Korba News: कोरबा जिले में बालकोनगर के बजरंग चौक से रिस्दा होकर बरबसपुर बायपास मार्ग को राखड़ परिवहन के लिए दोबारा खोल दिया गया है।
Korba News: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में बालकोनगर के बजरंग चौक से रिस्दा होकर बरबसपुर बायपास मार्ग को राखड़ परिवहन के लिए दोबारा खोल दिया गया है। शुक्रवार की रात 12 बजे से इस मार्ग से राखड़ का परिवहन फिर शुरू हो गया है। इससे कंपनियों को बड़ी राहत मिली है। इधर क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी ने राखड़ परिवहन करने वाली कंपनियों को सख्त हिदायत दी है और कहा है कि नियम-कायदों को ताक पर रखकर परिवहन करते पकडे़ जाने पर फिर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
Korba News: जरूरत पड़ी तो परिवहन पर रोक और भी बढ़ाई जा सकती है। पर्यावरण संरक्षण मंडल की ओर से बताया गया है कि कंपनियों को बरबसपुर बायपास मार्ग पर सड़क किनारे जगह-जगह फैले राख को उठाने का निर्देश दिया गया था। कंपनियों ने यह काम पूरा कर लिया है। इसके बाद राख परिवहन की अनुमति दी गई है।
गौरतलब है कि एक अक्टूबर को पर्यावरण संरक्षण मंडल ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार को भरोसे में लेकर बालकोनगर के बजरंग चौक से बरबसपुर के रास्ते होने वाले राखड़ परिवहन को तीन दिन के लिए रोक दिया था। इसके बाद उन कंपनियों की परेशानी बढ़ गई थी जो इस मार्ग का इस्तेमाल राखड़ परिवहन के लिए कर रहे थे।
संबंधित कंपनियों के अधिकारी प्रशासन के संपर्क में थे और यह आश्वस्त कर रहे थे कि उनके द्वारा नियम-कायदों को पालन करते हुए राख का परिवहन किया जाएगा। संबंधित प्रबंधन के आश्वासन पर पर्यावरण संरक्षण मंडल ने मियाद पूरी होने के बाद परिवहन की अनुमति दे दी है। इससे कंपनियों को काफी राहत मिली है।
गौरतलब है कि कोरबा में बिजली बनाने के लिए थर्मल प्लांटों में बड़े पैमाने पर कोयला का दहन किया जाता है। यहां से रोजाना हजारों टन राख कंपनियों के राखड़ बांध में पहुंचता है। यहां से अलग-अलग स्थानों तक परिवहन कर भेजा जाता है। हालांकि संबंधित कंपनियों ने राखड़ परिवहन का कार्य निजी कंपनियों को दिया हुआ है और ये कंपनियां नियम-कायदों को ताक पर रखकर राख का परिवहन करती है। कई बार बिना ढंके इनके द्वारा राख परिवहन किया जाता है जिससे गाड़ियों के चलने के साथ राख तेजी से उड़कर हवा में घुल जाता है और आसपास के क्षेत्रों में फैल जाता है।
इससे संबंधित क्षेत्र के लोग परेशान रहते हैं। सड़क से गुजरने वाले लोगों को भी काफी परेशानी होती है। कई बार लोगों ने राख परिवहन से होने वाले समस्या को लेकर पर्यावरण संरक्षण मंडल और जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया है। प्रशासन से परिवहन की निगरानी करने की मांग की है ताकि कंपनियां मनमानी नहीं करें।