राज्य के 16 जिलों में मतदान से 294 सदस्यीय राज्य विधानसभा के 152 निर्वाचन क्षेत्रों में 167 महिलाओं सहित 1,478 उम्मीदवारों के चुनावी भाग्य का फैसला हुआ। भीषण गर्मी और उमस के बावजूद मतदाता सुबह से ही मतदान केंद्रों के बाहर बड़ी संख्या में कतारों में खड़े नजर आए और जैसे-जैसे समय बीतता गया, मतदान की गति तेज होती गई।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में रेकॉर्ड वोट पड़ने के बाद दूसरे चरण की जंग शुरू हो गई है। राज्य की तमाम पार्टियां मैदान में कूद गई हैं। जोरदार प्रचार कर रही है। दूसरी तरफ आयोग भी सक्रिय नजर आ रहा है। शांति से मतदान के लिए हर कदम उठा रहा है। पहले चरण के दौरान हिंसा, मतदाताओं को डराने-धमकाने और तीन उम्मीदवारों पर हमले की छिटपुट घटनाएं सामने आई थी।
पहले चरण में रेकॉर्ड वोट पड़ने के बाद विश्लेषकों का कहना है कि मतदान में लोगों की भारी भागीदारी बढ़ी हुई राजनीतिक गोलबंदी और एसआईआर के सांख्यिकीय प्रभाव दोनों को दर्शाती है। एसआईआर के तहत राज्य भर में मतदाता सूची से 91 लाख से अधिक नाम हटा दिए गए थे। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़ी संख्या में नाम काटे जाने को लेकर विवाद के बीच राज्य के 16 जिलों में मतदान से 294 सदस्यीय राज्य विधानसभा के 152 निर्वाचन क्षेत्रों में 167 महिलाओं सहित 1,478 उम्मीदवारों के चुनावी भाग्य का फैसला हुआ। भीषण गर्मी और उमस के बावजूद मतदाता सुबह से ही मतदान केंद्रों के बाहर बड़ी संख्या में कतारों में खड़े नजर आए और जैसे-जैसे समय बीतता गया, मतदान की गति तेज होती गई। मतदान केंद्रों के बाहर लंबी कतारें इस बात का संकेत थीं कि मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इसे सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच महत्वपूर्ण मुकाबले के रूप में देखा जा रहा है।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, सुबह सात बजे मतदान शुरू हुआ। राज्य में शाम पांच बजे तक 89.93 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। दक्षिण दिनाजपुर जिले में सबसे अधिक 93.12 प्रतिशत मतदान हुआ।
जिलेवार मतदान प्रतिशत
अलीपुरद्वार – 88.74%
बांकुड़ा – 89.91%
बीरभूम – 91.55%
कूचबिहार – 92.07%
दक्षिण दिनाजपुर – 93.12%
दार्जिलिंग – 86.49%
जलपाईगुड़ी – 91.20%
झाड़ग्राम – 90.53%
कालिम्पोंग – 81.98%
मालदा – 89.56%
मुर्शिदाबाद – 91.36%
पश्चिम बर्धमान – 86.89%
पश्चिम मेदिनीपुर – 90.70%
पूर्व मेदिनीपुर – 88.55%
पुरुलिया – 87.35%
उत्तर दिनाजपुर – 89.74%
उम्मीदवारों पर हमलों समेत कुछ जिलों में छिटपुट हिंसा की घटनाओं से तनाव पैदा हो गया। निर्वाचन आयोग ने हिंसा के संबंध में अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। बीरभूम जिले के खैरासोल में अंतिम घंटों के दौरान तनाव काफी बढ़ गया, जब मतदाताओं ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में डाले गए वोट भाजपा के खाते में दर्ज हो रहे हैं। चुनाव अधिकारियों और नाराज मतदाताओं के बीच बहस छिड़ने के बाद स्थिति और बिगड़ गई, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने मतदान केंद्र के बाहर प्रदर्शन किया। दक्षिण दिनाजपुर के कुमारगंज में भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु सरकार के साथ उस समय हाथापाई की गई जब वह गड़बड़ी की खबरों के बाद एक मतदान केंद्र की ओर जा रहे थे। शुभेंदु सरकार ने दावा किया कि पुलिस की मौजूदगी में उनकी पिटाई की गई और उनके वाहन में तोड़फोड़ की गई। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि शुभेंदु सरकार ने एक बूथ के पास अशांति फैलाने की कोशिश की थी जिसके कारण स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया।
आसनसोल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के रहमत नगर में भाजपा उम्मीदवार अग्निमित्रा पॉल की कार पर पथराव किया गया जिससे उसकी पिछली खिड़कियों के शीशे टूट गए। मुर्शिदाबाद के नौदा में आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) और तृणमूल के समर्थकों के बीच झड़पें हुईं। वाहनों में तोड़फोड़ और पथराव के बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए केंद्रीय बलों को लाठीचार्ज करना पड़ा। एजेयूपी प्रमुख हुमायूं कबीर जब एक मतदान केंद्र पर गए तो उन्हें तृणमूल समर्थकों के विरोध का सामना करना पड़ा। कबीर ने बाद में सत्तारूढ़ पार्टी पर डराने-धमकाने और गड़बड़ी का आरोप लगाया जबकि तृणमूल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए हिंसा की निंदा की। बीरभूम के लाभपुर और मालदह के चांचल में भाजपा के चुनाव एजेंट पर तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा हमले किए जाने के आरोप लगे हैं। मुरारई में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़प में दो लोग घायल हो गए जिससे जिले में तनाव और बढ़ गया। डोमकल में, मतदाताओं को बूथों तक पहुंचने से रोके जाने के आरोप लगे, जिसके कारण सुरक्षाकर्मियों की तैनाती आवश्यक हो गई।
अधिकारियों ने बताया कि दोपहर तक निर्वाचन आयोग को मतदान से जुड़ी करीब 500 शिकायतें प्राप्त हुईं, जबकि सीविजिल ऐप के माध्यम से 375 अन्य शिकायतें दर्ज की गईं। तृणमूल कांग्रेस ने दोपहर तक 700 से अधिक शिकायतें दर्ज कराने का दावा किया, जिनमें से कई ईवीएम में कथित खराबी और केंद्रीय बलों के आचरण से संबंधित थीं। विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि तृणमूल द्वारा संरक्षित अपराधियों ने मतदाताओं को डराया, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों और बलों का उपयोग करने का आरोप लगाया।