कोरीया

डॉक्टरों ने बनाई दिव्य खीर, कहा- शरद पूर्णिमा के दिन होती है अमृत की वर्षा, ये खीर इस रोग में है काफी फायदेमंद

डॉक्टरों का कहना कि चित्रकुट और अमरकंटक में ही मिलती है यह खीर, इस बार यहां बनाकर खिलाया
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Divya kheer
Ayurveda doctors made kheer

चिरमिरी पोड़ी. जिला आयुर्वेद विभाग के तत्वावधान में शरद पूर्णिमा पर औषधियुक्त खीर बनाकर बांटी गई। इस दौरान डॉक्टरों ने कहा कि यह खीर श्वांस रोग में काफी फायदेमंद है। उन्होंने बताया कि यह दिव्य खीर सिर्फ चित्रकुट और अमरकंटक में ही मिलता है लेकिन इस बार यहां बनाया गया है।

उन्होंने पौराणिक मान्यताओं को बताते हुए कहा कि शरद पूर्णिमा के दिन अमृत की वर्षा होती है और चांदनी रात में खीर बनाकर अद्र्धरात्रि के बाद इसे प्रभावित को वितरित करना होता है।


आयुष विभाग के डॉ एसआर नायक व डॉ यादव के सहयोग से शरद पूर्णिमा की रात्रि को दिव्य औषधियुक्त खीर बनाकर श्वांस, दमा रोगियों को सेवन कराया गया है। आयुष डॉक्टरों का कहना है कि शरद पूर्णिमा की रात मध्य प्रदेश के चित्रकूट व अमरकंटक में श्वंास व अन्य रोगों के लिए वितरित होने वाली औषधियुक्त खीर की हमेशा चर्चा होती थी,

लेकिन दूरी के चलते बहुत से दमा, श्वांस व अन्य रोगी नहीं पहुंच पाते हैं, जिसको देखकर जिला आयुर्वेद विभाग के प्रमुख डॉ एके सिंह व उनके सहयोगी डॉक्टर्स ने वेस्ट चिरमिरी के सरस्वती शिशु मंदिर प्रांगण में जन सहयोग से दिव्य औषधियुक्त खीर बनाने का निर्णय लिया। इस दौरान विशेष बड़े गंज (बर्तन) में देर रात को औषधियुक्त खीर बनाकर मरीजों सेवन कराया गया।

इसमें महिला रोगी भी बड़ी संख्या में मौजूद थी। डॉक्टरों के अनुसार औषधियुक्त खीर का सेवन करने वाले रोगियों के लिए शाम 4 बजे किसी प्रकार की का आहार लेना वर्जित कर दिया जाता है और औषधि के रूप में निर्मित खीर खाने के बाद भी निर्धारित समय तक कुछ सेवन करना प्रतिबंधित रहता है।

कोरिया के वेस्ट चिरमिरी में आयुर्वेद विभाग द्वारा पहली बार आयोजित इस प्रकार के स्वास्थ्य शिविर में खीर का सेवन कर सैकड़ों की संख्या में रोगी लाभांवित हुए हैं। स्वास्थ्य शिविर शशि सिंह, लालदेव, रवि कांत, सतीश पांडेय, गीता प्रसाद, बदरू जमा अंसारी, राम दरस वर्मा आदि उपस्थित थे।


दिव्य औषधियुक्त खीर सिर्फ चित्रकुट-अमरकंट में मिलता है
जिला आयुर्वेद प्रमुख डॉ सिंह के अनुसार औषधियुक्त यह खीर श्वांस रोगों के लिए विशेष रूप से दी जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन अमृत की वर्षा होने के कारण चांदनी रात में इसका निर्माण करअद्र्धरात्रि के बाद इसे प्रभावित लोगों में वितरित किया जाता है।

औषधि युक्त इस खीर का सेवन करने वाले रोगी जहां श्वांस रोगों से आराम पाते हैं। वहीं अन्य स्वस्थ लोग जो इसका सेवन करते हैं, उनका रोगों से बचाव भी होता है। औषधि लेने के पहले रोगियों का निराहार होना अति आवश्यक है, यहां तक कि फलाहार भी लेना वर्जित होता है।

आयुर्वेद की यह परंपरा प्राचीन चरक संहिता के काल से प्रचलित है। इस प्रकार के औषधियुक्त खीर का वितरण मात्र चित्रकूट व अमरकंटक में ही होता रहा है। पहली बार वेस्ट चिरमिरी में इस प्रकार के औषधियुक्त खीर का निर्माण किया गया है।

Published on:
26 Oct 2018 08:25 pm
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