कोरबा

Coal crisis: बारिश ने बढ़ाई बिजली घरों की चिंता, 45 प्लांटों में कोयले का संकट, छत्तीसगढ़ बेफिक्र

Power Crisis:: देश के 45 बिजली घरों में कोयले का संकट गहराया है। कोल इंडिया की आपूर्ति धीमी होने से कई राज्यों में स्टॉक घटा, जबकि छत्तीसगढ़ में स्थिति सामान्य है।
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Sep 01, 2026
Coal crisis
45 प्लांटों में कोयले का संकट (Photo Patrika)

Coal crisis in CG:@राजेश कुमार। सावन और भादो में लगातार हो रही झमाझम बारिश ने कोयला खदानों की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। प्रदेश के कोरबा जिले सहित देशभर में रुक-रुककर हो रही भारी बारिश के कारण साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) और कोल इंडिया की अन्य कंपनियों की खदानों में कोयला उत्पादन काफी घट गया है। खदानों में पानी भरने और कैप्टिव कोल ब्लॉक्स से खनन प्रभावित होने के कारण बिजली संयंत्रों तक कोयला पहुंचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

छत्तीसगढ़ के बिजली घरों पर फिलहाल कोई संकट नहीं

उत्पादन में आई इस कमी की वजह से देश के कई राज्यों में बिजली संकट के बादल मंडराने लगे हैं। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश के 186 प्रमुख बिजली घरों में से 45 संयंत्रों में कोयले का स्टॉक खतरनाक यानी क्रिटिकल स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि संतुलित स्टॉक और नियमित परिवहन के कारण छत्तीसगढ़ के बिजली घरों पर फिलहाल कोई संकट नहीं है।

राजस्थान यूपी और गुजरात में स्थिति गंभीर

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के नियमों के मुताबिक, बिजली संयंत्रों में कम से कम 19 से 21 दिन का कोयला रिजर्व होना चाहिए, ताकि आपूर्ति रुकने पर भी बिजली उत्पादन बाधित न हो। लेकिन बारिश के कारण आपूर्ति चक्र टूटने से कई राज्यों में स्टॉक तेजी से घटा है।
राजस्थान: राज्य के 7 बिजली संयंत्रों (क्षमता 7580 मेगावॉट) को रोज 1.4 लाख टन कोयले की दरकार है। नियमतः यहां 21.87 लाख टन स्टॉक होना चाहिए, लेकिन महज 4.44 लाख टन कोयला ही बचा है।

उत्तर प्रदेश

6 विद्युत संयंत्रों (क्षमता 9115 मेगावॉट) में प्रतिदिन 1.32 लाख टन की खपत है। आवश्यकता 24.73 लाख टन की है, जबकि वर्तमान में केवल 8.00 लाख टन ही उपलब्ध है।

गुजरात

3 पावर प्लांटों (क्षमता 4010 मेगावॉट) की दैनिक खपत 58 हजार टन है। जरूरत 12.9 लाख टन की है, लेकिन स्टॉक सिर्फ 6.51 लाख टन ही रह गया है।

छत्तीसगढ़ क्यों है सुरक्षित

छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी की कुल क्षमता 2,840 मेगावॉट है, जिसके लिए रोजाना 44 हजार टन कोयले की आवश्यकता होती है। नियमानुसार प्रदेश में 7.48 लाख टन का सुरक्षित स्टॉक होना चाहिए, लेकिन बेहतर प्रबंधन के चलते वर्तमान में कंपनी के पास 8.30 लाख टन कोयला मौजूद है, जो आवश्यकता से अधिक है।

कोरबा की मेगा खदानों से हो रही आपूर्ति

प्रदेश में कोयला आपूर्ति का मुख्य जिम्मा एसईसीएल के पास है, जिसकी छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में करीब 60 खदानें हैं। कोरबा स्थित गेवरा, दीपका और कुसमुंडा जैसी देश की बड़ी मेगा परियोजनाओं से राज्य के एचटीपीएस, डीएसपीएम, मड़वा के साथ-साथ एनटीपीसी कोरबा, सीपत और निजी क्षेत्र के बालको व केपीएल को नियमित कोयला भेजा जा रहा है।

वर्जन

बिजली घरों को उनकी जरूरत के अनुसार बिना रुकावट कोयला पहुंचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है, ताकि देश में बिजली उत्पादन ठप न हो। बारिश से खनन पर आंशिक असर पड़ा है, लेकिन आपूर्ति का सिलसिला लगातार जारी है।

-डॉ. सनिष चंद, जनसंपर्क अधिकारी, एसईसीएल

Updated on:
01 Sept 2026 08:36 am
Published on:
01 Sept 2026 08:36 am