Kota Mandi Update: किसान धान व अन्य जिन्स मंडी में बेचने आ रहे हैं, उन्हें सर्द रातें भी खुल आसमान के नीचे गुजारनी पड़ रही है। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों व ट्रकों में भरे अनाज की रखवाली के लिए किसार रात भर सड़कों पर ही सो रहे हैं। यही खाना बनाकर पेट भर रहे हैं।
Bhamashah Mandi News: भामाशाहमंडी में उपज बेचने के लिए किसानों को लबा इंतजार करना पड़ रहा है। आवक अधिक होने के कारण मंडी में एंट्री बंद हैं। जो किसान धान व अन्य जिन्स मंडी में बेचने आ रहे हैं, उन्हें सर्द रातें भी खुल आसमान के नीचे गुजारनी पड़ रही है। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों व ट्रकों में भरे अनाज की रखवाली के लिए किसार रात भर सड़कों पर ही सो रहे हैं। यही खाना बनाकर पेट भर रहे हैं।
किसानों की पीड़ा जानने के लिए बुधवार रात को पत्रिका टीम भामाशाहमंडी पहुंची तो पांच सौ से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉली और ट्रकों की करीब एक किमी लबी कतार लगी हुई थी। किसान सर्द रातों में ट्रॉली के ऊपर ही रजाई व कबल ओढ़कर सो रहे थे। किसानों ने बताया कि दो दिन में नंबर आ रहा है।
ट्रकों में माल रखा होने के चलते किसानों को ही उसका किराया भुगतना पड़ता है। दो से तीन दिन का अतिरिक्त किराया किसान को देना पड़ता है। दूसरी तरफ जाम के चलते छोटे किसान परेशान होते हैं। ट्रैक्टर ट्रॉली में से माल चोरी होने का खतरा रहता है। सुरक्षा के लिए भी परिजनों को लाना किसान की मजबूरी हो जाता है।
किसानों ने बताया कि मंडी के बाहर 24 घंटे से भी ज्यादा समय से इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में ट्रक चालक साथी चालकों के पास जाकर बैठ जाते हैं। इसके बाद उनके ट्रकों से टूल बॉक्स से भी सामान गायब हो जाते हैं। ट्रक चालकों का कहना है कि एक तरफ से लाइन क्लियर करने के चलते बाद में आने वाले कई वाहन भी अंदर पहले चले जाते हैं। प्रशासन को सही व्यवस्था करनी चाहिए।
हम लोग दोपहर 3 बजे से भामाशाह मंडी में आए हुए हैं। यहां ढ़ाबा संचालकों के द्वारा अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक पैसा लिया जा रहा है। इसके साथ ही यहां पर पीने के पानी की भी व्यवस्था नहीं है।
बलबिंदर, अजय चौधरी, गोपालपुरा गांव
एक ट्रॉली के साथ में दो लोग आते हैं। ऐसे में अब खाने पीने का सामान भी नहीं लेने जा सकते हैं, क्योंकि यहां पर मंडी प्रशासन की ओर से सुरक्षा की व्यवस्था नहीं है। अपने सामान की खुद को ही सुरक्षा करनी पड़ रही है।
धर्मराज, महावीर प्रहलादपुरा
सोचा था - फसल बेचने का नंबर जल्दी आ जाएगा। ऐसे में बच्चे को भी साथ में लेकर आ गए है, लेकिन यहां पर ना तो सर्दी से बचने के लिए कुछ है ना ही भोजन की व्यवस्था है। ऐसे में बच्चे को खुले आसमान के नीचे सुलाना मजबूरी बना हुआ है।