कोरीया

19 मासूमों के साथ स्कूल में हुआ था ये दर्दनाक हादसा, 3 साल बाद हाथ-पैर होने लगे हैं टेढ़े-मेढ़े

3 साल बाद मिल रही अपंगता की शिकायत, बच्चों के परिजनों ने प्रशासन पर लापरवाही बरतने का लगाया आरोप
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Disability in girl child
Disability in girl student

बैकुंठपुर. 3 साल पहले जुलाई के महीने में तेज आवाज के साथ ट्रांसफार्मर पर आकाशीय बिजली गिरी थी। इसका करंट पास ही स्थित प्राइमरी स्कूल के दरवाजे तक पहुंच गई थी। इससे वहां पढ़ रहे 19 बच्चे गंभीर रूप से झुलस गए थे। बच्चों का इलाज तो कराया गया लेकिन लापरवाही भी बरती गई।

रायपुर के डॉक्टरों ने ऑपेरेशन करने की बात कही थी लेकिन प्रशासन द्वारा इतने कम रुपए उन्हें दिए गए थे कि आर्थिक तंगी के कारण बच्चों के परिजन उनका इलाज नहीं करा पाए। अब 3 साल बाद बच्चों में अपंगता की शिकायत मिलने लगी है। उनके हाथ-पैर टेढ़े-मेढ़े होने लगे हैं। मामले में परिजनों ने इलाज कराने में प्रशासनिक लापरवाही बरतने और ३ साल तक कोई सुध नहीं लेने का आरोप लगाया गया है।


कोरिया जिले के भरतपुर विधानसभा के ग्राम पंचायत कछौड़ के संचालित प्राथमिक शाला गुडरूपारा के पास स्थित ट्रांसफार्मर में 8 जुलाई 2015 को भारी बारिश हो रही थी और सुबह 11 बजे अचानक आकाशीय बिजली गिरी थी। इस दौरान स्कूल में भगदड़ की स्थिति निर्मित हो गई थी और स्कूल के बच्चे इधर-उधर भागने लगे थे।

वहीं ट्रांसफार्मर से स्कूल के दरवाजे तक करंट पहुंचने के कारण 19 बच्चे गंभीर रूप से झुलस गए थे। प्राथमिक स्कूल के हेडमास्टर सुरेंद्र सिंह व ग्रामीणों ने आनन-फानन में बच्चों को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मनेन्द्रगढ़ में भर्ती कराया और जिला अस्पताल बैकुंठपुर रेफर कर दिया गया था। इस दौरान तत्काल हर बच्चे को 5-5 हजार रुपए की आर्थिक सहायता राशि दी गई थी और हायर सेंटर में पूरा इलाज कराने का आश्वासन दिया गया था।

लेकिन स्कूली बच्चों की हालत में सुधार होने के बाद प्रशासनिक अमला भूल गया और तीन साल तक हालचाल पूछने तक नहीं पहुंचा। जिससे गरीब परिजन जैसे-तैसे अपने बच्चों का इलाज कराया है। वर्तमान में करंट से झुलसने वाले 19 बच्चे में अपंगता की शिकायत मिलने लगी है।

इतने बच्चे झुलस गए थे
आकाशीय बिजली गिरने के बाद स्कूल तक करंट पहुंचने पर प्राथमिक शाला के 18 बच्चे और आंगनबाड़ी की एक बच्ची झुलस गई थी। इसमें स्कूल के सचिन, कुंजीलाल, सरिता, सुलोचनी, प्रेमवती, रजमतिया, अंजली, पार्वती, नीरज, अमृतलाल, नगीना देवी, अनाकली, दिनेश,

आरती, संत कुमारी, विष्णु, मुकेश, अनिल और आंगनबाड़ी की अंजू शामिल थीं। मामले में तत्कालीन प्रभारी कलक्टर संजीव झा अस्पताल पहुंचकर घायल बच्चों का हाल-चाल जाना और हर बच्चे को ५-५ हजार रुपए आर्थिक सहायता दी थी।


'रायपुर में ऑपरेशन होना था, मदद नहीं मिली'
पीडि़त बच्चों के परिजनों का कहना है कि जिला प्रशासन से कुछ बच्चे को 5 से 10 हजार रुपए दिए गए थे जिससे रायपुर में उसी राशि से इलाज भी करना था और रहने-खाने की व्यवस्था करनी थी। रायपुर के डॉक्टर ने उन्हें ऑपरेशन कराने की बात कही थी, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण बेहतर इलाज नहीं करा पाए।

इसी का नतीजा है कि वर्तमान में बच्चों में अपंगता की शिकायत मिलने लगी है। रायपुर से लौटने के बाद प्रशासन दोबारा झांकने तक नहीं पहुंचा है। वहीं घायल बच्चे उस घटना को याद कर कांपने लग जाते हैं।


जल्द ही कराई जाएगी सर्जरी
घटना की जानकारी है। अगर बेटियों की स्थिति गंभीर है तो मैं खुद जाकर स्थिति को देखकर बच्चियों की सर्जरी जल्द कराई जाएगी। हर संभव आर्थिक सहित प्रशासनिक स्तर पर मदद दी जाएगी।
चंपादेवी पावले, संसदीय सचिव छत्तीसगढ़


हर प्रकार का किया जाएगा सहयोग
मैं इस घटना के बाद कोरिया में आया हूं। आप के माध्यम से जानकारी मिली है। मामले में जानकारी लेकर ही कुछ कह पा संभव होगा। जिला स्तर से हर प्रकार का सहयोग किया जाएगा।
राकेश पाण्डेय, जिला शिक्षा अधिकारी कोरिया

Updated on:
21 Aug 2018 02:57 pm
Published on:
21 Aug 2018 02:57 pm
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