कोटा

अब खून की कमी से नहीं अटकेगा प्रसव, गर्भवती को बिना रिप्लेस मिलेगा रक्त

Aug 02, 2026
Rajasthan

आदेशों के बाद जिला ब्लड सेंटर ने बढ़ाई तैयारी, सहरिया और जरूरतमंद महिलाओं को मिलेगा विशेष लाभ


बारां. प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव से जूझने वाली गर्भवती महिलाओं के लिए सरकार की ओर से राहत भरी पहल की गई है। अब गंभीर स्थिति में गर्भवती महिलाओं को रक्तदाता उपलब्ध कराए बिना भी रक्त और रक्त अवयव मिल सकेंगे। राजस्थान राज्य रक्त संचरण परिषद की ओर से हाल ही में दिए गए इस तरह के निर्देशों के बाद बारां जिला ब्लड सेंटर ने भी रक्त भंडार पर्याप्त रखने के प्रयास तेज कर दिए हैं। इससे जिरूरतमंद प्रसूताओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। यह सारी कवायद गर्भवती महिलाओं की मृत्यु दर में कमी लाने को लेकर की जा रही है।



सहयोग रहा तो नहीं परिजनों की चिंता

प्रसव के दौरान कई बार अचानक अत्यधिक रक्तस्राव होने से तत्काल रक्त की आवश्यकता पड़ जाती है। कई मामलों में रक्तदाता नहीं मिलने या परिजनों के रक्तदान के लिए आगे नहीं आने से उपचार में देरी की आशंका रहती है। जान पर संकट की नौबत तक आ जाती है। जिले के सहरिया बहुल व दूरदराज क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं के सामने समय पर रक्त की व्यवस्था करना अधिक चुनौतीपूर्ण होता है। नए आदेश से ऐसी महिलाओं को समय पर रक्त उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।



शिविर बढ़ाकर रखेंगे पर्याप्त भंडार

निर्देशों के बाद जिला ब्लड सेंटर ने स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने, रक्तदाताओं से समन्वय करने और शिविर आयोजित करने की तैयारी शुरू कर दी है। दुर्लभ रक्त समूह वाले रक्तदाताओं की सूची भी तैयार कर ली गई। इससे आपात स्थिति में तत्काल रक्त उपलब्ध कराया जा सकेगा। इसका उद्देश्य यह है कि किसी भी गर्भवती या प्रसूता का उपचार रक्त की कमी के कारण प्रभावित नहीं हो।



निर्देशों की पालना में रक्त भंडार पर्याप्त रखने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। वैसे यहां 165 थैलेसीमिया बच्चों, दुर्घटना में घायलों और लाइफ सेविंग केस के मरीजों को नियमित रक्त की जरूरत रहती है। सहरिया जनजाति बाहुल्य होने से चैरिटी रक्त की मांग अधिक है। संस्थाओं से सरकारी ब्लड सेंटर में रक्तदान शिविर लगाने की अपील है।

-डॉ. बिहारीलाल मीणा, प्रभारी, जिला ब्लड सेंटर, जिला अस्पताल

Updated on:
02 Aug 2026 06:00 am
Published on:
02 Aug 2026 06:00 am
Also Read
View All
रफी साहब के गीतों से सजी सुरमई शाम, कलाकारों ने दी श्रद्धांजलि

बारिश की कामना को लेकर अलोद में निकाली घास भैरू की सवारी

आत्मा का स्वभाव ही जीवन का वास्तविक आधार

45 करोड़ की सड़क एक साल में दूसरी बार टूटी, गुणवत्ता पर सवाल यपाटन मार्ग पर करीब 45 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 22.50 किलोमीटर लंबी सड़क एक वर्ष के भीतर दूसरी बरसात भी नहीं झेल पाई। सड़क एक साल में दूसरी बार क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बार सुवासा, बाजड और जमीतपुरा गांव के बीच करीब 15 स्थानों पर डामर जगह-जगह से उखड़ गया है और गिट्टी बाहर निकलने लगी है। क्षतिग्रस्त सड़क पर पैचवर्क की मांग को लेकर ग्रामीणों ने शनिवार को सुवासा कस्बे में विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर बने गहरे गड्ढों के कारण विशेष रूप से रात्रि के समय वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अंधेरे में गड्ढे दिखाई नहीं देने से आए दिन दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और सार्वजनिक निर्माण विभाग से तत्काल पैचवर्क और सड़क की स्थायी मरम्मत कराने की मांग की है। जानकारी के अनुसार, तालेड़ा से केशोरायपाटन तक सड़क निर्माण के लिए 45 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। निर्माण कार्य 15 अगस्त 2022 से शुरू हुआ था और इसे सितंबर 2023 तक पूरा किया जाना था, लेकिन सड़क के दोनों ओर लगभग डेढ़ मीटर पटरी निर्माण का कार्य अभी भी कई स्थानों पर अधूरा पड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क पर लगभग एक वर्ष पूर्व डामरीकरण किया गया था, लेकिन दिसंबर 2025 में सुवासा, बाजड और जमीतपुरा के बीच करीब 20 स्थानों पर सड़क उखड़ गई थी। उस समय संवेदक द्वारा पैचवर्क कर सड़क की मरम्मत की गई थी, लेकिन मरम्मत कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं रही। परिणामस्वरूप जुलाई 2026 में दूसरी बरसात शुरू होते ही सड़क फिर से उखड़ गई और कई स्थानों पर गिट्टी निकलने लगी है। लगातार टूट-फूट के कारण सड़क धीरे-धीरे बड़े गड्ढों में तब्दील होती जा रही है। इस मार्ग से प्रतिदिन करीब तीन हजार से अधिक छोटे-बड़े व भारी वाहन गुजरते हैं। यह सड़क नेशनल हाईवे 52 व मेगा हाईवे को जोड़ती है। सड़क की बदहाल स्थिति के कारण वाहन चालकों, किसानों, मजदूरों और आसपास के गांवह/वें के लोगों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। अभिषेक गुर्जर, सहायक अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, तालेड़ा ने बताया कि तालेड़ा से सुवासा के बीच कुछ स्थानों पर सड़क क्षतिग्रस्त हुई है और सड़क निर्माण का कुछ कार्य अभी शेष है। संवेदक का पूरा भुगतान अभी नहीं हुआ है। क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत करने के निर्देश संवेदक को दे दिए गए हैं। सड़क वर्तमान में गारंटी अवधि में है और इसकी मरम्मत संवेदक द्वारा ही कराई जाएगी।

पालना गृह में गूंजी किलकारी