दस साल बाद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर 16 कलाओं से परिपूर्ण चांद दिखाई देगा। ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक इस दौरान सर्वार्थ सिद्धि योग पर अमृत बरसेगा।
शास्त्रों के अनुसार चंद्रमा की इस दिन 16 कलाएं खिलती है जिनमें औषधीय गुण माने हैं। ज्योतिषाचार्य अमित जैन के अनुसार 10 साल बाद इस दिन गुरुवार और रेवती नक्षत्र का संयोग बना है। इससे पहले 2007 में ऐसा योग ? बना था और इसके बाद वर्ष 2024 में ऐसा संयोग बनेगा।
5 अक्टूबर को आश्विनी मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन शरद पूर्णिमा महोत्सव मनाया जाएगा। इस बार पूर्णिमा तिथि सूर्योदय से मध्य रात्रि 12.10 बजे तक रहेगी। स्वार्थ सिद्धी योग रात्रि 8.50 से अगले दिन
सूर्योदय तक होगा। इस दिन चंद्रमा पूरा नजर आने से इसे महापूर्णिमा भी कहते हैं।
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मिलेगी सुख-समृद्धि
ज्येातिष शास्त्र के अनुसार चंद्रमा को मन का कारक माना है। इस रात्रि में पूजा, पाठ, हवन, भगवान को खीर का भोग लगाने का महत्व है। मान्यता है कि इस दिन माता लक्ष्मी रात्रि में पृथ्वी पर विचरण करती है। जो जाग रहा होता है और लक्ष्मी का पाठ-पूजन करता है उससे लक्ष्मी प्रसन्न होती है।
प्रत्यक्ष है चंद्रमा
नवग्रहों में हम सूर्य और चांद को ही देख सकते है। चंद्रमा को प्रत्यक्ष देव माना है। समुद्र मंथन से निकले 14 रत्नों में से एक चंद्रमा को मानते हैं। इस दिन लोग रात्रि में खीर बनाकर भगवान विष्णु को भोग लगाते है। खीर
को खुली चांदनी में रखा जाता है। जिससे औषधि गुण वाली चंद्रमा की किरणें मिलती है। इन किरणों से अमृत बरसता है। इस दिन मंदिरो में पूजा पाठ, हवन, भजन संध्या, लक्ष्मी पाठ कीर्तन, जागरण होते हैं।
यह हैं चंद्रमा की 16 कलाएं
अमृता-अमृत बरसाने वाली
मानदा-मान-प्रतिष्ठा कारक
पूषा-भरण-पोषण करने वाली
पुष्टि-सुख-समृद्धि
रति-खुखी प्रदान करने वाली
धृति-उत्तम स्वास्थ्य।
शशिन-प्रकाश दाता
चंद्रिका-राज्य पक्ष देने वाली
क्रांति-प्रबल आत्मविश्वास
ज्योत्सना-बुराई से अच्छाई
श्री-धन देने वाली
प्रीति- स्नेहदायक
अगंदा-क्षय रोगों का नाश
पूर्णा-सिद्धि दायक
पूर्णामता-विजय देने वाली
तुष्टि-सौभाग्य दायक