
पुष्पा के नाटकीय रूप से झुकने के बाद फलता में 21 को फिर से मतदान
खुद को 'पुष्पा' बताने वाले तृणमूल कांग्रेस प्रत्याशी जहांगीर खान आखिरकार झुक गए। उन्होंने फलता में 21 मई को पुनर्मतदान से ठीक 48 घंटे पहले मंगलवार को चुनाव मैदान से हटने का ऐलान कर दिया। इसके साथ ही राज्य की सत्ता से बेदखल हुई तृणमूल को एक और झटका लगा है। जहांगीर खान ने कहा कि मैं फलता का बेटा हूं और मैं चाहता हूं कि फलता में शांति रहे और उसका विकास हो। सीएम सुवेंदु अधिकारी फलता के विकास के लिए एक विशेष पैकेज दे रहे हैं, इसीलिए मैं इस निर्वाचन क्षेत्र के पुनर्मतदान से खुद को अलग कर रहा हूं। उन्होंने कहा कि मेरा उद्देश्य फलता में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करना और इसका अधिकतम विकास करना है। मेरा विजन सोनार फलता था। इसी कारण से मैं अपना नामांकन वापस ले रहा हूं। मैंने फलता के विकास और शांति के हित में अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली है। विधानसभा चुनाव के दौरान जहांगीर खान काफी सुर्खियों में रहे। चुनाव में ऑब्जर्वर के रूप में तैनात यूपी के चर्चित आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा के साथ जुबानी जंग ने काफी चर्चाएं बटोरी थीं। जहांगीर का एक बयान काफी वायरल हुआ था कि यह बंगाल है, अगर अजय पाल शर्मा सिंघम हैं, तो मैं पुष्पा हूं।
जहांगीर के इस फैसले पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मंगलवार को दावा किया कि तृणमूल उम्मीदवार को कोई पोलिंग एजेंट नहीं मिल पाया। इस कारण जहांगीर 21 मई को फिर से होने जा रहे चुनाव से भाग गए। चुनाव से पहले प्रचार करते हुए सुवेंदु ने दावा किया कि खान के पास चुनाव से हटने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि तृणमूल नेता अभिषेक बनर्जी के भरोसेमंद सिपहसालार, जहांगीर खान ने अचानक चुनाव मैदान से अपना नाम वापस ले लिया है। आखिर उस कुख्यात डायमंड हार्बर मॉडल का क्या हुआ? क्या यह मॉडल ठीक उसी पल ढह गया, जब आखिरकार मतदाताओं को मतदान करने का एक निष्पक्ष मौका मिला? फलता में 29 अप्रैल को दूसरे चरण की वोटिंग के दौरान मतदान हुआ था। हालांकि, मतदान में दिन फलता में ईवीएम से छेड़छाड़ की कई शिकायतें आई थी, जिसके बाद चुनाव आयोग ने यहां फिर से मतदान कराने का फैसला किया।
दूसरी तरफ राज्य में विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि उसे पता चला है कि फलता विधानसभा क्षेत्र से उसके उम्मीदवार जहांगीर खान ने 21 मई को होने वाले पुन: चुनाव से हटने का फैसला किया है। तृणमूल प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने कहा कि पार्टी को खान के फैसले की जानकारी मिल गई है, लेकिन इसके पीछे का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। इससे पहले सोमवार को जहांगीर ने कलकत्ता हाई कोर्ट से अपनी सुरक्षा मांगी थी। उसने अपने खिलाफ एफआईआर को सार्वजनिक करने और दमनकारी कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की थी। कोर्ट ने आदेश दिया कि जहांगीर के खिलाफ दर्ज लंबित एफआईआर में 26 मई तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
चर्चित इस सीट पर कुल 6 उम्मीदवार मैदान में थे। अब टीएमसी प्रत्याशी के चुनाव से हटने के बाद मुकाबला एकतरफा माना जा रहा है। कुल 2.36 लाख से ज्यादा मतदाता बाकी बचे पांच प्रत्याशियों की चुनावी किस्मत का फैसला करेंगे। माकपा से शंभू कुर्मी और कांग्रेस से अब्दुर रज्जाक मैदान में हैं। अब भाजपा की राह आसान लग रही है। शांतिपूर्ण मतदान के लिए 285 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। फलता विधानसभा क्षेत्र में व्यापक धांधली के आरोप लगाने के बाद चुनाव को रद्द कर दिया गया था और दोबारा चुनाव की घोषणा हुई थी। दरअसल, चुनाव के दौरान शिकायत मिली थी कि फलता के मतदाताओं को टीएमसी के द्वारा धमकी दी जा रही है। आयोग के मुताबिक फलता में 24 मई को मतगणना प्रस्तावित है।
Published on:
20 May 2026 03:42 pm
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