महानगरों वाली नशे की लत

नशा नास द्वार है, लेकिन नशे को  संरक्षण हो तो समाज पर पडऩे वाले कुप्रभाव का अंदाजा असानी से लगाया जा सकता है।

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Jul 25, 2016
The addictive like metro
कोरबा.
नशा नास द्वार है, लेकिन नशे को संरक्षण हो तो समाज पर पडऩे वाले कुप्रभाव का अंदाजा असानी से लगाया जा सकता है। ऊर्जा नगरी के युवाओं को महानगरों वाली नशे की लत लगायी जा रही है।

शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में स्कूल कॉलेज के विद्यार्थियों को सॉफ्ट टारगेट बनाया जा रहा है। पहले देशी फिर विदेशी नशे की लत में धकेला जा रहा है। ब्राउन सुगर, हुक्काबार और शराब की जद युवा पीड़ी को बर्बादी की गर्त में फेंंका जा रहा है।

ऊर्जानगरी में नशे के इस खेल की पुष्टि हमारी स्टिंग से होती है। जब सीना ठोंक कर बिचौलिया यह कहता है कि आपको जहां, जितना और जब माल चाहिए हम उपलब्ध करवा देंगे।

जिले में हर साल शराब की खपत बढ़ रही है। एक ओर सरकार दुकानों को लाइसेंस देकर शराब पीला रही है तो दूसरी ओर अवैध शराब की बिक्री भी जोरों पर हैं। शराब ठेकेदार के गुर्गे बिचौलियों के जरिए गांव गांव में शराब बेच रहे हैं। गुर्गे खुद की गाडिय़ों में शराब की बोलते पीने वालों तक पहुंचाते हैं। नशे की जद में युवा पीड़ी ही नहीं किशोर भी आ रहे हैं। पढऩे लिखने और खेलने की उम्र में मंदिरा की ओर बढ़ रहे हैं। यह जिले के लिए गंभीर चिंता का विषय है।


बिचौलियों ने खोली शराब माफिया की पोल

रिपोर्टर : रिपोर्टर- कहां गए भट्ठी वाले?

बिचौलिया : अभी तो आया था माल देकर गया है, फिर कल आयेगा

रिपोर्टर : कितने गांव में शराब पहुंचाते हैं

बिचौलिया : अभी 10 से 15 गांवों में शराब की खेप पहुंचाते हैं। इसमें चन्द्रौटी, तुलबुल और अड़सरा के अलावा इसके आसपास स्थित गांव शामिल हैं।

रिपोर्टर : एक दिन में कितनी और कहां खपत होती है

बिचौलिया : कोई निश्चित नहीं है। सुबह से गाड़ी माल लेकर निकलती है। देर रात तक लौटती है। गाड़ी आती है पुराने कपड़े में माल बांधकर जाती है। सभी ढाबों में शराब पहुंचाई जाती है।

रिपोर्टर : कभी आबकारी विभाग नहीं पकड़ता है?

बिचौलिया : सब सेट हैं। मिल बांटकर खाते हैं।

Published on:
25 Jul 2016 12:24 pm
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