
जेवर खरीदने से भी बच रहे लोग (PC: AI)
Jewellery Stocks Fall: पेट्रोल-डीजल के बाद अब सराफा बाजार पर भी वैश्विक परिस्थितियों का असर दिखाई देने लगा है। मध्य-पूर्व एशिया में युद्ध जैसे हालात और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच प्रधानमंत्री द्वारा एक वर्ष तक सोना व सोने के जेवरों की खरीदी सीमित रखने की अपील के बाद जिले के सराफा कारोबार में सुस्ती आने लगी है। बाजार में ग्राहकों की संख्या घटने से कारोबारियों के साथ-साथ कारीगरों और कर्मचारियों की चिंता भी बढ़ गई है।
शहर के सराफा कारोबारियों ने बताया कि जिले में 500 से अधिक छोटे-बड़े व्यापारी और कारीगर इस व्यवसाय से जुड़े हैं। इसके अतिरिक्त सराफा दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या भी लगभग एक हजार है। प्रधानमंत्री की अपील के बाद से लोगों ने सोना खरीदी कम कर दी है। इसका असर ऊर्जाधानी के सराफा कारोबार पर स्पष्ट रूप से दिख रहा है। दुकानों में ग्राहकों की संख्या पहले की तुलना में कम हुई है। इस व्यवसाय से जुड़े छोटे सराफा कारोबारी, कारीगर और कर्मचारी सर्वाधिक परेशान हैं, क्योंकि उनके सामने परिवार के पालन-पोषण की समस्या खड़ी हो गई है।
सराफा कारोबार से जुड़े व्यापारी और कारीगरों में इस स्थिति को लेकर नाराजगी है। दूसरी ओर, आम लोगों का कहना है कि सोने का भाव पहले से ही इतना अधिक है कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए इसे खरीदना मुश्किल हो गया है। केंद्र सरकार ने एक दिन पहले ही एक्साइस ड्यूटी भी नौ फीसदी तक बढ़ा दी है।
अब लोगों को सोना खरीदने के लिए निर्धारित भाव का 15 फीसदी एक्साइस ड्यूटी और जीएसटी अतिरिक्त देना होगा। इससे आमजन की दिक्कतें और बढ़ गई हैं। शादी-ब्याह के लिए भी सोना खरीदने से आमजन बचने लगे हैं। सराफा कारोबारियों ने बताया कि गुरुवार को एक तोला 24 कैरेट सोना का भाव एक लाख 65 हजार रुपए था।
एक सराफा व्यापारी ने बताया कि केंद्र सरकार ने बढ़ते सोना के भाव के बीच छह माह पहले लोगों को राहत देने के लिए एक्साइस ड्यूटी 15 फीसदी से घटाकर छह फीसदी कर दी थी। नौ फीसदी एक्साइस ड्यूटी कम होने से लोगों को सोना खरीदी के दौरान काफी हद तक राहत मिल रही थी। लेकिन बुधवार को एक बार फिर केंद्र सरकार के निर्णय ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। अब फिर से १५ फीसदी एक्साइस ड्यूटी का भुगतान करना होगा। इसका भार सीधे तौर पर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा, इससे परेशानी बढ़ेगी।
सोना और सोने के जेवर की खरीदी कम हो गई है। कारोबारी अलीप का एक साल तक बने रहने की संभावना जता रहे हैं। इससे सराफा दुकानों में कार्यरत के मजदूरी भुगतान को लेकर कारोबारी परेशान हो रहे हैं। इससे कर्मचारियों की छटनी की तैयारी में है।
जगदीश सोनी, अध्यक्ष, कोरबा सराफा संघ के मुताबिक, प्रधानमंत्री के अपील के बाद स्थानीय स्तर पर भी सराफा कारोबार पर विपरीत असर पड़ा है। सोना व चांदी के भाव बढऩे से पहले ही लोग जेवर की खरीदी कम करते थे। अब इस पर और प्रभाव पड़ा है। इससे छोटे सराफा कारोबारी, कारीगर और कर्मचारियों के समक्ष संकट उत्पन्न हो गया है और उनकी दिक्कतें बढ़ गई है।
Published on:
15 May 2026 04:20 pm
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