Media Rules in Bengal: पश्चिम बंगाल सरकार ने कर्मचारियों को बिना अनुमति मीडिया से जानकारी साझा करने पर रोक लगाते हुए इसका पालन करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
West Bengal No Media Interaction without Approval Rule: पश्चिम बंगाल सरकार ने परिपत्र जारी कर अपने कर्मचारियों के लिए लागू आचरण नियमों को दोहराया है। इसके तहत बिना अनुमति मीडिया के साथ आधिकारिक दस्तावेज या जानकारी साझा करने और सार्वजनिक रूप से राज्य या केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करने पर रोक है।
मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से जारी परिपत्र में कहा गया है कि अखिल भारतीय सेवाओं, पश्चिम बंगाल सिविल सेवा, पश्चिम बंगाल पुलिस सेवा तथा अन्य राज्य सरकारी कर्मचारियों पर लागू मौजूदा आचरण नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।
शुभेन्दु अधिकारी ने कहा कि इसका उद्देश्य कर्मचारियों को मीडिया से बातचीत और सूचनाओं के प्रसार से संबंधित आचरण नियमों में पहले से मौजूद प्रावधानों की याद दिलाना है। परिपत्र में एआईएस आचरण नियम, 1968 और पश्चिम बंगाल सरकारी कर्मचारी आचरण नियम, 1959 के प्रावधानों का उल्लेख किया गया है।
मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने बताया कि सरकारी कर्मचारियों को बिना अनुमति के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मीडिया के साथ कोई भी दस्तावेज या जानकारी साझा करने से प्रतिबंधित किया गया है। इसमें कर्मचारियों को पूर्व अनुमति के बिना निजी तौर पर निर्मित या प्रायोजित मीडिया कार्यक्रमों में भाग लेने और सरकार से मंजूरी के बिना लेख, प्रसारण या प्रकाशन में योगदान देने से भी प्रतिबंधित किया गया है।
परिपत्र में यह भी कहा गया है कि कर्मचारियों को किसी भी मीडिया में प्रकाशन, संवाद, कथन, प्रसारण या योगदान के माध्यम से राज्य या केंद्र सरकार की नीतियों या निर्णयों की सार्वजनिक रूप से आलोचना करने की अनुमति नहीं होगी। इसमें कहा गया है कि सार्वजनिक संचार जिससे राज्य और केंद्र सरकारों के बीच, राज्यों के बीच या विदेशों के साथ संबंधों में तनाव पैदा हो सकता है, वह भी प्रतिबंधित है।
अधिकारी ने बताया कि परिपत्र में केवल मौजूदा सेवा आचरण मानदंडों का उल्लेख किया गया है। यह निर्देश राज्य सरकार द्वारा पर्याप्त रूप से वित्त पोषित स्वायत्त निकायों, बोर्ड, निगमों, उपक्रमों और शैक्षणिक संस्थानों के कर्मचारियों पर भी लागू होता है।
दूसरी तरफ टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने एक्स पर पोस्ट कर राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए इसे पूर्ण प्रतिबंध बताया है। उनका कहना है कि ये यह आदेश एक चेतावनी की तरह है और ये शासन की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि पूरे बंगाल में सरकारी कर्मचारियों पर चुप्पी साधने के लिए लागू किया गया है।
इस तरह सरकार ने शासन व्यवस्था में चुप्पी को अब प्रशासनिक अनिवार्यता बना दिया है। उन्होंने कहा कि यह चौंकाने वाला आदेश अनुशासन के बारे में नहीं है, बल्कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने और मौलिक अधिकारों का व्यवस्थित रूप से गला घोंटने के बारे में है।