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कोरबा में सांपों की कई प्रजातियां, गेंहुआ नाग और घोड़ा करैत ने 491 लोगों को डंसा, आप बचके

chhattisgarh news: सर्पदंश से पीड़ित लोगों की जान भी जा रही है। इसकी वजह झाडफूंक है। कई लोग सांप कांटने के बाद अस्पताल जाने के बाद बताए झांड फूंक करवाते हैं। ऐसे लापरवाही में भी लोगों की जान जा रही है।
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Farmer died due to snake bite

Ambikapur Snake Bite, प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo- Patrika)

Korba News: बारिश के सीजन में सर्पदंश के मामले भी बढ़ गए हैं। साल-दर-साल सर्पदंश के शिकार होने वाले लोगों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है। कोरबा में लगातार सर्पदंश के मामले सामने आए हैं। सर्पदंश से पीड़ित लोगों की जान भी जा रही है। इसकी वजह झाडफूंक है। कई लोग सांप कांटने के बाद अस्पताल जाने के बाद बताए झांड फूंक करवाते हैं। ऐसे लापरवाही में भी लोगों की जान जा रही है।

Chhattisgarh News: सबसे अधिक गेंहुआ नाग और घोड़ा करैत

कोरबा जिले में सांपों की कई प्रजातियां हैं, जिसमें किंग कोबरा से लेकर गेंहुआ नाग और घोड़ा करैत तक शामिल हैं। जिले में जो भी सर्पदंश की घटनाएं सामने आ रही है उसमें गेंहुआ नाग या घोड़ा करैत के मामले ज्यादा हैं। घोड़ा करैत ऐसा सांप है कि वह लोगों के बिस्तर पर भी चढ़ जाता है और बिस्तर में घुसकर बैठ जाता है। जब लोग करवट बदलते हैं तब सांप को डर लगता है और वह इन्हें निशाना बना लेता है। हालांकि कोरबा जिले में स्नैक बाइट के जो 491 मामले इस साल दर्ज किए गए हैं, उसमें आधे ऐसे सांप हैं जो जहरीला नहीं हैं।

सबसे अधिक कटघोरा में दर्ज किए गए मामले

कोरबा जिले में इस साल सर्पदंश के सबसे अधिक मामले विकासखंड कटघोरा में दर्ज किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यहां सर्पदंश के शिकार 104 मरीज अस्पताल पहुंचे। जबकि दूसरे स्थान पर करतला है। इस विकासखंड में रहने वाले 80 लोगों को सांप ने इस साल डंसा है। वहीं अलग-अलग क्षेत्रों से मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रेफर या सीधे आने वाले लोगों की संख्या भी कम नहीं है। 93 लोग यहां पहुंचे हैं।

एंटी स्नैक वेनम की कमी नहीं, 5500 से ज्यादा डोज उपलब्ध

स्वास्थ्य विभाग की मानें तो कोरबा जिले में एंटी स्नैक वेनम की कमी नहीं है। जिले में अभी 5600 से ज्यादा एंटी स्नैक वेनम डोज उपलब्ध है। इसे सभी पीएचसी और सीएचसी सेंटरों में भिजवाया गया है, ताकि जरूरत पडऩे पर वैक्सीन का इस्तेमान सर्पदंश के शिकार लोगों की जान बचाने के लिए किया जा सके। वैक्सीन की सबसे अधिक डोज पाली सीएचसी में उपलब्ध कराए गए हैं। अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी वैक्सीन का वितरण किया गया है।

नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी सदस्य, जितेंद्र सारथी ने कहा कि मार्च और अप्रैल का समय सांपों का प्रजनन काल होता है। बारिश में सांप अंडे देते हैं। बारिश में सर्पदंश की घटनाएं ज्यादा सामने आती है। बारिश का पानी जब सांपों के बिल में समाता है तो सांप बाहर निकल जाते हैं और गर्माहट वाले जगह की तलाश में घरों के भीतर घुस जाते हैं।

सर्पदंश होने पर क्या करें?

सर्पदंश की स्थिति में पीड़ित को शांत रखें, काटे गए अंग को यथासंभव स्थिर रखें और तुरंत अस्पताल ले जाएं। सांप को पकड़ने या मारने की कोशिश न करें। झाड़-फूंक, चीरा लगाने या जहर चूसने जैसे उपायों में समय बर्बाद नहीं करना चाहिए।

संपादकीय टिप्पणी-संयम योजना

प्रकाशन से पहले खबर पर टिप्पणी-संयम की व्यवस्था पर सहमति बनाई जाएगी। पाठकों की प्रतिक्रियाओं में किसी व्यक्ति, संस्था या समुदाय के खिलाफ अपमानजनक, भ्रामक, भय फैलाने वाली अथवा बिना प्रमाण के आरोप वाली टिप्पणियों को प्रकाशित नहीं किया जाएगा। सर्पदंश और उपचार से जुड़े दावों को भी प्रमाणित स्वास्थ्य विभाग या विशेषज्ञ स्रोतों के आधार पर ही प्रस्तुत किया जाएगा।