
कोटा . सामूहिक विवाह सम्मेलनों ( samuhik vivah sammelan ) में सात फेर लेने वाले जोड़ों को कितना फायदा है यह तो जग जाहिर है। जहां सम्मेलनों में नि:शुल्क या बहुत ही कम राशि में विवाह हो जाता है, वहीं सरकार भी जोड़ों को अनुदान ( anudan yojana ) देती है। लेकिन अनुदान मिलना विवाह सम्मेलनों के संचालकों व नव दम्पतियों के लिए टेड़ी खीर साबित हो रहा है।
महिला अधिकारिता विभाग के आंकड़ों पर ही नजर डाले तो कम से कम 1 हजार जोड़ों का अनुदान गत दो साल से अटका हुआ है। विभिन्न समाज की संस्थाओं व जोड़ों को इस अनुदान का इंतजार है। सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2017 में महज दो संस्थाओं को अनुदान मिला था। दर्जनों संस्थाओं व जोड़ों का अनुदान बकाया चल रहा है। आयोजक संस्थाओं के मुताबिक अनुदान लेना किसी झंझट के कम नहीं, ऐसे में कई संस्थाएं तो आवेदन हीं नहीं करती।
यह मिलता है अनुदान
महिला एवं अधिकारिता विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार किसी संस्था द्वारा कम से कम 10 जोड़ों का सामूहिक विवाह करने पर जोड़ों को अनुदान दिया जाता है। सम्मेलन में विवाह पर प्रति जोड़े को 18 हजार का अनुदान सरकार देती है। इसमें 15 हजार दुल्हन को व 3 हजार संस्था को प्रोत्साहन के रूप में दिए जाते हैं।
एक नजर आंकड़ों पर
वर्ष-2017-18 में महिला अधिकारिता विभाग के पास करीब 59 संस्थाओं के आवेदन मिले। इनमें से महज दो संस्थाओं को ही विवाह अनुदान मिला। जबकि 20 आवेदन निरस्त हो गए। वर्ष 2018-19 में 60 फाइलें आईं। इनमें से 15 फाइलें ही प्रक्रियाधीन है। जबकि कुछ फाइलों में कमियां पाई गई हैं। कई संस्थाओं को तो इससे पहले आयोजित सम्मेलनों का अनुदान तक नहीं मिला है।
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नियमों की जटिलता
संभागीय मेघवाल विकास समिति के अध्यक्ष धन्नालाल मेघवाल बताते हैं कि वर्ष 2017 व 2018 में आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन का संस्था व जोड़ों को अनुदान नहीं मिला। नियमों की जटिलता भी बड़ी समस्या है। कई बार बजट नहीं होने की बात कही जाती है।
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खानापूर्ति करना मुश्किल
डबूकड़ा देवनारायण मंदिर सेवा समिति के राजेश बौड़ बताते हैं कि वह 2014 से लगातार सम्मेलन कर रहे हैं। अनुदान आज तक नहीं मिला। वहीं माली समाज की समितियों के पदाधिकारी रहे देवकरण सुमन का कहना है कि अनुदान के लिए इतनी खानापूर्ति है कि इसे पूर्ण करना ही मुश्किल है। इससे कई संस्थाओं के आवेदन निरस्त हो जाते हैं।
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कई चक्कर लगाए, नहीं मिला
दशनाम गोस्वामी समाज नवयुवक मंडल समिति के अध्यक्ष हंसराज गोस्वामी ने बताया कि उन्होंने 2009 से 2013 तक कई समाज के सामूहिक विवाह करवाए पर कभी अनुदान नहीं उठाया। इस वर्ष भी सम्मेलन हो रहा है। जटिल प्रक्रियाओं व बार-बार के चक्करों के चलते संस्थाएं अनुदान के लिए आवेदन करने से ही कतराती हैं।
प्रक्रिया जारी है
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अनुदान के लिए प्राप्त आवेदनों के आधार पर सहीं पाए गए आवेदक संस्थाओं को अनुदान देने की प्रक्रिया जारी है। जिन आवेदनों में कमियां नहीं पाई गई उन्हें जल्द अनुदान मिलेगा। आचार संहिता के कारण भी कार्य प्रभावित रहा।
मनोज मीणा, उपनिदेशक, महिला अधिकारिता विभाग