांगीर खान द्वारा फलता पुनर्मतदान से हटने का निर्णय उनका निजी निर्णय है, न कि पार्टी का। पार्टी ने दावा किया कि 4 मई को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से अकेले फलता विधानसभा क्षेत्र में 100 से अधिक तृणमूल कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जा चुका है। कई पार्टी कार्यालयों में तोड़फोड़ की गई है, उन्हें बंद कर दिया गया है और दिनदहाड़े धमकी देकर जबरन कब्जा कर लिया गया है। अपने ट्वीट में टीएमसी ने लिखा कि बार-बार शिकायतें मिलने के बावजूद चुनाव आयोग आंखें मूंद रहा है।
तृणमूल ने भाजपा पर दबाव की राजनीति का आरोप लगाया। पार्टी ने कहा कि ऐसे दबाव के बावजूद, पार्टी कार्यकर्ता अडिग हैं और भाजपा द्वारा एजेंसियों और प्रशासन के माध्यम से फैलाई जा रही धमकियों का लगातार विरोध कर रहे हैं। हालांकि, कुछ अंततः दबाव के आगे झुक गए और चुनाव मैदान से हट गए। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं। पार्टी ने पश्चिम बंगाल और दिल्ली दोनों जगह कथित बांग्ला विरोधी भाजपा के खिलाफ लड़ाई जारी रखने का ऐलान किया है।
भाजपा प्रवक्ता देबजीत सरकार ने फालता पुनर्मतदान में टीएमसी प्रत्याशी जहांगीर खान के नामांकन वापस लेने पर कहा कि जिस तरह धुरंधर फिल्म में ल्यारी नाम की एक जगह को दिखाया गया है। वैसे ही पश्चिम बंगाल के फालता में भी एक ल्यारी है। जिसे जहांगीर, शाहजहां, आलमगीर (टीएमसी नेता) सभी ने मिलकर बनाया था। वहां की जनता मानती है कि यह लोग खुद समाज विरोधी हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ कई एफआईआर हुई थीं। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि तृणमूल सरकार के दौरान एफआईआर लेने से मना कर दिया जाता था। उस समय भी बहुत कुछ हुआ था। अभी बहुत एफआईआर सामने आने वाली है।
माकपा के वरिष्ठ नेता सुजन चक्रवर्ती ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर तीखा हमला किया है। चक्रवर्ती ने सोशल मीडिया मंच पर डायमंड हार्बर के सांसद को लेकर कटाक्ष किया, जिनके संसदीय क्षेत्र में फलता सीट आती है। उन्होंने अभिषेक बनर्जी के सक्रिय राजनीति से अचानक गायब होने पर उपहास किया। वामपंथी नेता ने जनता को पिछले आम चुनाव में बनर्जी की अपूर्व जीत के अंतर की याद दिलाई। चक्रवर्ती ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'जो सांसद लाखों वोटों से जीते थे, वे अब ममता बनर्जी के घर में शरण लिए हुए हैं!' उनकी यह टिप्पणी तृणमूल के फलता उम्मीदवार जहांगीर खान के मैदान से हटने के कुछ ही क्षण बाद आई। चक्रवर्ती ने उस नेता की पूर्ण विडंबना को उजागर किया, जिसने 'डायमंड हार्बर मॉडल' को लोकप्रिय बनाया था और दक्षिण 24 परगना में पूरी तरह से जीत की भविष्यवाणी की थी, लेकिन पार्टी को चुनावी हार का सामना करते ही वह पूरी तरह से गायब हो गए