CG Paddy Procurement: कोरबा जिले में धान खरीदी अभियान के अंतिम पखवाड़े में भी शासन की अव्यवस्थाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं।
CG Paddy Procurement: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में धान खरीदी अभियान के अंतिम पखवाड़े में भी शासन की अव्यवस्थाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। कस्टम मिलिंग उपार्जन नीति के तहत प्रदेश के कई जिलों में धान रीसाइक्लिंग के मामले सामने आने के बाद मार्कफेड ने समिति स्तर से धान के लोडिंग (उठाव) कार्य पर रोक लगा दी है। इस फैसले का सीधा असर कोरबा जिले सहित पूरे प्रदेश के उपार्जन केंद्रों पर देखने को मिल रहा है।
जैसे ही मार्कफेड के मिलर मॉड्यूल में लोडिंग पर रोक की सूचना प्रदर्शित हुई, राइस मिलर्स और सहकारी समितियों में हड़कंप मच गया। ऑनलाइन गेट पास जारी नहीं होने के कारण शनिवार को किसी भी उपार्जन केंद्र से धान उठाव के लिए वाहन नहीं पहुंच सके। इससे पहले से दबाव में चल रही धान खरीदी व्यवस्था और अधिक संकट में आ गई है।
आकांक्षी जिला कोरबा में इस बदइंतजामी का सबसे ज्यादा असर दिखाई दे रहा है। जिले की 41 समितियों के अंतर्गत संचालित 65 उपार्जन केंद्रों में खरीदा गया 6 लाख 56 हजार 740.40 क्विंटल धान पूरी तरह जाम हो गया है। इस धान की अनुमानित कीमत 151 करोड़ 5 लाख 2 हजार 920 रुपए आंकी गई है।
यदि जल्द धान का उठाव शुरू नहीं हुआ, तो धान के शार्टेज, गुणवत्ता खराब होने और भंडारण स्थल की कमी के कारण खरीदी प्रक्रिया बंद होने की आशंका गहराने लगी है। समितियों के अनुसार कई केंद्रों पर बफर लिमिट से कहीं अधिक धान जमा हो चुका है।
चालू खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में कोरबा जिले को 31 लाख 19 हजार क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य दिया गया था। अब तक 33 हजार 846 किसानों से लगभग 20 लाख 63 हजार 575.20 क्विंटल धान की आवक हो चुकी है। इसमें से करीब 31.72 प्रतिशत धान अब भी उठाव के इंतजार में पड़ा है।
हाथी प्रभावित बरपाली (कोरबा), बरपाली (श्यांग), कुदमुरा, चचिया, सिरमिना, उतरदा, अखरापाली सहित दो दर्जन से अधिक उपार्जन केंद्रों में बफर लिमिट से कहीं अधिक धान जमा हो चुका है। नियमित उठाव की स्थिति में ही शेष किसानों के लिए जगह बन सकती है, लेकिन परिवहन पर लगी रोक ने समितियों को गंभीर संकट में डाल दिया है।
प्रदेश में भाजपा सरकार बनने से पहले किसानों से 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी का वादा किया गया था। बीते दो वर्षों में किसी तरह इन वादों को निभाया गया, लेकिन चालू खरीफ विपणन वर्ष में व्यवस्थाएं चरमराती नजर आ रही हैं। एग्रिस्टैक पोर्टल में पंजीयन, डिजिटल क्रॉप सर्वे, गिरदावरी, सत्यापन और टोकन प्रणाली के बाद अब उठाव पर रोक ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
समितियों और किसानों का कहना है कि यदि शासन स्तर पर जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो इसका सीधा खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ सकता है। समय रहते उठाव शुरू नहीं हुआ, तो धान खरीदी अभियान पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।