22 अक्टूबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

‘भगवान इनकी जगह मुझे उठा लेता’, फफककर बोली राहुल की पत्नी; कोटा नाव हादसे में बुझ गए 4 घरों के चिराग

कोटा जिले में दशहरा मेला के दौरान मूर्ति विसर्जन करते समय नाव पलटने से चार युवकों राहुल, सूरज सिंह, विकास और यश जोशी की डूबने से मौत हो गई। करीब 18 घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद शवों को बाहर निकाला गया। इस घटना से परिजनों में कोहराम मच गया और क्षेत्र में मातम पसर गया।
5 min read
Google source verification

कोटा

•

image

Arvind Rao

•

Oct 22, 2026

kota boat tragedy

फफकती हुई राहुल की पत्नी किरण और शव मिलने के बाद शोक जताती मृतक की परिजन (पत्रिका फोटो)

Kota Boat Incident During Immersion: त्योहार की खुशियां मनाने निकले युवकों को शायद अंदाजा भी नहीं था कि दशहरे का दिन उनके परिवारों के लिए जिंदगी का सबसे दर्दनाक दिन बन जाएगा। कोटड़ी दाई मुख्य नहर में मूर्ति विसर्जन के दौरान नाव पलटने से चार युवकों की जिंदगी पानी में समा गई। बुधवार सुबह करीब 18 घंटे बाद जब एक-एक कर उनके शव बाहर निकाले गए, तो अपनों के लौटने की उम्मीद लगाए बैठे परिवारों का इंतजार मातम में बदल गया। हादसे में एक ही परिवार के दो चचेरे भाइयों की मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया। किसी ने अपना इकलौता बेटा खो दिया, तो किसी की नई-नवेली गृहस्थी उजड़ गई। नहर किनारे अपनों के शव देखकर परिजनों का विलाप थमने का नाम नहीं ले रहा था।

इधर जन्मदिन की पार्टी की तैयारी चल रही थी, उधर नियति को कुछ और ही मंजूर था

हादसे में जान गंवाने वाले यश जोशी के घर में जन्मदिन मनाने की तैयारी चल रही थी। 17 अक्टूबर को तबीयत खराब होने के कारण उसका जन्मदिन नहीं मनाया जा सका था। ऐसे में दशहरे के दिन घर पर केक काटने की तैयारी थी। दोस्तों के साथ बाहर होटल में खाना खाने का भी कार्यक्रम था। यश ने अपने दोस्तों को भी पार्टी में शामिल होने के लिए कह दिया था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

दशहरे की शाम यश अपने पिता और साथियों के साथ माताजी की प्रतिमा विसर्जित करने के लिए दाई मुख्य नहर पर पहुंचा। वह नहर की दीवार पर पिता के साथ बैठा था। इसी दौरान साथियों ने उसे माताजी की प्रतिमा नाव में रखने के लिए बुलाया और नाव में बैठने को कहा। यश को तैरना नहीं आता था और उसे पानी से डर भी लगता था। इसलिए उसने नाव में बैठने से मना कर दिया, लेकिन साथियों के कहने पर वह नाव में बैठ गया। कुछ ही देर बाद हुए हादसे ने परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया।

अपने परिवार का लाडला था सूरज

सूरज के पिता जगदीश और परिजन रेस्क्यू अभियान शुरू होने से पहले ही नहर किनारे पहुंच गए थे। उनकी निगाहें लगातार नहर पर टिकी थीं। वे बार-बार आसमान की ओर देखकर भगवान से सूरज की सलामती की दुआ कर रहे थे। सूरज की बहन राधा भी वहीं खड़ी थी। उधर, सूरज के दोस्त नहर के पास सड़क पर उम्मेदगंज तक उसकी तलाश में जुटे थे। इसी बीच सुबह करीब 9:30 बजे सूरज का शव बाहर निकाला गया। शव देखते ही राधा की चीख निकल पड़ी। उसके विलाप से पूरा घाट गूंज उठा। बेटे का शव देखकर पिता जगदीश का सब्र भी टूट गया। वहां मौजूद लोगों ने उन्हें ढांढस बंधाने की कोशिश की, लेकिन अपनों को खोने का गम इतना गहरा था कि किसी के पास उन्हें सांत्वना देने के लिए पर्याप्त शब्द नहीं थे।

भगवान इनकी जगह मुझे उठा लेता…

खेड़ारामपुर निवासी विकास वर्मा उर्फ सुमन दशहरा मेला देखने के लिए पत्नी किरण के साथ निकला था। रास्ते में वह संजय नगर स्थित अपने रिश्तेदार के यहां मिलने चला गया। वहां मोहल्ले में माताजी की प्रतिमा स्थापित की गई थी। दशहरा मेला शुरू होने में समय था, इसलिए वह भी रिश्तेदार के साथ प्रतिमा विसर्जन के लिए नहर पर पहुंच गया। वह नाव में बैठकर प्रतिमा विसर्जन के लिए गया, लेकिन हादसे में उसकी जान चली गई।

विकास की पत्नी किरण देर रात तक नहर किनारे बैठी रही। बाद में रिश्तेदार बड़ी मुश्किल से उसे समझाकर घर ले गए। अगले दिन जब उसने एंबुलेंस में पति का शव देखा, तो उसका विलाप सुनकर आसपास मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। वह रोते हुए बार-बार कह रही थी, "हे भगवान! इनकी जगह मुझे ही उठा लेता।" यह कहते हुए वह बेसुध हो गई। विकास और किरण की शादी को अभी महज तीन महीने ही हुए थे। लव मैरिज के बाद दोनों ने साथ मिलकर नई जिंदगी शुरू की थी, लेकिन इस हादसे ने किरण के सपनों को बिखेर दिया।

मेरे सामने ही डूब गया मेरा बेटा, कुछ न कर सका

बुधवार सुबह जैसे ही रेस्क्यू टीम ने यश का शव बाहर निकाला, उसके पिता बबलेश फफक-फफक कर रो पड़े। बेटे का शव मिलने की खबर के साथ ही उनकी रही-सही उम्मीद भी टूट गई। परिजनों और पड़ोसियों को उन्हें ढांढस बंधाने के लिए शब्द नहीं सूझ रहे थे। रोते हुए बबलेश ने कहा, "मेरा बेटा पानी में नहीं जाना चाहता था, लेकिन उसके साथी उसे ले गए। नाव पलटने से मेरी आंखों के सामने ही मेरा बेटा डूब गया और मैं कुछ नहीं कर सका।" यश एक ऑयल कंपनी की टेस्टिंग लैब में कर्मचारी था।

साथियों को पता था राहुल को तैरना आता है, यही बन गई डूबने की वजह

इस हादसे में सबसे दर्दनाक कहानी राहुल जोशी की है। राहुल को तैरना आता था और उसके साथियों को भी इस बात की जानकारी थी। नाव पलटने के बाद जब युवक पानी में डूबने लगे, तो उन्हें उम्मीद थी कि राहुल उन्हें बचा लेगा। इसी भरोसे में कुछ साथियों ने उसे पकड़ लिया, लेकिन नहर का तेज बहाव और पानी से बाहर निकलने की जद्दोजहद इतनी मुश्किल थी कि राहुल खुद को भी नहीं संभाल सका। तैरना आने के बावजूद वह डूब गया। राहुल अपने घर का इकलौता बेटा और चार बहनों का लाड़ला भाई था। जिस घर में कभी राहुल की हंसी गूंजती थी, वहां अब मातम पसरा है। बेटे को खोने के गम में पिता महेंद्र की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे।

परिजनों को मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष से 5-5 लाख मिलेंगे

नाव पलटने से चार युवकों की मौत के मामले में बुधवार को परिजनों और पड़ोसियों ने मुआवजे की मांग को लेकर एमबीएस चिकित्सालय में मोर्चरी के बाहर धरना दिया और सड़क जाम कर दी। इस दौरान उन्होंने नारेबाजी कर विरोध जताया। प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने समझाइश की और उचित मुआवजे का आश्वासन दिया। इस पर परिजन शांत हुए। पुलिस ने पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिए।

जिला कलक्टर पीयूष समारिया ने बताया कि विसर्जन के दौरान हादसे में जान गंवाने वाले चारों युवकों के परिजनों को मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष से 5-5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। इधर, नहर में रेस्क्यू ऑपरेशन की कमान एडीएम सिटी विनोद मल्होत्रा ने संभाली। एसडीआरएफ निरीक्षक एकता हाड़ा, बोरखेड़ा थाना प्रभारी अजीत बागडोलिया समेत पुलिस और रेस्क्यू दल मौजूद रहा। रेस्क्यू ऑपरेशन में मछुआरों की भी मदद ली गई।

धारीवाल ने जताया दुख

नहर में डूबने से चार युवकों की मौत पर पूर्व मंत्री एवं विधायक शांति धारीवाल ने दुख जताया। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए राज्य सरकार से पीड़ित परिवारों को उचित आर्थिक सहायता देने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह हादसा बेहद दुखद है और इससे परिवारों को अपूरणीय क्षति हुई है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विसर्जन स्थलों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की। उन्होंने नहरों और जलाशयों पर पर्याप्त निगरानी रखने तथा बचाव संसाधन उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया।