
कोटा. राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम लि. (आरवीयूएनएल) में उल्टी गंगा बह रही है। कोटा थर्मल को तबाह करने वाले अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय निगम उन्हें पदोन्नति का तोहफा देने में जुटा है। तबाही के बदले मिली तरक्की पर सीएमडी से लेकर ऊर्जा मंत्री तक ने चुप्पी साध ली है।
कोटा थर्मल सुपर पॉवर प्लांट (केएसटीपीएस) की साख पर पिछले दो साल से एक के बाद एक बट्टा लगता जा रहा है। कोटा थर्मल के आला अफसरों ने बॉटम एश के आवंटन के आवेदनों को दबाकर एश पोंड पर अवैध कब्जे करवा दिए।
जब बात कार्रवाई की आई तो आंखें मूंद ली। प्लांट में कभी ट्रिपलर गिरता है तो कभी कोल क्रेशर में आग लगती है। यूनिटों को आए दिन शटडाउन दे दिया जाता है। जिन्हें दुबारा लाइट अप करने में लाखों रुपए फूंक दिए जाते हैं। ऐसी दर्जनों खामियों पर आंख मूंद लेने का नतीजा यह हुआ कि आरवीयूएनएल ने कैग की इन्वायरमेंट ऑडिट तक पर ध्यान नहीं दिया।
नतीजन तीन साल तक कोटा थर्मल का अवैध संचालन होता रहा और जब हालात नहीं सुधरे तो सातवीं इकाई की संचालन सहमति रद्द कर दी गई। बाकी 6 यूनिटों पर फैसला भी जल्द ही आने वाला है।
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कार्रवाई के बजाय दे दी तरक्की
आरवीयूएनएल ने इन तमाम खामियों को नजरंदाज कर दिया और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उल्टा उन्हें तरक्की दे दी। निगम के संयुक्त निदेशक आलोक शर्मा ने 18 जून को आदेश जारी कर कोटा थर्मल के एडीशनल चीफ इंजीनियर हरि बाबू गुप्ता को पदोन्नति देने के आदेश जारी कर दिए। इतना ही नहीं निगम ने उन्हें कोटा थर्मल में ही चीफ इंजीनियर के पद पर तैनात किया है।
साधी चुप्पी
कार्रवाई के बजाय एडीशनल चीफ इंजीनियर को पदोन्नति का तोहफा देने पर जब ऊर्जा मंत्री पुष्पेंद्र शेखावत और निगम के सीएमडी एनके कोठारी से बात की गई तो उन्होंने पूरे मामले में चुप्पी साध ली।
अभियंताओं ने किया प्रदर्शन
आरवीयूएनएल में अभियंताओं के 135 पदों की कटौती किए जाने से नाराज थर्मल इंजीनियर एसोसिएशन ऑफ राजस्थान से जुड़े अभियंताओं ने कोटा थर्मल में प्रदर्शन कर इस फैसलों को वापस लेने की मांग की। अभियंताओं ने कहा कि इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल विंग ही उत्पादन निगम की रीढ़ है। इसे तोड़कर पॉवर प्लांट कैसे चलाए जा सकते हैं।