कोटा दशहरा मेला शुरू होते ही जेबकट और महिला चोर गिरोह सक्रिय हो गए हैं। इस काम के लिए बाहरी राज्यों से भी चोर आए हैं।
कोटा पुलिस ने रविवार रात मेले में एक महिला का पर्स चोरी करते तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया है। थानाधिकारी घनश्याम मीणा ने बताया कि उदयपुर निवासी एक महिला रविवार शाम परिवार समेत घूमने आई थी। इसी दौरान महिला बाजार से किसी ने उनका पर्स चोरी कर लिया। इसकी भनक लगते ही महिला ने पुलिस को जानकारी दी। सादा वस्त्रों में तैनात महिला पुलिस कर्मियों ने पर्स चुराने वाली महिलाओं को साजीदेहड़ा की तरफ जाते हुए रोका। तलाशी ली तो उनके पास से पर्स बरामद हो गया। इसमें महंगा मोबाइल, एटीएम कार्ड व नकदी थी। पुलिस ने बालिता रोड कुन्हाड़ी स्थित डेरे में रहने वाली ज्योति बावरी, रेशमा बावरी व पूनम बावरी को गिरफ्तार कर लिया। उन्हें सोमवार को अदालत में पेश करने पर सभी को जेल भेज दिया।
1100 पुलिस कर्मियों का जाप्ता लगाया
दशहरा मेले के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने व अपराधों पर रोकथाम के लिए मेले में करीब 1100 पुलिस कर्मियों का जाप्ता लगाया गया है। एसपी अंशुमान भौमिया ने दशहरा मैदान स्थित नगर निगम के पुराने भवन में मेला थाने की शुरुआत की। इस दौरान एएसपी अनंत कुमार व उमेश ओझा और उप अधीक्षक बनेसिंह मीणा समेत कई पुलिस अधिकारी मौजूद थे। एसपी ने बताया कि मेले में आरएसी की 4 कम्पनियां और करीब 700 पुलिस कर्मी व होमगार्ड के जवान तैनात किए हैं। साथ ही, झूला बाजार व महिला बाजार समेत सभी प्रगुख बाजारों में पुलिस चौकियां खोली गई हैं।
पहले तम्बू गाड़े, अब उखाड़े
कोटा राष्ट्रीय दशहरा मेले में दुकानों के आवंटन को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। निजी संस्थाओं की ओर से लगाई जाने वाली प्रदर्शनियों का आवंटन निरस्त कर दिया है। चेतावनी के बाद भी तम्बू नहीं हटाने पर निगम प्रशासन ने सोमवार को सख्ती बरतते हुए तम्बू उखाड़ दिए। यह जगह कच्ची दुकानों के लिए आवंटित की जाएगी, इसका चिह्नीकरण किया जा रहा है। मेले में निर्माण कार्य के कारण इस बार सड़क किनारे छोटे दुकानदारों को जगह नहीं मिल पा रही है। इस कारण अभी तक उनकी रसीदें भी नहीं काटी गई हैं।
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विरोध पर उतरे लोग
आयुक्त डॉ. विक्रम जिंदल ने पिछले दिनों मेले का निरीक्षण करने के दौरान सरकारी विभागों, धार्मिक व रेलवे की प्रदर्शनी को छोड़कर अन्य प्रदर्शनी स्थल का आवंटन निरस्त करने के निर्देश दिए थे। प्रदर्शनी संचालकों का कहना था कि उन्होंने निगम से रसीदें कटवा ली और टेंट लगा दिए। इस पर 8 से 10 हजार रुपए खर्च हो गए। अब बिना कारण आवंटन निरस्त करना उचित नहीं है। उन्होंने टेंट नहीं हटाए।