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RG Kar Case High Court Order: आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप-मर्डर मामले में सबूत मिटाने और असली गुनहगारों को बचाने के दावों पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने बड़ा एक्शन लिया है। कोर्ट ने सीबीआई (CBI) के जॉइंट डायरेक्टर की अगुवाई में तीन सदस्यीय नई एसआईटी (SIT) गठित कर जांच के आदेश दिए हैं, जिसकी रिपोर्ट 25 जून तक सौंपनी होगी। यह आदेश पीड़ित के माता-पिता की याचिका पर आया है, जो शुरुआती जांच और मुख्य आरोपी संजय रॉय को मिली उम्रकैद से संतुष्ट नहीं थे। उनका आरोप है कि सीबीआई ने अन्य आरोपियों को बचाया है। इस नए आदेश से मामले में एक बार फिर सियासी और कानूनी बवंडर खड़ा हो गया है।
अदालत ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है और जांच के लिए कड़े नियम तय किए हैं। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, सीबीआई के जॉइंट डायरेक्टर की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया जाएगा। अदालत ने एसआईटी को साफ निर्देश दिया है कि उन्हें इस नई जांच की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट 25 जून तक सौंपनी होगी।
यह पूरा आदेश पीड़ित के माता-पिता की तरफ से लगाई याचिका पर आया है। पिछले साल 17 मार्च को पैरेंट्स ने सीबीआई पर केस की सही जांच नहीं करने और आरोपों को दबाने का सीधा आरोप लगाया था। सुप्रीम कोर्ट ने पैरेंट्स को कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की परमिशन दी थी। पीड़ित के माता-पिता इस जांच से बिल्कुल खुश नहीं थे। उन्होंने मुख्य आरोपी संजय रॉय के अलावा अन्य आरोपियों के शामिल होने का पता लगाने के लिए आगे की जांच की मांग की थी।
आरजी कर हॉस्पिटल में 8-9 अगस्त 2024 की रात ट्रेनी डॉक्टर का रेप-मर्डर हुआ था। 9 अगस्त की सुबह डॉक्टर की लाश सेमिनार हॉल में मिली थी। घटना को लेकर कोलकाता समेत देशभर में प्रदर्शन हुए और बंगाल में 2 महीने से भी ज्यादा समय तक स्वास्थ्य सेवाएं ठप रही थीं। इस घटना के बाद डॉक्टरों और पीड़ित परिवार ने सीबीआई जांच की मांग की, लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जांच के आदेश नहीं दिए। आखिरकार हाईकोर्ट के आदेश के बाद 13 अगस्त 2024 को जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।
सीबीआई की शुरुआती जांच में कई बड़ी खामियां सामने आईं। मुख्य आरोपी संजय रॉय के अलावा मामले में मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को भी आरोपी बनाया गया, लेकिन सीबीआई 90 दिन के अंदर घोष के खिलाफ चार्जशीट दायर नहीं कर पाई, जिस कारण सियालदह कोर्ट ने 13 दिसंबर को घोष को इस मामले में जमानत दे दी।
इस मामले के कानूनी सफर में कई बड़े मोड़ आए। 18 जनवरी 2025 को सेशंस कोर्ट ने संजय रॉय को दोषी ठहराया और 20 जनवरी 2025 को उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने कहा कि यह रेयरेस्ट ऑफ रेयर मामला नहीं है, इसलिए फांसी की सजा नहीं दे सकते। इसके तुरंत बाद 24 जनवरी 2025 को सीबीआई ने हाईकोर्ट का रुख कर संजय के लिए मौत की सजा की मांग की, जबकि संजय ने 9 जुलाई 2025 को बरी होने की अपील की। अब जजों के खुद को अलग करने के सिलसिले के बाद 11 मार्च 2026 को खंडपीठ ने केस रिलीज किया और अब यह नई एसआईटी पूरे 'कवर-अप' का पर्दाफाश करने के लिए मैदान में उतर चुकी है।
Updated on:
21 May 2026 05:36 pm
Published on:
21 May 2026 05:36 pm
