- लैंको प्रबंधक ने संयंत्र विस्तार के लिए 2010 में ग्राम खोड्डल, सरबुंदिया, पहन्दा गांवों की जमीन अधिग्रहीत की थी।
कोरबा. लैंको अमरकंटक पॉवर प्लाट से प्रभावित ७८ लोगों ने प्रशासन से इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी है। उनका कहना है कि जमीन अधिग्रहण के आठ साल बाद भी लैंको ने प्रभावितों को रोजगार नहीं दिया और उनकी जमीन को कब्जा कर लिया। ग्राम पताढ़ी स्थित लैंको अमर कंटक पॉवर प्लांट से प्रभावित ग्रामीण बुधवार को बड़ी संख्या में कलेक्टोरेट पहुंचे। ग्रामीणों ने कलेक्टर से मुलाकात कर अपनी आपबीती सुनाई।
इन ग्रामीणों ने बताया कि लैंको प्रबंधक ने संयंत्र विस्तार के लिए २०१० में ग्राम खोड्डल, सरबुंदिया, पहन्दा गांवों की जमीन अधिग्रहीत की थी। उस दौरान प्रबंधन ने लोक लुभावन वादा करते हुए ग्रामीणों को बताया था कि भूमि अधिग्रहण के दो साल भीतर ग्रामीणों को शिक्षा और कुशलता के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। आठ साल बीत गए लेकिन लैंको ने गांव के एक भी भू- विस्थापित को रोजगार नहीं दिया। अस्थाई रोजगार का वादा भी झूठा साबित हुआ है।
ग्र्रामीणों का कहना है कि उनकी जमीन अधिग्रहीत होने के बाद खेती किसानी के लिए भी जमीन नहीं बची है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति दिनों दिन खराब हो रही है। जमीन पर लैंको के कब्जा होने से जीवन यापन के रास्ते बंद हो चुके है। भूखमरी की स्थिति निर्मित हो गई है। ग्राम खोड्डल, सरगबुंदिया और पहंदा के ७८ भू- विस्थापितों ने प्रशासन से समस्या का निराकरण करने या इच्छा मृत्यु प्रदान करने की मांग की है।
लैंको करता है प्रशासन की अनदेखी
लैंको संयंत्र से प्रभावित भू- विस्थापितों को रोजगार देने के लिए प्रशासन ने उम्मीदवारों की सूची लैंको प्रबंधन को सौंप थी। लेकिन आठ साल से कंपनी ग्रामीणों के रोजगार पर मौन है। वित्तीय स्थिति का हवाला देकर रोजगार नहीं दे रही है।
एसईसीएल से परेशान
कोयला खदान के लिए जमीन दे चुके हरदीबाजार, रलिया और भठोरा सहित दो दर्जन से अधिक गांव के लोग आज भी स्वंय को ठगा हुआ महसूस करते हैं। एसईसीएल में नौकरी और पूर्नवास के लिए चक्कर लगा रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर कई बैठकों के बाद भी निर्णय नहीं निकला है।
इधर भी ठगे गए हैं भूविस्थापित
वंदना पावर प्लांट : एक दशक पहले छुरी के पास वंदना पॉवर प्लांट के लिए भी ग्रामीणों की जमीन अधिग्रहित की गई थी। जमीन का अधिग्रहण करते समय वंदना प्रबंधन ने वादों की झडिय़ां लगा दी थी। नौकरी से लेकर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का वादा किया था। प्लांट बनकर तैयार हुआ लेकिन चालू नहीं हो सका।
-भू- विस्थापितों की समस्या को लेकर प्रशासन गंभीर है। बातचीत से हल निकालने की कोशिश की जा रही है। बैठक में लिए निर्णय की मॉनिटरिंग भी हो रही है- एनएस नरोजी, एडीएम कोरबा