
कोटा. पशुपालन विभाग का पूरा लवाजमा इन दिनों चार नस्ल बकरे-बकरियों के पीछे पड़ा है। गांव-ढाणी जहां कहीं ये दिख रहे, इन समेत पशुपालक का बायोडाटा एकत्र कर रहे। वजह है पशुपालन विभाग की सालभर पहले बनाई गई एक योजना, जिसकी फाइल से हाल ही अचानक धूल झड़ गई। हालांकि गुजरे दो-तीन दिन में विभाग एक भी वांछित बकरे-बकरी तक नहीं पहुंच पाया।
दरअसल, प्रदेश की जलवायु में रचने- बसने वाली चार नस्ल (जमुनापारी, सिरोही, मारवाड़ी, जखराना) के बकरे, बकरियों की संख्या व पशुपालकों को सूचीबद्ध करने की पशुपालन विभाग ने सालभर पहले योजना बनाई थी। वजह थी इन्हें एक प्लेटफॉर्म पर लाना। और, टाडा-माडा क्षेत्रों समेत विभिन्न योजनाओं में सरकारी अनुदान से बकरा-बकरी खरीद में इनको चैनल में लाना। लेकिन, वक्त के साथ निदेशालय में योजना फाइलों में खो गई। सालभर बाद अधिकारियों की उस कागज पर निगाह पड़ी तो अब आनन-फानन में निदेशालय ने सभी संभाग, जिलों में अतिरिक्त निदेशक, संयुक्त निदेशकों को आदेश दिए कि जिस भी पशुपालक के पास इन चारों नस्लों के बकरे बकरियां हों, उसका बायोडाटा तैयार किया जाए।
घर-घर ढूंढ रहे बकरे-बकरियां
आदेश मिलते ही पशुपालन विभाग अधिकारियों, चिकित्सकों, पशुधन परिचरों की भागदौड़ शुरू हो गई। गांव-ढाणियों में पशुपालकों के घर-घर जाकर जमुनापारी, सिरोही, मारवाड़ी व जखराना नस्ल के बकरे-बकरियां ढूंढने में लगे हैं। बायोडाटा एकत्र कर रहे हैं। विभाग पशुपालकों से अपील भी कर रहा कि इन नस्ल के बकरे-बकरियों का नजदीकी पशु चिकित्सक से सत्यापन कराएं, पंजीयन कराएं।
अब यूं आई याद
विभाग की 'एनएलएम', 'टाडा', 'माडा', 'बिखरी-आबादी', 'आरएसीपी' आदि योजनाओं के तहत भविष्य में बकरा-बकरी बेचने के लिए पशुपालकों से आवेदन आमन्त्रित किए गए हैं। जिन पशुपालकों के पास उक्त नस्ल के प्रजनन क्षमता वाले 3 बकरे और 30 बकरियां हों तो वे 30 जून तक पशुपालन विभाग में आवेदन कर सकते हैं। स्वत: आए आवेदन और विभाग द्वारा एकत्र डाटा से नाम, सूची को बाद में विभाग के पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। भविष्य में विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत अन्य पशुपालकों को बकरा-बकरी देना हो तो इन पशुपालकों से खरीद कर दिया जा सकेगा।
करेंगे लाभांवित
पंजीयन और डाटा एकत्रीकरण से तैयार चारों नस्ल के बकरे-बकरियों और पशुपालकों की सूची विभाग के पोर्टल पर अपलोड की जाएगी। सरकारी अनुदान पर बकरे-बकरियां खरीदने वाले पशुपालक इन पंजीकृत पशुपालकों से सम्पर्क कर सकेंगे।
-डॉ. रामगोप मीणा, संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग