कोटा

कोटा : 18 वर्षीय NEET छात्र युवराज लापता, मोबाइल फोन हॉस्टल में ही छोड़ा

राजस्थान के कोटा में एक 18 वर्षीय कोचिंग छात्र लापता हो गया है। लापता छात्र युवराज एक निजी कोचिंग में NEET मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा है।
2 min read
Feb 18, 2024
neet_student_yuvraj_missing_in_kota.jpg

राजस्थान के कोटा में एक 18 वर्षीय कोचिंग छात्र लापता हो गया है। घटना हाल ही में लापता हुई छात्रा के महज एक हफ्ते बाद हुई है। सीकर जिले का रहने वाला छात्र युवराज वर्तमान में एक निजी कोचिंग सेंटर में NEET मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा है। शनिवार को युवराज कोटा के ट्रांसपोर्ट नगर इलाके में स्थित हॉस्टल से सुबह करीब 7 बजे कोचिंग सेंटर जाने के लिए निकला था। उसके बाद से उसका पता नहीं चल पाया है। युवराज अपना मोबाइल फोन हॉस्टल में ही छोड़ गया था। हॉस्टल संचालक ने छात्र के गुमशुदगी का मामला नजदीकी पुलिस स्टेशन में दर्ज कराया है। पुलिस जांच में जुटी है।

एक हफ्ते पहले भी एक ऐसी ही घटना आई सामने

यह घटना कोटा से एक अन्य छात्र रचित सोंध्या के गायब होने के महज एक हफ्ते बाद हुई है। जेईई के लिए 16 वर्षीय अभ्यर्थी सोंध्या भी अपना छात्रावास छोड़ने के बाद गायब हो गई। उनके आखिरी रिकॉर्ड किए गए फुटेज में उन्हें कोटा के एक जंगली इलाके में प्रवेश करते हुए दिखाया गया है।

पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश की रहने वाली सोंध्या नियमित परीक्षा में शामिल होने के लिए जवाहर नगर पुलिस स्टेशन स्थित अपने छात्रावास के कमरे से निकली थी। सीसीटीवी फुटेज में उसे कैब लेते हुए कैद किया गया है, और पुलिस के बयानों के अनुसार, उसे आखिरी बार गराडिया महादेव मंदिर से वन क्षेत्र में प्रवेश करते देखा गया था।

सोमवार देर शाम पुलिस को मंदिर के पास सोंध्या का बैग, मोबाइल फोन, कमरे की चाबियां और अन्य सामान मिला। पुलिस और एसडीआरएफ टीमों के लगातार तलाश प्रयासों के बावजूद किशोरी का पता नहीं चल सका है।

20 दिनों में 4 सुसाइड के मामले

उल्लेखनीय है कि कोटा पुलिस के लिए कोटा में तमाम प्रयासों के बावजूद आत्महत्या जैसे मामले में सुधार करने में प्रशासन असमर्थ नजर आ रहा है। हाल के बीस दिनों में 4 सुसाइड के मामले सामने आ चुके हैं। हाल में, जेईई की तैयारी करने वाले छत्तीसगढ़ निवासी कोचिंग छात्र 17 वर्षीय शुभम चौधरी ने पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली।

छात्रों की मानसिक परेशानी दूर करने और उन्हें मोटिवेट करने के लिए प्रशासन द्वारा 'कामयाब कोटा' और 'डिनर विद कलेक्टर' जैसी पहल की गई है। बावजूद इसके कोटा में छात्र आत्महत्या के मामले रुकने का नाम नहीं ले रहे।

Updated on:
18 Feb 2024 03:27 pm
Published on:
18 Feb 2024 03:21 pm