- जब किसी भूखे का पेट भरता है तो इनकी आत्मा होती है तृप्त
राजकुमार शाह
कोरबा. जब जठराग्नि प्रबल होती है और शरीर का रोम-रोम भोजन मांग रहा होता और उसी बीच कोई आए और उन्हें भरपेट भोजन देकर तृप्त कर दे तो इससे ज्यादा आत्मिक संतुष्टि और कुछ नहीं हो सकती है। लोगों को खुशी पहुंचाने वाली इस अनुभूति से जो सकारात्मक उर्जा मिली, उससे जीवन में चल रही परेशानियां छोटी लगने लगती है। यह काम सिर्फ जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराने तक ही समीत नहीं है। बल्कि समाज को कुछ लौटाने का जरिया बन गया है।
यह कहना है जिले में गरीबों को मुफ्त भोजन उपलब्ध कराने वाली युवाओं की टोली, एक्ट ऑफ ह््यूमेनिटी के सदस्यों का। जो जिले में यह काम पिछले पांच-छ: महीनो से लगातार कर रहे हैं। सुप्रिया बरा ने इस अभियान की शुरुआत की और अपने ही सहपाठियों को सोशल मीडिया के माध्यम से एकत्र किया। सभी युवा आपस में मिले और तय किया कि कुछ ऐसा किया जाए जिससे समाज का भला हो सके।
जिसका बर्थडे वह लेता है जिम्मा
परोपकार तक को बात ठीक है, लेकिन जब बात फंडिंग पर आई तो ग्रुप के सदस्य मदद मांगते हैं ऐसे में यदि किसी से मदद मिली तो ठीक अन्यथा वह अपने खर्चे पर ही लोगों को भोजन उललब्ध कराते हैं। शहर के रेलवे स्टेशन, शनी मंदिर व सर्वमंगला मंदिर में वह हर शनिवार की रात लोगों को बाकायदा पैकेट बनाकर भोजन बांटते हैं। एक्ट ऑफ ह्यूमेनिटी के सदस्यों की योजना है कि भविष्य में शादी, पार्टियों के साथ ही लोगों से घरों में बचा भोजन एकत्र कर जरूरतमंदों तक पहुंचाया जाए।
इस तरह जुड़े नए साथी
लोगों को मुफ्त भोजन कराने के लिए बने इस गु्रप का नाम युवाओं ने एक्ट ऑफ ह्यूमेनिटी रखा है। पहले कुछ दिनों तक सभी किसी भी स्थान पर भोजन तैयार कर लेते थे, और भूखों तक पहुंचाते थे, फिर सभी को लगा कि इसे और भी व्यवस्थित तरीके से करना चाहिए। युवाओं ने इसके लिए होटल से संपर्क किया। होटल मालिक श्रीजीत नायर को जब पता चला कि जो भोजना उनके होटल में पकाया जा रहा है। वह गरीबों को मुफ्त में बांटने के लिए है। तब उन्होंने ने भी इसके लिए कोई पैसे नहीं लिए और अब हर बार खाना यहीं श्रीजीत के होटल में ही तैयार किया जाता है। फिलहाल एक्ट ऑफ ह्यूमेनिटी में राहुल अमीन खान, रेणु बखला, संजीव रमानी, नीलम, सुधीर, निशा सहित १५ सदस्य हैं।
-एक्ट ऑफ ह्यूमेनिटी का गठन सुप्रिया बरा ने किया था। अन्य युवा व मैं भी इस ग्रुप से जुड़ा। अब हम नियमित तौर जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराते हैं, इससे सुकुन मिलता है- श्रीजीत नायर, सदस्य