
कोरबा. छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के दीपका में एक खास शादी (Unique Marriage in Korba) हुई। ये खास इसलिए क्योंकि शादी के बाद बाबुल से विदाई के दौरान बेटी को दहेज (Bride vidai with plant in dowry) में मायके पक्ष ने 35 पौधे दिए और दूल्हे से जिंदगी भर उन पौधों की रक्षा करने का वचन भी लिया गया।
दीपका निवासी महेन्द्र कुमार महतो की बेटी नम्रता महतो का विवाह कोरबा के निवासी सेवक राम जायसवाल के बेटे अविनाश जायसवाल के साथ कबीर भवन दीपका में सम्पन्न हुई। शादी सम्पन्न होने के बाद मंडप में ही मायके पक्ष के लोगों ने नवदम्पति जोड़े को 35 पौधे भेंट की। फलदार पौधों को गमले के साथ दिया गया। साथ ही दुल्हे से जिंदगी भर इन पौधों की रक्षा करने का वचन भी लिया गया।
विदाई के दौरान अन्य समानों के साथ इन गमलों को भी ससुराल भेजा गया। परिवार के प्रमुख प्रशांत महतो ने बताया कि परिवार में इससे पहले दो शादियां हो चुकी है। बड़ी बहन की शादी में भी पौधे भेंट किए गए थे। वहीं खुद की शादी में कार्ड में छपवाया गया था कि गिफ्ट के बजाए पुस्तकें भेंट की जाएं। इस शादी में सैकड़ों पुस्तकें जमा हुई थी जिन्हें जरुरतमंद लोगों को बांट दिए गए थे।
ससुराल पक्ष ने भी इस पंरपरा को किया स्वीकार
मायके पक्ष के इस पंरपरा को दुल्हन के ससुराल पक्ष ने भी स्वीकार किया। कोविड को देखते हुए दो परिवारों के बीच शादी सम्पन्न हुई। जितने भी मेहमान आए थे। उन्हें पौधें भेंट किए गए। जब बारात वापस पहुंची तो इन पौधों का भी स्वागत हुआ। परिवार के सदस्यों ने बकायदा इसे सम्मान के साथ घरों पर सजाया। इस शादी की समाज और परिवार में जमकर चर्चा है।
बड़े भाई ने कहा- पौधे से बड़ा और कोई दहेज नहीं
दुल्हन के बड़े भाई प्रशांत महतो ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि पौधों से बड़ा और कोई दहेज नहीं हो सकता। सारे सामान पुराने होने के साथ खराब हो जाएंगे, लेकिन ये पौधे ही हैं जो हर दिन के साथ बड़े होंगे। इनसे ही ताजी हवा मिलेगी। पौधे जिंदगी के सबसे अहम हिस्सा हैं ऐसे में दहेज में पौधों का स्थान जरुरी है। अगर हर शादी में यह पंरपरा शुरु होती है तो पौधे लगेंगे भी और बचेंगे भी।